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Dehradun Neo Metro: नियो मेट्रो के लिए केंद्र की मदद के भरोसे प्रदेश सरकार, 1600 करोड़ रुपये की दरकार

Mon, 20 Mar 2023 06:44 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Mon, 20 Mar 2023 06:44 PM IST
सार

बजट में प्रदेश सरकार की मेट्रो को लेकर गंभीरता से साफ है कि नियो प्रोजेक्ट के लिए वह पूरी तरह केंद्र के भरोसे है।

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Uttarakhand government relying help center for Neo Metro Project dehradun
रुपये(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : istock

विस्तार

राजधानी में नियो मेट्रो चलाने के लिए 1600 करोड़ रुपये चाहिए। लेकिन, इसके सापेक्ष उत्तराखंड सरकार ने अपने बजट में महज 101 करोड़ का प्रावधान किया है। हालांकि, यह रकम नियो मेट्रो के मौजूदा कार्यालय और अन्य खर्च के लिए पर्याप्त है। इससे पहले भी उत्तराखंड मेट्रो रेल कारपोरेशन के लिए राज्य सरकार 75 करोड़ रुपये और अन्य छोटे बजट का प्रावधान कर चुकी है, जो सिर्फ वेतन-भत्तों व छोटे-मोटे कार्यों के लिए ही पर्याप्त था।

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बजट में प्रदेश सरकार की मेट्रो को लेकर गंभीरता से साफ है कि नियो प्रोजेक्ट के लिए वह पूरी तरह केंद्र के भरोसे है। उधर, केंद्र में नियो मेट्रो की फाइल अभी लटकी है। केंद्र सरकार की हरी झंडी मिलने के बाद ही वहां से बजट का रास्ता साफ हो पाएगा। दून में मेट्रो चलाने के नाम पर पिछले पांच वर्षों में करोड़ों रुपये सर्वे आदि पर खर्च हो गए। अब प्रोजेक्ट की फाइल केंद्र सरकार के पास है। पीएमओ में प्रोजेक्ट का प्रजेंटेशन हो चुका है। यहां से ग्रीन सिग्नल मिला तो केंद्र सरकार उत्तराखंड के लिए बजट में प्रावधान करेगी।
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लेकिन, उत्तराखंड सरकार ने बजट में नियो मेट्रो के लिए जो छोटा बजट जारी किया, उससे लगता है कि नियो मेट्रो फिलहाल सरकार की प्राथमिकता में काफी पीछे है। अकेले कार्यालय खर्च की बात करें तो उत्तराखंड मेट्रो कारपोरेशन के कार्यालय में 20 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं। कार्यालय भी किराये के भवन में चलता है। कर्मचारियों का वेतन और ऑफिस किराया, अन्य खर्चों पर सालभर में करोड़ों रुपये लगते हैं। इसके एवज में सरकार की ओर से मिला बजट नाकाफी है।
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पीपीपी मोड पर नहीं किया विचार
मेट्रो परियोजना के लिए प्रदेश सरकार केंद्र के भरोसे है लेकिन पीपीपी मोड पर विचार नहीं किया गया। जबकि, पीपीपी मोड में नियो मेट्रो के लिए आसानी से पार्टनर मिल सकते हैं। मेट्रो में होने वाले लाभ के चलते प्राइवेट पार्टनर अधिक दिलचस्पी दिखा सकते हैं।

मेट्रो चली तो भरेगी झोली
मेट्रो प्रोजेक्ट अभी बेशक देहरादून से दूर हो लेकिन इस पर व्यय कर सरकार सालभर में ही 500 करोड़ से अधिक कमा सकती है। इसके लिए भविष्य में सरकार को किसी भी तरह के वित्तीय सहयोग की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।


नियो मेट्रो के लिए राज्य सरकार ने 101 करोड़ का बजट स्वीकृत किया है। इस रकम को कार्यालय के खर्च और मेट्रो संबंधी अन्य कार्यों के लिए प्रयोग किया जाएगा।
- जितेंद्र त्यागी, प्रबंध निदेशक, उत्तराखंड मेट्रो रेल कारपोरेशन

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