आलस की भेंट चढ़ा हरिद्वार का अर्द्धकुंभ मेला!
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अर्द्धकुंभ मेला हरिद्वार 2016 के आयोजन में साल भर से कम का वक्त बचा है। लेकिन सरकार और शासन ने इसके कार्यों के लिए जिस प्रकार की ‘आलस मुद्रा’ अख्तियार की है उससे तो यही लगता है कि वक्त पर काम कर पाना टेढ़ी खीर साबित होगा। सिर्फ पैसे की मांग हो रही है।
मुख्य सचिव एन रविशंकर ने केंद्रीय वित्त सचिव को भेजी चिट्ठी में 1037 करोड़ रुपये की मांग की है। मुख्यमंत्री हरीश रावत भी हाल में वित्तमंत्री अरुण जेटली से मिलकर बजट की मांग कर चुके हैं।
दूसरी ओर, स्थिति यह है कि जारी किए गए 35 करोड़ रुपये दो माह में खर्च नहीं हो पाए हैं। ऐसे में एक हजार करोड़ रुपये मिल भी जाएं वे इतनी कम अवधि में कैसे खर्च हो पाएंगे, बड़ा सवाल है।
अर्द्धकुंभ में करीब डेढ़ हजार करोड़ का काम होना है। मेला क्षेत्र में सड़कों का चौड़ीकरण, पुराने पुलों को ध्वस्त करने, हल्के वाहनों के लिए नये पुल बनाने, लिंक मार्ग, नए घाटों का निर्माण किया जाना है।
कैसे होगा काम, अभी तक ब्लू प्रिंट नहीं
केंद्र को भेजी गई मांग के अतिरिक्त अभी तक राज्य ने अपने स्तर से 123 करोड़ रुपये के कार्यों को स्वीकृति दी। 35.75 करोड़ की धनराशि डेढ़ महीने में खर्च नहीं हो सकी। बताया गया है कि मेले के लिए 171 करोड़ रुपये के प्रस्तावित कार्यों को जल्द मंजूरी मिलेगी।
कार्यों की समय सीमा 31 दिसंबर 2015 है। केंद्र मांगा गया सारा पैसा यदि राज्य सरकार को दे भी दे तो खर्च करने का क्या मैकेनिज्म होगा, इसका कोई ब्लू प्रिंट सरकार के पास नहीं है।
चिंता यही है यदि समय सीमा के भीतर काम पूरे नहीं हुए तो जनवरी 2016 में (मकर संक्रांति से) स्नानों का सिलसिला शुरू हो जाएगा फिर राज्य की किरकिरी तय है।
बोले मुख्य सचिव
वित्तीय वर्ष की समाप्ति के चलते अवमुक्त की गई धनराशि से होने वाले कार्यों की टेंडरिंग में विलंब हुआ, लेकिन अब एक मार्च से काम की गति में तेजी आएगी। अब उन्हीं कार्यों को करने की शुरुआत होगी जो कि मेला आयोजन से पहले समाप्त होने वाले होंगे। केंद्र से एक हजार करोड़ से ज्यादा की धनराशि मांगी है, कुछ व्यवस्था राज्य सरकार अपने स्तर से भी कर रही है।
-एन रविशंकर, मुख्य सचिव
मेले की निगरानी के लिए ड्रोन की डिमांड
अर्द्धकुंभ-2016 के लिए इस बार कुछ खास इंतजाम होंगे। ड्रोन (मानव रहित खोजी विमान) के माध्यम से भीड़ नियंत्रण का काम होगा। मेला अधिकारी बनाए गए जीएस मर्तोलिया ने इनकी डिमांड राज्य सरकार को भेज दी है।
इस बार कुछ अलग हटकर मेले की गतिविधियों की जानकारी के लिए सोशल साइट्स का प्रयोग भी होगा। अर्र्द्धकुंभ 2016 का एक फेसबुक एकाउंट खोला जाएगा।
पिछली बार मिले थे 565 करोड़
2010 के हरिद्वार महाकुंभ में केंद्र की
तरफ से राज्य को 565 करोड़ की मदद मिली थी। उस समय भी काम करने का तौर
तरीका कुछ इसी तरह का था। नतीजतन कैग ने अपनी रिपोर्ट 45 करोड़ रुपये की
अनियमितता का हिसाब पेश कर दिया। इस पर सदन में खूब हंगामा हुआ था। प्रकरण
की जांच त्रिपाठी जांच आयोग ने कर दी है।
मेला पहली जनवरी से
वर्ष 2016 में अर्द्धकुंभ है। मेला एक जनवरी से शुरू होकर 30 अप्रैल तक रहेगा। मुख्य स्नान 14 अप्रैल को है। इस दौरान आने वाले स्नान पर्वों पर स्नानार्थी गंगा में डुबकी लगाएंगे। अर्द्धकुंभ के अन्य मुख्य स्नानों की घोषणा बाद में की जाएगी।