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इस शख्स के छूते ही बेजान चीजों में भी आ जाती है जान, हाथों में है अद्भुत शक्ति

Mon, 27 Nov 2017 08:02 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 27 Nov 2017 08:02 AM IST
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Story of Master Zaheer Hassan in uttarakhand
Zaheer Hassan - फोटो : amar ujala

देहरादून निवासी इस शख्स के हाथों से ऐसा जादू है कि इनके छूते ही बेजान चीजों में भी जान आ जा है। इस बात यकीन करना आसान नहीं है, लेकिन पढ़ेंगे तो जान जाएंगे..

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18वीं सदी की घड़ियां हों या 1916 की बाइकें या फिर रॉयल रायज की शान विंटेज कारें। इन दुर्लभ वस्तुओं के नाम भले ही हमें और आपको पुराना व ऑउट डेटेड लगते हैं, लेकिन दून के भंडारी बाग, मुस्लिम कॉलोनी निवासी जहीर हसन के लिए उनका वजूद है। जहीर का हाथ लगते ही ये दुर्लभ और बेजान चीजें चल पड़ती हैं। मानो इन चीजों को जहीर के हाथों के स्पर्श की ही जरूरत थी।
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दून के भंडारी बाग, मुस्लिम कॉलोनी निवासी जहीर हसन कोई पेशेवर इंजीनियर और मैकेनिक नहीं हैं, लेकिन उनका जुनून और हुनर अच्छे से अच्छे हुनरमंद को चौंकाने के लिए काफी है। कोई भी एंटीक चीज जहीर के हाथों में आते ही निखर और बोल पड़ती है।
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यही कारण है कि देशभर से एंटीक चीजें संवरने और बिकने उनके गैराज रूपी म्यूजियम में आती हैं। हाईस्कूल तक पढ़े 67 वर्षीय जहीर को यह हुनर विरासत में मिला है। पहले शौक में जहीर अपने पिता के साथ एंटीक चीजों को सही करने में हाथ बंटाते थे, लेकिन अब देहरादून ही नहीं देश के कई हिस्सों में जहीर के हुनर का बोलबाला है।

हर चीज दिलाती राजसशाही अहसास, इंग्लैंड के है नामी ब्रांड

Story of Master Zaheer Hassan in uttarakhand
घड़ी और बाइक - फोटो : amar ujala
अब जहीर का बेटा जावेद भी उनका हाथ बंटाता है। भंडारी बाग, मुस्लिम कॉलोनी स्थित जहीर हसन का घर दुनिया की कई दुर्लभ वस्तुओं का म्यूजियम है। यहां रखी हर चीज राजशाही का अहसास दिलाती हैं। अधिकांश चीजें इंग्लैंड के नामी ब्रांड हैं। मोटरसाइकिलों का अनूठा संग्रह है। 1916 से लेकर 1926 की कई मोटरसाइकिलें खड़ी हैं।

ऐसी मोटरसाइकिलें शायद ही आज की पीढ़ी में किसी ने देखी हों। जहीर हसन बताते हैं कि कई एंटीक चीजों के कल-पुर्जे नहीं मिलते हैं। ऐसे में कल-पुर्जे और स्पेयर बनाने पड़ते हैं। घड़ियों की कमानी और पुर्जे बनाने में कई बार तो महीनों लग जाते हैं, लेकिन घड़ी की अटकी सुई, 150 साल पुरानी बाइक का बंद इंजन, चालू होने पर बेहद खुशी होती है।

गैस से जलती है हेड लाइट
इंग्लैंड की एजेएस कंपनी की डबल सिलेंडर की ‘वी
टुईन’ बाइक में टैंक से इंजन तक पंप से ईंधन की सप्लाई होती है। बाइक की हेड लाइट में बल्ब नहीं है। बाइक में एक चैंबर है, जिसमें कार्बाइट डाला जाता है। उससे बनने वाली गैस एक पाइप से हेड लाइट तक पहुंचती है। हेड लाइट खोलकर उसमें माचिस से लैंप जलाया जाता है।

देश में इकलौती बाइक का दावा

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बाइक - फोटो : amar ujala
1916 की इंग्लैंड की बीएसए कंपनी की बाइक से भी नजर नहीं हटती है। बाइक का ऑपरेटिंग सिस्टम ही अनूठा है। गियर लीवर से लेकर पूरा कंट्रोल हैंडिल पर है। जहीर हसन 1936 की न्यू हडसन अमेरिकी कंपनी की इकलौती बाइक होने का दावा भी करते हैं।
1940 की गियर और फोल्डिंग साइकिल
1940 की रॉबन हुड कंपनी की गियर और व्हील ड्रम वाली साइकिल, 1942 की फोल्डिंग साइकिल भी जहीर के म्यूजियम में है। फोल्डिंग साइकिल को तब पैराशूट साइकिल के नाम भी जानते थे।

सदियों पुरानी घड़ियों का संग्रह
जहीर के म्यूजियम में 1872 से लेकर 1930 तक की घड़ियों का जखीरा है। एक आम कारीगर के लिए सदियों पुरानी इन घड़ियों का मैकेनिज्म समझना तो दूर खोलना भी आसान नहीं है। जहीर इन घड़ियों के ठहरे वक्त को फिर चलायमान कर देते हैं।

घर के आगे खड़ी है विंटेज कार
जहीर के म्यूजियम में 1929 की फिएट की रॉयल रायज की शान वीटेंज कार और द्वितीय विश्व युद्ध में गोरे सैनिकों की सवारी रही जीप भी शोभा बढ़ा रही हैं। लेफ्ट हैंड स्टेयरिंग और तीन गियर वाली जीप आज भी शौकिया लोगों की शान हैं।

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घड़ी - फोटो : amar ujala
एयर क्राफ्ट व हेलीकाप्टर भी बनाया
जहीर हसन एयर क्राफ्ट, हेलीकाप्टर, पैरा मोटर और माइक्रो प्लेन तक बनाकर उनकी सफल उड़ान कर चुके हैं। जहीर का दावा है कि 1974 में एयर क्राफ्ट बनाया, जिसके लिए फ्रांस से इंजन मंगवाया था। टू सीटर माइक्रो हेलीकाप्टर बनाया था। जो आज भी दून कालेज में शोभा बढ़ा रहा है। 1990 में पैरा मोटर तैयार की। जिसकी सफल उड़ान की गई।

हर राज्य से आते हैं एंटीक आइटम
जहीर बताते हैं एंटीक चीजों को बहुत कम लोग सुधार पाते हैं। उनके यहां कलकत्ता से घड़ियां, दिल्ली, महाराष्ट्र से बाइक सही होने आई हैं। काम बहुत बारीक होता है ऐसे में इनको सही करने में कई बार महीनों लग जाते हैं।
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