अब सरकारी कर्मचारियों को सीखनी होगी ‘साइन लैंग्वेज’, चुनाव आयोग ने सभी राज्यों को जारी किए निर्देश
सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए अब मौन की भाषा (सांकेतिक भाषा अथवा साइन लैंग्वेज) सीखना अनिवार्य कर दिया गया है। बधिर मतदाताओं से कुशल एवं बेहतर संवाद हो सके इसके लिए चुनाव आयोग की ओर से पहली बार यह व्यवस्था लागू की गई है। सभी राज्यों को इसके आदेश जारी कर दिए गए हैं। इसी क्रम में साइन लैंग्वेज इंस्ट्रक्टर हायर किए जा रहे हैं। शुक्रवार से उत्तराखंड में सरकारी कर्मचारियों को सांकेतिक भाषा का ककहरा सिखाने की शुरुआत भी हो चुकी है।
समाज में बधिर लोगों के साथ अक्सर सार्वजनिक स्थलों पर ही नहीं बल्कि सरकारी दफ्तरों में संवाद की समस्या रहती है। यही कारण है कि वे अपने आपको आम लोगों से अलग-थलग महसूस करते हैं। इस दिशा में चुनाव आयोग ने ऐतिहासिक पहल की है। ताजा आदेश के तहत सभी राज्यों में सरकारी कर्मचारियों को साइन लैंग्वेज सीखना अनिवार्य कर दिया गया है। यह निर्णय फौरी तौर पर चुनावों में दिव्यांगों की शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने की दृष्टि से लिया गया है।
मतदान स्थल पर कोई बधिर संवादहीनता के कारण हतोत्साहित न हो इसके लिए सभी राज्यों में कर्मचारियों को सांकेतिक भाषा का ककहरा सिखाने की मुहिम छेड़ दी गई है। इसके लिए साइन लैंग्वेज इंस्ट्रक्टर नियुक्त किए जा रहे हैं। सहायक निर्वाचन अधिकारी पीएस रावत ने बताया कि शुक्रवार को प्रदेश में पहली कार्यशाला आयोजित की गई। मूक भाषा सीखने की मुहिम चुनाव के बाद भी जारी रहेगी।
कर्मचारियों ने सीखा सांकेतिक भाषा का ककहरा
कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में ‘साइन लैंग्वेज’ की पहली पाठशाला आयोजित हुई। समर्थनम ट्रस्ट फार डिसेबिलिटीज की ओर से अंजली अग्रवाल ने पहले दिन सांकेतिक भाषा का बुनियादी व्याकरण सिखाया। इसके तहत कॉमन एटीकेट्स, लड़के-लड़की का साइन, उम्र पूछने का तरीका, वयस्क होने का संकेत, वोटर, मतदान, पता, नाम, मतदाता पहचानपत्र से जुड़े संकेतोें को बताया गया। कर्मचारियों के ई-मेल पर साइन लैंग्वेज से जुड़ी सामग्री भेजी जा रही है। वाट्सएप ग्रुप पर भी इस नई भाषा को सहज बनाने की कोशिश की जा रही है।
समाज कल्याण अधिकारी बनाए गए नोडल अफसर
सहायक निर्वाचन अधिकारी पीएस रावत ने बताया कि सभी समाज कल्याण अधिकारियों को नोडल अफसर बनाया गया है। दिव्यांगों की मतदाता सूची भी खंगाली जा रही है। इसके तहत 31 अक्तूबर तक नए मतदाताओं को जोड़ा जाएगा। कर्मचारी दिव्यांगों का फार्म-6 उनके घर पर जाकर भरेंगे। साथ ही निर्वाचन अधिकारी से लेकर बीएलओ के फोन नंबर प्रचारित-प्रसारित किए जा रहे हैं। जिससे घर बैठे दिव्यांग मतदाता सूची में जुड़ सकें।