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Dehradun News: उप जिला अस्पताल विकासनगर में चिकित्सकों और कर्मचारियों की कमी
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उप जिला अस्पताल चिकित्सकों और कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। यहां फिजिशियन नहीं हैं। बाल रोग विशेषज्ञ और वरिष्ठ मेडिकल अफसर सामान्य चिकित्सा में मरीजों को देखते हैं। अस्पताल में एक मात्र इमरजेंसी मेडिकल अफसर हैं। ऐसे में विशेषज्ञ चिकित्सक इमरजेंसी की रात की शिफ्ट में भी मरीज देखने पड़ते हैं। इस स्थिति में वे अगले दिन ओपीडी में सेवा नहीं देते हैं। अस्पताल में नर्सों की संख्या भी कम है।
उप जिला अस्पताल की दैनिक ओपीडी 550 से 600 के बीच है। अस्पताल में पछवादून, जौनसार बावर, सीमांत हिमाचल प्रदेश और उत्तरप्रदेश से मरीज उपचार के लिए आते हैं। चिकित्सकों और कर्मचारियों की कमी के चलते उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अस्पताल में शुरुआत से ही फिजिशियन का पद रिक्त है। बाल रोग विशेषज्ञ और वरिष्ठ मेडिकल अफसर व्यस्क और बच्चे दोनों ही मरीज देखते हैं। इससे ओपीडी पर दोहरा दबाव रहता है।
उप जिला अस्पताल में छह मेडिकल अफसर नियुक्त हैं। इनमें से तीन स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिए गए हैं। दो महिला मेडिकल अफसर प्रसव कक्ष और प्रसूता वार्ड में तैनात हैं। एक मेडिकल अफसर एक शिफ्ट में सेवा देते हैं। ऐसे में विशेषज्ञों को रात में भी इमरजेंसी में सेवा देनी पड़ती है। इस स्थिति में वे अगले दिन अवकाश पर रहते हैं। इस दौरान ओपीडी सेवा ठप रहती है। मरीजों को बिना उपचार ही वापस लौटना पड़ता है। अस्पताल में 22 नर्सिंग कर्मी के एवज में केवल 15 ही मौजूद हैं।
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उप जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विजय कुमार ने बताया कि अस्पताल में फिजिशियन और अन्य कर्मियाें की नियुक्ति शासन स्तर का मामला है। शासन को फिजिशियन और स्टॉफ के लिए डिमांड भेजी गई है।
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उप जिला अस्पताल की दैनिक ओपीडी 550 से 600 के बीच है। अस्पताल में पछवादून, जौनसार बावर, सीमांत हिमाचल प्रदेश और उत्तरप्रदेश से मरीज उपचार के लिए आते हैं। चिकित्सकों और कर्मचारियों की कमी के चलते उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अस्पताल में शुरुआत से ही फिजिशियन का पद रिक्त है। बाल रोग विशेषज्ञ और वरिष्ठ मेडिकल अफसर व्यस्क और बच्चे दोनों ही मरीज देखते हैं। इससे ओपीडी पर दोहरा दबाव रहता है।
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उप जिला अस्पताल में छह मेडिकल अफसर नियुक्त हैं। इनमें से तीन स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिए गए हैं। दो महिला मेडिकल अफसर प्रसव कक्ष और प्रसूता वार्ड में तैनात हैं। एक मेडिकल अफसर एक शिफ्ट में सेवा देते हैं। ऐसे में विशेषज्ञों को रात में भी इमरजेंसी में सेवा देनी पड़ती है। इस स्थिति में वे अगले दिन अवकाश पर रहते हैं। इस दौरान ओपीडी सेवा ठप रहती है। मरीजों को बिना उपचार ही वापस लौटना पड़ता है। अस्पताल में 22 नर्सिंग कर्मी के एवज में केवल 15 ही मौजूद हैं।
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उप जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विजय कुमार ने बताया कि अस्पताल में फिजिशियन और अन्य कर्मियाें की नियुक्ति शासन स्तर का मामला है। शासन को फिजिशियन और स्टॉफ के लिए डिमांड भेजी गई है।