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उत्तराखंड पुलिस में कतरे गए कप्तानों के 'पर'

Wed, 04 Jan 2017 09:58 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 04 Jan 2017 09:58 AM IST
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ssp cannot dismiss SI and inspector without DIG permission
- फोटो : demo pic

उत्तराखंड में अब थानेदारों, इंस्पेक्टरों और सीओ के तबादलों में जिलों के कप्तानों की मर्जी नहीं चलेगी।

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कप्तानों को एक साल से पहले किसी भी थाना प्रभारी को हटाने का वाजिब कारण डीआईजी को बताना होगा। डीआईजी के अनुमोदन के बाद ही स्थानांतरण और तैनाती दी जा सकेगी। पुलिस महानिदेशक ने पुलिस एक्ट में दिए गए प्रावधानों को सख्ती से लागू करने के आदेश दिए हैं।

प्रदेश के कई जिलों में थानेदार, इंस्पेक्टर और पुलिस उपाधीक्षकों के स्थानांतरण, तैनाती मनमाने तरीके से किए जाने को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। हरिद्वार में तो डीजीपी के हस्तक्षेप के बाद आईजी को विवादित तबादला सूची निरस्त तक करनी पड़ी थी।
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पुलिस महानिदेशक एमए गणपति ने हाल में ही पुलिस कप्तानों को भेजे निर्देश पत्र में कहा कि देखने में आ रहा है कि थाना प्रभारियों और इंस्पेक्टरों को अल्प समय में बिना ठोस कारण के हटाया जा रहा है। यह स्थिति सही नहीं है। उत्तराखंड पुलिस अधिनियम में पहले से ही एसओ और राजपत्रित अधिकारी को हटाए जाने के मानक निर्धारित है।
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एक साल की अवधि से पहले किसी थानेदार अथवा इंस्पेक्टर को हटाने से पहले उसका ठोस कारण बताते हुए रेंज के डीआईजी से उसका अनुमोदन लेना होगा। यह जानकारी पुलिस मुख्यालय को भी जाएगी। अनुमोदन मिलने के बाद ही एसएसपी हटाने और तैनातरी की प्रक्रिया अपना सकेंगे। डीजीपी के इस नए आदेश से पुलिस कप्तानों में बैचेनी है।

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