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उत्तराखंड प्रशासन को ढूंढे नहीं मिल रहे दिव्यांग

Wed, 16 Nov 2016 10:59 AM IST
नलिनी गुसाईं / अमर उजाला, देहरादून
नलिनी गुसाईं / अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 16 Nov 2016 10:59 AM IST
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state administration cannot find disabled
व्हीलचेयर पर बैठा व्यक्ति - फोटो : डेमो फोटो

देहरादून जिले में हजारों दिव्यांग हैं, लेकिन प्रशासन को ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। बीएलओ की ओर से तहसील को दी गई सूची तो यही साबित कर रही है।

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इस सूची के अनुसार जिलेभर में महज 114 ही दिव्यांग हैं। दून कैंट और रायपुर में दिव्यांगों की संख्या शून्य है। जबकि नंदा देवी निर्धन दिव्यांग कल्याण एसोसिएशन के अनुसार जिले में 13 हजार से अधिक दिव्यांग हैं। ये दिव्यांग खुद अपने मतदाता पहचान पत्र बनवाने के लिए परेशान हैं, लेकिन इनकी सुनवाई नहीं हो पा रही है।
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एक ओर दिव्यांगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं। मतदाता जागरूकता महोत्सव में उन्हें ट्रेनिंग देने के लिए बूथ बनाए गए थे तो वहीं दिव्यांगों का चिन्हीकरण का कार्य तक सही तरीके से नहीं किया जा रहा है। कुल मिलाकर दिखावे के अलावा धरातल पर कोई काम होता नहीं दिख रहा है।
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तभी तो जिले में करीब 13 हजार से अधिक दिव्यांग होने के बावजूद बीएलओ को मिल नहीं पा रहे हैं। बीएलओ की ओर से किए गए क्षेत्रवार चिन्हीकरण में दून कैंट और रायपुर में दिव्यांगों की संख्या शून्य दिखाई गई है जबकि दून कैंट में 800 और रायपुर में भी करीब 1200 दिव्यांग हैं। यदि इस अभियान में बीएलओ दिव्यांग एसोसिएशन की ही मदद ले लेते तो भी उनकी मुश्किल आसान हो सकती थी।

ये हैं बीएलओ के दिए आंकड़े
कहां कितने हैं दिव्यांग
सहसपुर- 9
धर्मपुर- 96
रायपुर- 00
राजपुर रोड- 02
दून कैंट- 00
मसूरी- 07
डोईवाला- 00
योग     114  

करीब-करीब यह है सही आंकड़े
राजपुर क्षेत्र- 500
दून कैंट- 800
धर्मपुर- 3500
रायपुर- 1200
डोईवाला- 1500
सहसपुर- 5000
मसूरी- 350
योग  13150 (नंदा देवी निर्धन दिव्यांग कल्याण एसोसिएशन से मिली जानकारी के अनुसार)

नहीं हो रही सुनवाई
एक ओर दिव्यांगों को अधिक से अधिक जागरूक करने के लिए हवा-हवाई अभियान चल रहे हैं तो दूसरी ओर जाकिर जैसे कई दिव्यांग हैं जिनके मतदाता पहचान पत्र ही नहीं बनाए जा रहे हैं। सहसपुर के कोटरा संतोर गांव में रहने वाले जाकिर हुसैन ने बताया कि एक नहीं कई बार फार्म भरकर मतदाता पहचान पत्र के लिए आवेदन कर चुके  हैं। इसके बावजूद पहचान पत्र नहीं बनाया जा रहा है। न तो उनका फार्म रिजेक्ट होता है न ही पहचान पत्र बनता है। 


जिले में दिव्यांगों की वास्तविक संख्या तक की जानकारी अधिकारियों को नहीं है और न ही वह इसमें कोई रुचि ले रहे हैं। यह वाकई बेहद शर्मनाक स्थिति है। हालांकि, हमारी ओर से दिव्यांगों की वास्तविक संख्या का डाटा तैयार कर समाज कल्याण विभाग को दिया गया है। दिव्यांगों को पहचान पत्र बनाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं जाता। 
- बसंत कुमार थपलियाल, प्रदेश अध्यक्ष, नंदा देवी निर्धन दिव्यांग कल्याण एसोसिएशन 

विधानसभा वार दिव्यांगों की वास्तविक संख्या जुटाए जाने की जिम्मेदारी बीएलओ को दी गई है। उनकी ओर से अभी तक जो भी जानकारी दी गई है। उससे संतुष्ट न होते हुए उन्हें सही तरीके से संख्या जुटाए जाने के दिशा-निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही दिव्यांगों की वास्तविक स्थिति हमारे सामने होगी। इसके साथ ही जिनका मतदाता पहचान पत्र नहीं बना है, उनका पहचान पत्र बनाना हमारी जिम्मेदारी है। 
- हरि गिरी, एसडीएम, सदर

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