बहुगुणा का लोकायुक्त बना मंहगी हाथी

अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 24 Jan 2014 09:21 AM IST
specialist says, lakayukt bill is not effective
मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी के बनाए लोकायुक्त एक्ट को खारिज करके नया लोकायुक्त बिल विधानसभा से मंगलवार को पारित करा लिया।

मुख्यमंत्री का कहना था कि खंडूड़ी के लोकायुक्त बिल में काफी खामियां थी, इसलिए उसे बदल कर केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए लोकपाल बिल पर आधारित नया लोकायुक्त बनाया गया। इससे भ्रष्टाचार को रोकने में मदद मिलेगी।

लेकिन जानकारों का मानना है कि उत्तराखंड लोकायुक्त विधेयक 2014 बेहद महंगा गजराज साबित होगा। इससे पीड़ित पक्ष को काफी लंबी और जटिल प्रक्रिया से गुजरना होगा।

लंबी और जटिल प्रक्रिया
कानूनी जानकारों का कहना है कि किसी के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने की प्रारंभिक जांच 60 दिन (दो माह), अधिकतम अवधि 90 दिन (तीन माह) और द्वितीय जांच छह माह में पूरी होगी।

इससे पूरी प्रक्रिया काफी लंबी और जटिल हो जाएगी। इस अवधि में आरोपी या भ्रष्टाचारी को संरक्षण मिल सकता है और वह मामले से जुड़े साक्ष्यों को नष्ट या अपने पक्ष में करने में भी सफल हो सकता है।

न्यायालय का अधिक हस्तक्षेप
विशेषज्ञों के मुताबिक भले ही प्रदेश में लोकायुक्त को स्वायत्त संस्था का स्वरूप दिया गया है, लेकिन लोकायुक्त पीठ के अधिकारों में न्यायालयों का हस्तक्षेप बार-बार नजर आता है।

कुछ प्रावधान ऐसे हैं, जिनके चलते पीठ का हर आदेश कोर्ट जा सकता है। मसलन, गंभीर मामलों में संपत्ति कुर्क की जा सकती है। हाईकोर्ट के स्तर पर लोकसेवक को दोषमुक्त करने पर ही संपत्ति वापस होगी।

झूठी शिकायत पर जुर्माना
नए लोकायुक्त में प्रावधान है कि झूठी शिकायत पर शिकायतकर्ता के लिए सजा और जुर्माना लगाया जाएगा। यह व्यवस्था प्राकृतिक न्याय के प्रतिकूल जाती है। जुर्माना लगने पर शिकायतकर्ता भी न्यायालय का रुख कर सकता है।ॉ

जानकारों के मुताबिक बेहतर यह होता कि शिकायत के साथ शपथपत्र लगाना अनिवार्य किया जाता। इसमें शिकायतकर्ता की संपत्ति का उल्लेख भी किया जाए और यह भी कि शिकायत झूठी पाए जाने पर आधी संपत्ति सरकार जब्त कर लेगी।

जल्दबाजी में बना विधेयक
विशेषज्ञों के मुताबिक खंडूड़ी सरकार ने विधानसभा चुनाव 2012 से पहले और अब बहुगुणा सरकार ने लोकसभा चुनाव से ऐन पहले हड़बड़ी में यह विधेयक लागू किया है। दोनों बार जल्दबाजी में कई ऐसी संवैधानिक और प्रक्रियात्मक चूक की गई हैं, जो लोकायुक्त को इसके मकसद में कामयाब होने की राह से रोक सकती हैं।

कर्नाटक की तरह मिले स्वायत्तता

कर्नाटक में लोकायुक्त को आकस्मिक छापे और वसूली का अधिकार दिया गया है। वहां वर्ष 2008-09 में लोकायुक्त ने करीब 250 करोड़ रुपये का राजस्व सरकार को दिया। उत्तराखंड में लोकायुक्त के बजाय विशेष न्यायालय को नुकसान के आकलन और वसूली का अधिकार दिया गया है।

Spotlight

Most Read

Chandigarh

हरियाणाः यमुनानगर में 12वीं के छात्र ने लेडी प्रिंसिपल को मारी तीन गोलियां, मौत

हरियाणा के यमुनानगर में आज स्कूल में घुसकर प्रिंसिपल की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मामले में 12वीं के एक छात्र को गिरफ्तार किया गया है।

20 जनवरी 2018

Related Videos

बेकाबू होकर फैलती जा रही है बागेश्वर के जंगलों में लगी आग

उत्तराखंड के बागेश्वर में पिछले हफ्ते जगलों में लगी आग अबतक काबू में नहीं आई है। बेकाबू होकर फैल रही जंगल की आग की जद में आसपास के कई गांव आ गए हैं।

19 जनवरी 2018

आज का मुद्दा
View more polls
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper