उत्तराखंड के हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट्स पर संकट!
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उत्तराखंड की जल विद्युत परियोजनाओं पर संकट के बादल छा गए हैं। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि प्रदेश की कुछ परियोजनाएं रद्द की जा सकती हैं। वैसे अदालत ने सरकार को इन परियोजनाओं का भविष्य तय करने से पहले हर पहलू पर विचार करने को कहा है।
कोर्ट ने इसके लिए सरकार को दो महीने का वक्त दिया है। मामले पर अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी।
न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मंगलवार को अटार्नी जनरल मुकुल रोहतकी ने केंद्र सरकार का पक्ष रखा। उनकी दलीलें सुनने के बाद पीठ ने एनटीपीसी, एनएचपीसी, सुपुर हाइड्रो आदि की परियोजनाओं के भविष्य पर निर्णय लेने के लिए सरकार को दो माह का समय दिया।
साथ ही पीठ ने कहा कि पनबिजली सबसे सस्ती है और इससे प्रदूषण भी कम होता है। जल विद्युत परियोजना आज की जरूरत है। लिहाजा केंद्र सरकार को सभी पहलुओं पर विचार कर फैसला लेना चाहिए।
उत्तराखंड सरकार को भी सुझाव देने को कहा
उधर, प्रशांत भूषण ने अदालत से कहा कि मंत्रालय को उस कमेटी की रिपोर्ट पर भी गौर करना चाहिए, जो अदालत द्वारा गठित की गई थी। कमेटी ने कहा था कि ये परियोजनाएं पर्यावरण के अनुकूल नहीं हैं। इस पर पीठ ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को कमेटी की रिपोर्ट भी गौर करने को कहा है।
हालांकि पहले अदालत ने इस कमेटी की रिपोर्ट को नजरअंदाज कर दिया था। शीर्ष अदालत ने उत्तराखंड सरकार को भी अपना सुझाव मंत्रालय को देने के लिए कहा है।
मालूम हो कि मंत्रालय ने हालिया रिपोर्ट में कहा था कि गत वर्ष उत्तराखंड के आई प्राकृतिक आपदा की वजह कहीं न कहीं जल विद्युत परियोजनाएं थीं। सरकार ने यह भी कहा था कि जल विद्युत परियोजनाओं से पर्यावरण को नुकसान होता है। इससे भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बना रहता है।
मंत्रालय ने यह स्वीकार किया है कि आपदा उन क्षेत्रों में हुई जिनके आसपास जल विद्युत परियोजनाएं हैं। गौरतलब है कि प्राकृतिक आपदा के खतरे को देखते हुए अदालत ने प्रस्तावित 39 परियोजनाओं में से 24 पर रोक लगा दी है।