CM के 100 दिन: जानिए, त्रिवेंद्र सरकार ने अब तक क्या किया, क्या बाकी?
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त्रिवेंद्र सिंह रावत उत्तराखंड के नौवें मुख्यमंत्री हैं। बीजेपी के लिहाज से देखें, तो नित्यानंद स्वामी, भगत सिंह कोश्यारी, भुवन चंद्र खंडूड़ी और डा. रमेश पोखरियाल निशंक के बाद उनका मुख्यमंत्री बनने का नंबर आया है।
कहा जा सकता है कि वे बीजेपी के पांचवें नंबर के मुख्यमंत्री हैं, लेकिन इन सारी स्थितियों के बीच वह बीजेपी के ऐसे पहले मुख्यमंत्री हैं, जो कि प्रचंड बहुमत की सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं।
प्रचंड बहुमत है, तो प्रचंड अपेक्षाएं भी हैं। 70 में से 57 सीटों वाली बीजेपी सरकार के मुख्यमंत्री बतौर त्रिवेंद्र सिंह रावत का सौ दिन का कार्यकाल पूरा हो गया है। इन सौ दिनों में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ कामकाज की रफ्तार को लेकर त्रिवेंद्र सिंह रावत की कई बार तुलना हुई।
शुरुआत ढीली रही, लेकिन बाद में सरकार रफ्तार पकड़ते हुए दिखाई दी है। हालांकि ये रफ्तार अब भी उतनी नहीं है, जितनी प्रचंड बहुमत के नजरिये से अपेक्षित है। फिर भी, वह स्थिति जरूर बनी है, जिसमें त्रिवेंद्र सिंह रावत जनता से मजबूती के साथ कुछ कहने की स्थिति में पहुंच गए हैं।
एक सीएम के तौर पर उनके कामकाज की बात हो या फिर डोईवाला के विधायक बतौर उनका काम, अमर उजाला के स्टेट ब्यूरो चीफ संजय त्रिपाठी ने इन सौ दिनों का हिसाब-किताब जानने की कोशिश की। कुछ उनसे तो कुछ उनके विधानसभा क्षेत्रवासियों से। नतीजा क्या सामने आया, आप भी पढ़ें-
स्वास्थ्य सुविधाओं को ऑक्सीजन
इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं पर रहा जोर -:
-डबल इंजन के भरोसे सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं की मजबूती के लिए अहम प्रयास किए हैं। मुख्यमंत्री रावत कहते हैं कि मेरा पहला फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर पर है। कर्णप्रयाग-जोशीमठ रेल लाइन के काम को सबसे महत्वपूर्ण माना जा सकता है। इसके अलावा रुड़की-देवबंद रेल लाइन पर भी सहमति बन गई है, जिसके लिए राज्य सरकार अपने पास से छह सौ करोड़ रुपए खर्च करेगी।
रेल पटरियों का जाल बिछने से रोजगार सृजन होने के साथ आवागमन सुविधाएं तो बढ़ेंगी हीं, पर्यटन की संभावनाएं भी और बेहतर होंगी। इसी तरह ऑल वेदर रोड के कामकाज की प्रगति की समीक्षा भी लगातार की जा रही है। इसमें सड़कों के निर्माण और रख-रखाव के लिए निर्धारित बजट के अलावा दो सौ करोड़ का अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया गया है। वहीं, पानी के लिए भी बजट से अतिरिक्त ढाई सौ करोड़ की व्यवस्था की गई है, जिसमें जल संचयन, पानी के जलाशयों की स्थापना पर जोर देने का संकल्प है।
स्वास्थ्य सुविधाओं को ऑक्सीजन-
पहाड़ी क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं की बेहतर स्थिति स्थापित करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत इसे स्वीकार करते हैं, लेकिन ये भी कहते हैं कि इस संबंध में गंभीर प्रयास शुरू कर दिए हैं। वह बताते हैं कि श्रीनगर मेडिकल कॉलेज को आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज में तब्दील करने के संबंध में सेना की ओर से सैद्धांतिक सहमति मिल गई है।
अल्मोड़ा के निर्माणाधीन कॉलेज के लिए भी यही व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार-सेना के अधीन संचालन होने की दशा में पर्वतीय क्षेत्रों के रोगियों को बेहतर उपचार सुलभ होगा, वहीं हाई एल्टीट्यूड पर काम करने वाले सैनिकों को चिकित्सा सुविधाएं भी मिल सकेंगी। सीएम के अनुसार-टाटा ने भी राज्य में कैंसर अस्पतालों की स्थापना के लिए सहमति दी है। इसके अतिरिक्त पर्वतीय क्षेत्र जहां चिकित्सकों का अभाव रहा है, वहां सरकार बनने के बाद 90 से ज्यादा डॉक्टरों के तबादले किए गए हैं। यह भी निर्देश दिए हैं कि जिला अस्पतालों में कम से कम आठ से दस डाक्टर रहें। इसी तरह राज्य के छह अस्पतालों को ई-हास्पिटल सुविधा से लैस किया गया है। यहां पेशेंट घर से ही अपना बेड बुक करा सकता है। साथ ही वस्तुस्थिति का जायजा ले सकता है।
ट्रांसपोर्ट सिस्टम को पंख लगाने पर जोर
ट्रांसपोर्ट सिस्टम को पंख लगाने पर जोर
त्रिवेंद्र सरकार उत्तराखंड में बेहतर परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत को महसूस कर रही है। इस क्रम में सरकार ने पांच से छह सालों में मेट्रो को दून में शुरू करने की बात कही है। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के अनुसार-दून में मेट्रो के प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। मेट्रो कारपोरेशन में निदेशक की नियुक्ति कर दी गई है। उम्मीद की जा रही है कि पांच से छह सालों में यह परियोजना धरातल पर आ जाएगी।
गढ़वाल और कुमाऊं की बेहतर कनेक्टिविटी के लिए कंडी रोड को दुरुस्त करने के अलावा चौड़ीकरण का काम भी शुरू होने जा रहा है। मौजूदा वक्त में एक से दूसरे मंडल जाने के लिए यूपी के रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ता है, जो न केवल अधिक वक्त लेता है बल्कि वस्तुओं और परिवहन की कीमतें बढ़ाता है। भारत सरकार भी इसके लिए सहयोग करने को तैयार है। सीएम बताते हैं कि राज्य की ओर से कंडी मार्ग के पुनरुद्धार के लिए नोडल अफसर की नियुक्ति कर दी गई है। इसी तर्ज पर राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शुमार हरिद्वार और नैनीताल में अंडर ग्राउंड केबलिंग का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए 1700 करोड़ की डीपीआर बनाई गई है। इस कार्य में धन की व्यवस्था भारत सरकार करेगी।
शिक्षा का स्तर सुधारने की कवायद-
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मुताबिक राज्य में शिक्षा का स्तर बेहतर करने के लिए तमाम प्रयास अमल में लाए हैं। देश के तीन बड़े संस्थान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नालॉजी, हॉस्पिटलिटी यूनिवर्सिटी और सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक टेक्नालॉजी उत्तराखंड में आरंभ होने जा रहे हैं। इसके लिए औपचारिकताएं भी पूरी की जा चुकी हैं। एक वर्ष के भीतर ये आस्तित्व में आ जाएंगे। विद्यालयी शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें राज्य सरकार निजी स्कूलों की मनमानी पर नियंत्रण कर रही है। टॉपर छात्रों को मुफ्त लैपटॉप दिए जाने का भी इंतजाम कर दिया है। रोजगार परक शिक्षा का स्तर बेहतर करने के लिए केंद्रीय कौशल विकास मंत्रालय का क्षेत्रीय कार्यालय राज्य में खोलने की तैयारी शुरू हो गई है। इससे राज्य में पलायन को रोकने में खासी मदद मिलेगी। केंद्र सरकार ने भी राज्य की इस समस्या को दूर करने के लिए तमाम योजनाएं शुरू की हैं।
प्रशासनिक सुधारों की ओर बढ़ाए कदम-
गुड गवर्नेंस किसी भी राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल प्रमुख बात होनी चाहिए। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि गुड गवर्नेंस के लिए उनकी सरकार कृतसंकल्प है। कामकाज में कई सुधार किए गए हैं। इसके तहत फाइलों को कम से कम टेबल पर खिसकना पड़े, इसके लिए फाइल मॉनिटरिंग सिस्टम आरंभ किए जाने का निर्णय लिया गया है। लोगों को शिकायत रहती है कि सरकारी विभाग में कर्मचारी अपनी कुर्सियों से लापता रहते हैं। इसे देखते हुए राज्य के सभी विभागों में बायोमीट्रिक अटेंडेंस सिस्टम आरंभ किया गया है। सबसे पहले सचिवालय में इसे आरंभ किया गया, जिसके बाद जिला स्तर पर तेजी से काम चल रहा है। वहीं कैबिनेट की बैठक को व्यवस्थित करने के मकसद से प्रत्येक माह के प्रथम एवं अंतिम बुधवार को इसके आयोजन की तिथि निर्धारित की गई है। कैबिनेट में जाने के पंद्रह दिन पूर्व प्रस्ताव संबंधित मंत्री के पास पहुंचाने की व्यवस्था भी शुरू हो गई है। तहसील मुख्यालय वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जोड़े जा रहे हैं। आम जनता की समस्याओं का तत्काल निस्तारण और प्रदेश व जिला स्तर पर इससे बेहतर कम्युनिकेशन हो सकेगा।
प्रमुख उपलब्धियां
कम खर्च से दूर करेंगे कर्ज का मर्ज
-राज्य पर चढ़े 45 हजार करोड़ के कर्ज को लगातार घटाने के प्रति मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रतिबद्धता जताते हुए कहा है कि राज्य में सीमित आय के स्रोतों को देखते हुए कम और उचित खर्च करने की बात तय की गई है। अतिव्यय को अपव्यय में बदलकर खर्च कम करेंगे, जिससे राज्य की आर्थिक चिंताएं दूर होंगी। मुख्यमंत्री कहते हैं कि पिछली सरकार ने घोषणाओं का अंबार लगाया था। तमाम ऐसे आदेश जारी किए जिन पर वित्त विभाग की सहमति ही नहीं है।
पिछली सरकार की तरह घोषणाओं का अंबार लगाने के बजाए भाजपा सरकार धरातल पर काम करने में विश्वास रखती है। खनन में उत्साहवर्धक खबरें हैं। अवैध खनन पर नियंत्रण किया जा रहा है। इस बार 400 करोड़ से कम राजस्व प्राप्त हुआ है, जिस चालू वित्तीय वर्ष में दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। सीमाओं पर होने वाली टैक्स चोरी पर शिकंजा कसा गया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि राज्य में पर्यटन की संभावनाएं बढ़ाई जाएंगी। आजादी के बाद से पर्यटन स्थल जस के तस हैं। ऐसे में प्रत्येक जिले में एक नया पर्यटन स्थल विकसित करने का खाका खींचा गया है।
डबल इंजन का मिला सपोर्ट-
मुख्यमंत्री ने राज्य के विकास में केंद्र का अहम योगदान बताते हुए आभार जताया है। 12 हजार करोड़ के पैकेज के अलावा 15 हजार करोड़ ऋषिकेश से कर्णप्रयाग रेल लाइन प्रोजेक्ट आरंभ करने को उन्होंने ऐतिहासिक करार दिया है। यह भी कहा है कि केंद्रीय कृषि, विद्युत, रसायन-उर्वरक समेत तमाम मंत्रालय अभी उत्तराखंड के लिए तमाम सौगात देंगे। मुख्यमंत्री ने बताया है कि उज्ज्वला योजना में राज्य के लगभग सभी बीपीएल परिवारों को निशुल्क गैस कनेक्शन मिल चुका है। यह वितरण वर्ष 2011 के सर्वेक्षण के आधार पर बीपीएल परिवारों को किया गया है। ऐसे में जो परिवार रह जाएंगे, उन्हें राज्य सरकार अपने स्तर से निशुल्क गैस कनेक्शन उपलब्ध कराएगी। राज्य सरकार उत्तराखंड के सीमांत और लघु सीमांत किसानों को दो फीसदी ब्याज पर कृषि ऋण देने जा रही है। तमाम योजनाओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से स्वीकृत होने के अंतिम चरण में हैं। जल्द ही इसकी विधिवत घोषणा की जाएगी।
प्रमुख उपलब्धियां -
- स्मार्ट सिटी बतौर राजधानी देहरादून का चयन, पहले प्रयास में ही मिली स्वीकृति।
- ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेललाइन और ऑल वेदर रोड का काम तेजी से शुरू हुआ।
- लोकायुक्त और तबादला एक्ट को लागू करने के दिशा में सरकार ने रुचि दर्शाई।
- देश में पहली बार कौशल विकास मंत्रालय का क्षेत्रीय कार्यालय राज्य में खुलवाना।
- श्रीनगर और अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज का आर्म्ड फोर्सेज कॉलेज के तौर पर विकास।
- पर्वतीय क्षेत्रों में शराब की बिक्री को हतोस्ताहित करने के लिए बिक्री का वक्त घटाना।
- कैबिनेट की बैठकों का वक्त तय, सरकारी कर्मियों के लिए बायोमीट्रिक अटेंडेंस।
भविष्य की योजनाएं
भविष्य की योजनाएं -:
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मुताबिक प्रदेश में डेढ़ लाख परिवारों तक अभी बिजली की पहुंच नहीं है। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2017 के अंत तक प्रत्येक गांव में बिजली की लाइन पहुंचा देगी। वर्ष 2018 तक हर तोक में बिजली की उपलब्धता होगी और दिसंबर 2019 तक राज्य का प्रत्येक घर बिजली से रोशन होगा।
जिन स्थानों पर नेशनल पार्क पड़ रहे हैं, वहां ऊर्जा के वैकल्पिक साधन उपलब्ध कराए जाएंगे। इसी प्रकार अभी राज्य में साक्षरता का प्रतिशत 89 है। इसे वर्ष 2019 तक सौ फीसदी करने का लक्ष्य है। सभी को आवास योजना के तहत वर्ष 2022 तक राज्य की पूरी आबादी को पक्का घर मुहैया कराया जाएगा, जिसमें टॉयलेट, बिजली, पानी आदि मूलभूत सुविधाएं मिलेंगी।
जनता जनार्दन-डोईवाला विस क्षेत्र से
-डोईवाला विधानसभा क्षेत्र में विकास हुआ है। सड़क, बिजली, स्वास्थ्य आदि ज्वलंत मुद्दों पर काम किया गया है। डोईवाला की समस्याओं को मुख्यमंत्री जानते है। अभी तक घोषणा पत्र के अनुसार काम हुआ है, जिस पर संतोष जताया जा सकता है।
-इंद्रजीत सिंह, खैरी, मारखमग्रांट।
-त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विधानसभा क्षेत्र की समस्याओं को प्राथमिकता से लिया है। जाखन नदी शीला चौकी और सूर्यधार में बांध से सिंचाई और पेयजल समस्याओं के निदान का प्रयास हुआ है। स्थानीय जनता को आने वाले दिनों में ओर बेहतर कार्य होने की उम्मीद है।
-सीमा रावत निवासी रानीपोखरी
-त्रिवेंद्र सरकार ने 100 दिनों में ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं, जिनमें एनएच घोटाले की सीबीआई जांच प्रमुख है। वह बराबर डोईवाला आ-जा रहे हैं, इससे पता चलता है कि वह अपने विधानसभा क्षेत्र को लेकर भी संजीदा है। -अश्वनी गुप्ता, प्रेम नगर बाजार
-डोईवाला विधानसभा क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर का संस्थान शुरू करने की पहल सीएम ने की है। जनता को क्षेत्र में विकास की बड़ी उम्मीदें हैं। जनभावनाओं के अनुरूप सरकार का काम दिखाई दे रहा है।
राजन गोयल, कांहरवाला