फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   story of success, army soldier became officer.

दिल छू जाएगी जांबाज अफसर बेटों की कहानी

Sun, 07 Jun 2015 11:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 07 Jun 2015 11:05 AM IST
विज्ञापन
story of success, army soldier became officer.

नेपाल निवासी भुवन थापा सेना में अफसर बनना चाहते थे, लेकिन एनडीए में चयनित न होने पर 3/4 गोरखा राइफल्स में बतौर सिपाही भर्ती हो गए। भुवन ने बताया कि जब वह सिपाही भर्ती हुए तो उनके पिता उनसे ज्यादा खुश नहीं थे।

विज्ञापन


पिता खेम बहादुर थापा पुलिस में सब इंस्पेक्टर थे और बेटे को खुद से आगे बढ़ता देखना चाहते थे। भुवन ने बताया कि उनके पिता ही उनकी असल प्रेरणा हैं जिनके सामने खुद को साबित करना उनके लिए चुनौती थी।
विज्ञापन


2011 में भुवन पहले ही प्रयास में एसीसी के लिए चयनित हुए और अब कॉलेज टॉप कर गोल्ड मेडल हासिल किया। भुवन के पास आउट होने के मौके पर उनके माता-पिता और पत्नी पहुंचे थे। पिता ने कहा कि उनके बेटे ने परिवार का नाम ऊंचा किया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

परिवार में पहला अफसर बनेगा मेरठ का प्रवीण

story of success, army soldier became officer.

चीफ आफ आर्मी स्टाफ सिल्वर मेडल से सम्मानित मेरठ के गंगानगर निवासी प्रवीण कुमार परिवार में पहले हैं जो सैन्य अफसर बनेंगे। प्रवीण के पिता उनके पैतृक गांव भट्टीपुरा में खेतीबाड़ी करते हैं। 2008 में आर्मी एजूकेशन कोर में सिपाही भर्ती हुए प्रवीण का आर्मी कैडेट कालेज तक का सफर कड़ी मेहनत भरा रहा है।

पिता किसान थे, संसाधनों की कमी के कारण उन्होंने ग्रेजुएशन के दौरान ही सेना में भर्ती होने का फैसला लिया। सेना में आने के बाद उनके वरिष्ठ अधिकारियों ने उनमें अफसर बनने लायक गुण देखे तो प्रोत्साहित किया।

सैनिक से अफसर बनने के लिए तीन वर्ष की अनिवार्य नौकरी पूरी होते ही वे पहले ही प्रयास में चयनित हो गए। उन्होंने बताया कि परिवार के साथ सीनियर अधिकारियों का जो सहयोग और प्रोत्साहन मिला यह उसी की नतीजा है कि चयन होने के बाद कोर्स में टाप करने की प्रेरणा मिली।

किसान पिता हैं केरल के अनीश की प्रेरणा

story of success, army soldier became officer.

चीफ आफ आर्मी स्टाफ ब्रांज मेडल हासिल करने वाले केरल के अनीश केजे वर्ष 2005 में सिग्नल रेजिमेंट में भर्ती हुए। पिता शशि केएन किसान हैं और वही उनकी प्रेरणा भी हैं।

अनीश ने बताया कि कॉलेज में प्रवेश लेने से पहले वह बतौर सिपाही भर्ती हुए थे, लेकिन उनको यकीन था कि वह अफसर बन सकते हैं।

सिग्नल में रहते हुए उन्होंने पढ़ाई पूरी की और फिर एसीसी के लिए आवेदन किया। उनका मानना है कि बतौर सैनिक आपका रोल सीमित होता है, लेकिन अफसर बनने के बाद अपने साथियों के प्रति आप जवाबदेह हो जाते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed