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'मोहर्रम' ठीक तो 'बग्वाल' भी सही
अमर उजाला, देवीधुरा
Updated Sat, 24 Aug 2013 07:52 PM IST
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उत्तराखंड के देवीधुरा में वर्षों से रक्षाबंधन के मौके पर खेले जाने वाले पत्थर मार युद्घ पर कोर्ट की रोक के बाद नया बवाल खड़ा होता दिख रहा है। मेले के पैरोकार अब कोर्ट में यह कहकर फैसले को चुनौती देने जा रहे हैं कि मोहर्रम में भी तो खून बहता है।
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वर्षों से चली आ रही बग्वाल (पत्थर मार युद्ध) के स्वरूप को बदलने पर वालिक खाम के प्रमुख बग्वाली वीर चेतन भैय्या ने हस्ताक्षर अभियान शुरू कर दिया है।
लोगों की राय ली जा रही है कि वह बग्वाल की परंपरा को जारी रखना चाहते हैं या फल फूलों से बग्वाल खेलना चाहते हैं। हस्ताक्षर अभियान में हर व्यक्ति का नाम, पता और मोबाइल नंबर अंकित किया जा रहा है।
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याचिका में पेश होगें हस्ताक्षर
इसे हाईकोर्ट में दायर की जाने वाली जनहित याचिका में पेश किया जाएगा। चेतन ने बताया कि हिंदुओं की वर्षों पुरानी परंपराओं को समाप्त करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। बग्वाल में आज तक न तो कोई मरा है न ही कोई अपंग हुआ है।
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उनका यह भी कहना है कि मंदिरों में दी जाने वाली बलि को भी रोका जा रहा है। इसके ठीक विपरीत मुसलमानों द्वारा मोहर्रम में छाती पीटकर खुलेआम रक्त बहाया जाता है।
बग्वाल का स्वरूप
बकरीद में प्रत्येक घरों में निर्ममता से बकरी की बलि दी जाती है। उन्हें रोकने का कोई साहस नहीं करता। राज्य आंदोलनकारी परिषद के अध्यक्ष और वालिक खाम से बग्वाल खेलने वाले राम सिंह कैड़ा बग्वाल के स्वरूप को बदले जाने से बेहद आहत हैं। उनका कहना है कि वह मुद्दे को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करेंगे।
इनकी भी सुनिए
मुसलमानों द्वारा मोहर्रम में छाती पीटकर खुलेआम रक्त बहाया जाता है। बकरीद में प्रत्येक घरों में निर्ममता से बकरी की बलि दी जाती है। उन्हें रोकने का कोई साहस नहीं करता।
- चेतन भैय्या, प्रमुख, वालिक खाम