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फर्जी डिग्री-असली नौकरी: 11 शिक्षकों की बीएड की डिग्री फर्जी, दर्ज हो सकती है एफआईआर

Fri, 10 Jan 2020 03:00 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 10 Jan 2020 03:00 AM IST
सार

  • एसआईटी ने की रुद्रप्रयाग जिले में तैनात शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश
  • चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी में नहीं मिला शिक्षकों की डिग्री का रिकॉर्ड

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SIT Caught 11 Teachers B.ed Fake Degree in Uttarakhand
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

उत्तराखंड शिक्षा विभाग में फर्जी डिग्री से नियुक्तियों के मामले में एसआईटी ने बड़ा खुलासा किया है। रुद्रप्रयाग के 11 शिक्षकों की बीएड डिग्री फर्जी पाई गई है। चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी में डिग्री का कोई रिकॉर्ड नहीं मिलने पर इन शिक्षकाें के खिलाफ एफआईआर की संस्तुति की गई है। जाहिर है कि इन शिक्षकों ने यूपी में सक्रिय गैंग से सांठगांठ कर यह फर्जीवाड़ा किया है। 

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प्रदेश के शिक्षा विभाग में फर्जी डिग्री से असली नौकरी पाने के पूरे खेल का भंडाफोड़ ‘अमर उजाला’ ने ही किया था। खुलासे के बाद 35 शिक्षकाें को बर्खास्त कर दिया गया था। बाद में शासन ने अमर उजाला की मुहिम का संज्ञान लेकर विस्तृत जांच के लिए सीबीसीआईडी की एएसपी श्वेता चौबे की अगुवाई में एसआईटी गठित की थी। एसआईटी की जांच प्रभावित करने में भी कसर बाकी नहीं छोड़ी गई। श्वेता चौबे ने शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय के सामने पहुंचकर शिक्षा विभाग के असहयोग की शिकायत की तो विभागीय अधिकारी हरकत में आए, तब जाकर शिक्षकों के प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए गए। तब से शिक्षकों की अमान्य डिग्री मिलने का सिलसिला जारी है।

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ताजा मामला रुद्रप्रयाग जिले के शिक्षकों का है। एसआईटी प्रभारी मणिकांत मिश्रा ने 23 शिक्षकों की बीएड की डिग्रियों को सत्यापन के लिए चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी भेजा था। लंबे समय तक जवाब नहीं मिलने पर आईपीएस मिश्रा ने स्पेशल मेसेंजर को यूनिवर्सिटी भेजा था, जहां पर शिक्षक माया, वीरेन्द्र सिंह, महेन्द्र, सिंह, संगीता, मोहनलाल, कांति प्रसाद भट्ट, जगदीश लाल, राकेश सिंह, विजय सिंह, भवानी लाल और कौशल नरेश राणा की डिग्री का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। 

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ये है शिक्षकों की लिस्ट

शिक्षक का नाम                  विद्यालय                     जनपद
कु. माया                        रा.प्रा.वि. जयकंडी            रुद्रप्रयाग 
वीरेन्द्र सिंह                      जू.हा.स्कूल जखन्याल        रुद्रप्रयाग
महेन्द्र सिंह                       रा.प्रा.वि.लुखन्द्री             रुद्रप्रयाग
संगीता                           रा.प्रा.वि.कैलाशनगर          रुद्रप्रयाग
मोहनलाल                        रा.प्रा.वि.सारी                रुद्रप्रयाग
कांति प्रसाद भट्ट                  रा.प्रा.वि.जैली                रुद्रप्रयाग
जगदीश लाल                     रा.प्रा.वि.जौला               रुद्रप्रयाग
राकेश सिंह                       रा.प्रा.वि.धारतोंदला            रुद्रप्रयाग
विजय सिंह                       रा.प्रा.वि. भुनाल              रुद्रप्रयाग
भवानी लाल                      रा.प्रा.वि.सौराखाल            रुद्रप्रयाग
कौशल नरेश राणा                 रा.प्रा.वि. अरखुंड             रुद्रप्रयाग

यूनिवर्सिटी में दब गए सत्यापन के आठ रिमांडर

बीएड की फर्जी डिग्री से नौकरी पाने वाले शिक्षकाें ने खुद को बचाने के लिए खूब दिमाग चलाया। एसआईटी प्रभारी आईपीएस मणिकांत मिश्रा ने बताया कि रुद्रप्रयाग के इन शिक्षकाें की डिग्री का सत्यापन कई माह से अटका हुआ था। आठ रिमांडर भेजे जाने के बावजूद चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी से कोई जवाब नहीं मिला। इस पर उन्हें शक हुआ तो वजह जानने के लिए स्पेशल मेसेंजर को यूनिवर्सिटी भेजा गया। रजिस्ट्रार आफिस से बताया गया कि उन्हें एसआईटी का न तो कोई पत्र मिली और न ही कोई रिमांडर। एसआईटी के प्रतिनिधि ने तमाम रिमांडर की कापी उपलब्ध कराई तो पूरा माजरा समझ में आ गया।

 

मिश्रा का कहना है कि सांठगांठ कर यूनिवर्सिटी में ही एसआईटी के पत्र और रिमांडर दबा दिए गए। रजिस्ट्रार आफिस ने पूरे मामले को गंभीरता से लेकर निर्धारित समय में प्रमाणपत्रों की जांच कराई गई। माया ने 2003, वीरेन्द्र सिंह ने 1999, महेन्द्र सिंह ने 1994, संगीता ने 2004, मोहन लाल ने 2004, कांति प्रसाद भट्ट ने 1995, जगदीश लाल ने 1998, राकेश सिंह ने 2005, भवानी लाल ने 2005, विजय सिंह ने 1997 और कौशल नरेश ने 1997 में बीएड करने की डिग्री जमा कराई थी। यूनिवर्सिटी में इन वर्षों के सत्र में उनकी डिग्री का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। 

जनवरी में 100 पार हो जाएगा फर्जी डिग्री का आंकड़ा 

शिक्षा विभाग में फर्जी डिग्री और असली नौकरी के मामले में अब 97 शिक्षक पकड़े जा चुके हैं। एएसपी श्वेता चौबे के समय 66 शिक्षकों की डिग्री अमान्य पाई गई थी। श्वेता चौबे के हटने के बाद कुछ समय के लिए एएसपी सरिता डोभाल ने एसआईटी की कमान संभाल ली थी। पिछले कई माह से आईपीएस मणिकांत मिश्रा फर्जी डिग्री से नौकरी पाने वाले शिक्षकाें को बेनकाब करने में लगे हैं। अब तक 97 शिक्षकाें के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश हो चुकी है। हरिद्वार के चार शिक्षकाें के खिलाफ भी इस माह कार्रवाई की तैयारी है। ये शिक्षक दूसरे की डिग्री के आधार पर नौकरी कर रहे हैं। इन शिक्षकों पर कार्रवाई के साथ फर्जी डिग्री वाले शिक्षकाें का आंकड़ा 100 पार कर जाएगा।


चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी से मिली सत्यापन रिपोर्ट में रुद्रप्रयाग के 11 शिक्षकों की डिग्री पाई गई है। यूनिवर्सिटी में इनका कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है। जाहिर है कि बीएड की यह डिग्री गैर कानूनी तरीके से बनवाई गई है। शिक्षा निदेशालय को इन शिक्षकाें के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की सिफारिश की गई है। 
-मणिकांत मिश्रा, आईपीएस और एसआईटी प्रभारी
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