मलिन बस्तियों को लेकर बड़ा फैसला, करना होगा यह काम नहीं तो भरना पड़ेगा जुर्माना
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नगर निगम की बोर्ड बैठक में दूसरे दिन सीमा विस्तार और सफाई मुद्दे पर पार्षदों ने जोरदार हंगामा किया। महापौर पर हिटलरशाही का आरोप लगाते हुए पार्षदों ने सदन के बेल में धरना भी दिया। हंगामे के बीच महापौर ने सीमा विस्तार और मलिन बस्तियों के भवन स्वामियों से गृहकर वसूलने संबंधी प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर लिया।
शहर की मलिन बस्तियों के बाशिंदों को भी अब गृहकर देना होगा। नगर निगम की बोर्ड बैठक में इस आशय के प्रस्ताव पर मुहर लग गई है। पार्षदों के भारी हंगामे के बीच इस प्रस्ताव को पारित कर दिया गया।
अब राजधानी के 128 मलिन बस्तियों के करीब 40,000 भवन स्वामियों को गृहकर अदा करना होगा। हालांकि, इनको गृहकर में रियायत देते हुए 25 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।
महापौर विनोद चमोली ने कहा कि प्रस्ताव पारित होने के बाद गृहकर मद में इन भवन स्वामियों से सालाना दो करोड़ राजस्व की वसूली होगी। जो ऐसा नहीं करेगा उसे जुर्माना भी भरना पड़ेगा।
सख्ती से की जाएगी वसूली
निगम ने राजधानी में 128 मलिन बस्तियां चिह्नित की हैं। बस्तियों का विनियमितीकरण करने के साथ ही यहां बिजली, पानी, सड़क और नाली समेत अन्य मूलभूत सुविधाएं मुहैया करा दी गई हैं।
लेकिन पूर्ववर्ती सरकार ने मलिन बस्तियों के बाशिंदों से गृहकर वसूली पर रोक लगा दी थी। अब भाजपा के सत्ता संभालते ही इन बस्तियों को गृहकर वसूली के दायरे में लाया गया है। नगर निगम में मंगलवार को हुई बोर्ड बैठक में इसका प्रस्ताव रखा गया, जिसे पार्र्षदों के भारी हंगामे के बीच ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
महापौर विनोद चमोली का कहना है कि मलिन बस्तियों के भवन स्वामियों से भी गृहकर लिया जाएगा। जल्द ही कर विभाग के अफसरों की बैठक बुलाकर वसूली के मसौदे को अंतिम रूप दिया जाएगा।
महापौर ने कहा कि जब मलिन बस्तियों में निगम हर बुनियादी सुविधाएं दे रहा है तो भवन स्वामियों को गृहकर देना ही होगा। इसमें किसी तरह की रियायत का सवाल ही नहीं उठता।