स्कूल में बच्चे और शिक्षक ढो रहे पानी
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देहरादून के एक स्कूल में नन्हे बच्चे पढ़ाई करने की जगह सुबह-सुबह हाथों में बाल्टियां, पतीले थामे दौड़ लगाते हैं।
करीब आधा किलोमीटर दूर नल पर वे जुटते हैं और फिर सिर पर पानी से भरे बर्तन रख स्कूल लौटते हैं। बच्चों के मिड डे मील बनाने, पीने और टायलेट जाने के लिए यही पानी दिनभर इस्तेमाल किया जाना है।
अब्दुल वाजिद स्कूल के प्रधानाचार्य हैं। स्कूल 07:30 बजे खुलता है, लेकिन वाजिद छह बजे पहुंच जाते हैं। वह खुद बाल्टी लेकर 500 मीटर दूर नल की ओर निकल जाते हैं।
कई बार स्कूल के बच्चे भी साथ होते हैं। स्कूल के बाद घर में भी कई बार नींद से अचानक उठकर मोटर चला देते हैं, लगता है स्कूल में हैं।
कनेक्शन होने के बावजूद नहीं आता पानी
ये कहानी जिले के किसी ग्रामीण इलाके के स्कूल की नहीं, बल्कि शहर के बीचोंबीच स्थित चुक्खूवाला के राजकीय प्राथमिक विद्यालय नंबर दो की हैं।
कनेक्शन होने के बावजूद इस स्कूल में पानी नहीं आता। ऐसे में शिक्षकों से लेकर बच्चों की पहली चिंता पढ़ाई शुरू करने से पहले दिनभर की जरूरतों के लिए पानी जुटाने की होती है।
प्रधानाचार्य अब्दुल वाजिद बताते हैं कि स्कूल के लिए आने वाला पानी रैन बसेरा की ओर मोड़ दिया गया है। पानी के लिए स्कूल में कुछ समय पूर्व मोटर लगाई थी, लेकिन सप्लाई का कोई तय वक्त नहीं है।
चंदा कर बुजुर्ग को पानी भरने के लिए रखा
देर रात पानी आता है तो स्कूल में कोई रहता ही नहीं जो पानी भर ले। बताया कि कुछ समय पूर्व सभी शिक्षकों ने चंदा कर एक बुजुर्ग को इस काम के लिए रखा।
बुजुर्ग स्कूल में ही रहते थे और रात को मोटर चलाकर पानी भर लेते थे। लेकिन कुछ समय पूर्व वह चले गए, तबसे हालत खराब है।
वाजिद के मुताबिक पानी इतनी टेंशन दे रहा है कि उनका बीपी बढ़ने लगा है। वह दवाएं खाने लगे हैं। उनका कहना है कि लोग आते हैं तो कनेक्शन देखते हैं, यह कोई जानता ही नहीं कि पानी तो मिल ही नहीं रहा।
ऐसे में कभी पानी न हो और अफसर आ जाएं तो क्या जवाब देंगे? वाजिद के मुताबिक कई बार शिकायत के बावजूद जल संस्थान कार्रवाई नहीं कर रहा।
अजबपुर में भोजनमाता परेशान
अजबपुर कला स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय प्रथम में भी पानी की समस्या है। भोजन माता दीपमाला सोनी ने बताया कि पहले तो पानी आता ही नहीं था।
अब मोटर लगाने से आता है, लेकिन इसे खोलने के लिए उन्हें सुबह पांच बजे जगकर स्कूल आना पड़ता है। कहा कि स्कूल के पास एक हैंडपंप भी लग जाता तो काफी हद तक राहत मिल जाती।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार राज्य के सभी स्कूलों को मूलभुत सुविधाएं दी जानी थी। इसमें पानी-बिजली जैसी सुविधाओं का विशेष ध्यान रखे जाने का निर्देश दिया गया था। बावजूद इसके अब तक स्कूल पानी को तरस रहे हैं।
सभी स्कूलों को पानी मिले, इसका पूरा ख्याल रखा जाता है। यदि किसी स्कूल में परेशानी हो रही है तो शिक्षक मुझे बताएं। संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेकर इन स्कूलों में तुरंत पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।
- डीडी डिमरी, मुख्य महाप्रबंधक, जल संस्थान