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वादा खिलाफी से फिर गुस्से में राज्य कर्मचारी
अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 21 Nov 2013 08:22 AM IST
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उत्तराखंड में करीब 21 दिन की हड़ताल पर रहने के बाद शांत हुए राज्य कर्मचारी एक बार फिर से असंतुष्ट नजर आ रहे हैं।
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शासन ने कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग (ग्रेड पे) पर 20 नवंबर तक सकारात्मक फैसला लेने का इरादा जताया था। लेकिन इस मांग पर अभी तक कोई फैसला नहीं हो सका। वहीं हड़ताल अवधि का वेतन समायोजित नहीं होने से भी कर्मचारी नाराज हैं।
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21 दिन रही थी हड़ताल
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद विभिन्न मांगों को लेकर करीब 21 दिन हड़ताल पर रहा था। बाद में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद कर्मचारियों ने हड़ताल स्थगित करने का ऐलान किया था। कर्मचारियों को 20 नवंबर तक 2800 ग्रेड पे की जगह 4200 ग्रेड पे करने की मांग पर सकारात्मक फैसला करने का आश्वासन दिया गया था।
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पर 20 नवंबर बीत जाने के बाद भी शासन कोई फैसला नहीं कर पाया। इस बात से नाराज राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के पदाधिकारियों ने मुख्य सचिव सुभाष कुमार और अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा से मंगलवार को मिलने की कोशिश की। पर दोनों ही अधिकारी उपलब्ध नहीं थे।
अगला कदम उठाने पर विचार करेगी परिषद
देर शाम परिषद की कोर कमेटी की बैठक में लंबित मांगों को लेकर 22 नवंबर को मुख्य सचिव सुभाष कुमार से मिलने का फैसला हुआ। परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि वेतन विसंगति समिति की 25 नवंबर को होने वाली बैठक तक इंतजार किया जाएगा। यदि इस दिन भी कोई फैसला नहीं होता है तो परिषद अगला कदम उठाने पर विचार करेगी।
परिषद के पदाधिकारियों की नाराजगी की एक और वजह भी है। अभी तक हड़ताल अवधि का वेतन समायोजित नहीं हुआ है। ऐसे में लोक निर्माण विभाग, सिंचाई, मत्स्य सहित कई विभागों में कर्मचारियों को वेतन मिला ही नहीं है। सरकार से हुए समझौते के तहत यह वेतन उपार्जित अवकाश में समायोजित होना था।
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