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केंद्र के आश्वासन के बाद स्वामी शिवानंद ने अनशन तोड़ा

Wed, 07 Dec 2016 12:42 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 07 Dec 2016 12:42 PM IST
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shivanand hunger strike start again.
स्वामी शिवानंद - फोटो : AmarUjala

कई दिनों से गंगा में हो रहे अवैध खनन के खिलाफ हरिद्वार में अनशन पर बैठे मातृसदन के स्वामी शिवानंद ने केंद्र से आश्वासन मिलने के बाद अनशन समाप्त कर दिया।

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बुधवार को केंद्र द्वारा जारी इस आश्वासन कि सारे स्टोर क्रशन गंगा से पांच किमी. दूर स्‍थापित किए जाएंगे के आने बाद स्वामी शिवानंद ने अनशन समाप्‍त कर दिया।
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गंगा में अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद की ओर से दिया गया 48 घंटे का अल्टीमेटम पूरा हो गया था लेकिन, सिस्टम की नींद नहीं टूटी। इसके विरोध में आज बुधवार से शिवानंद जल का त्याग कर रहे ‌थे।
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मातृसदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद का 23 दिन अनशन चलने के बावजूद शासन-प्रशासन हरकत में न आने पर स्वामी शिवानंद ने 27 नवंबर से खुद अनशन शुरू कर दिया था। स्वामी शिवानंद ने राष्ट्रपति सहित पांच माननीयों को चिट्ठी भेजकर इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी थी।
 

48 बाद भी मातृसदन नहीं पहुंचा था शासन का जवाब

shivanand hunger strike start again.
Shivanand - फोटो : AmarUjala

तय समय के अनुसार जवाब न मिलने पर मौन सहमति मानकर दो दिसंबर से जल का त्याग भी कर दिया था।

चार नवंबर को पूरी तैयारी के साथ पहुंचे प्रशासन के अधिकारियों ने पहले तो स्वामी शिवानंद से वार्ता कर जल लेने के लिए मनाने का प्रयास किया। मांगों पर कोई विचार न करने पर स्वामी शिवानंद ने जल लेने से मना कर दिया था। उसके बाद पुलिस ने उन्हें जबरन उठाने का प्रयास किया। 

ऐनवक्त पर मातृसदन के अनुयायियों की मध्यस्थता पर स्वामी शिवानंद 48 घंटे तक जल लेने पर राजी हो गए थे। 48 घंटे मंगलवार रात करीब 11:30 बजे पूरे हो गए, लेकिन खनन पर रोक लगाने के संबंध में शासन-प्रशासन का कोई जवाब मातृसदन नहीं पहुंचा।

ऐसे में स्वामी शिवानंद ने बुधवार से फिर जल त्याग करने का निर्णय लिया था।

दो दिन से झांकने तक नहीं गया कोई

shivanand hunger strike start again.
Shivanand - फोटो : AmarUjala

अमर उजाला से बातचीत में मातृसदन के ब्रह्मचारी दयानंद के माध्यम से स्वामी शिवानंद ने आरोप लगाया था कि शासन-प्रशासन से उन्हें उम्मीद नहीं थी। प्रशासन के आग्रह पर उन्होंने समय इसलिए दिया था कि प्रशासन के पास कोई बहाना न रहे।

चार दिसंबर को पूरे दल बल के साथ आश्रम पहुंचे अधिकारियों ने स्वामी शिवानंद को मनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वार्ता के दौरान स्वामी शिवानंद की बोलचाल से उनके स्वास्थ्य का अंदाजा लगाते हुए फीडबैक भी आला अधिकारियों को दिया गया।

इसके बावजूद उच्च अधिकारियों के आदेश पर जबरन आश्रम में प्रवेश कर स्वामी शिवानंद को उठाने का प्रयास किया। जैसे तैसे उन्हें 48 घंटे के लिए मना तो लिया गया, लेकिन इस पूरे आपरेशन के बाद प्रशासन का कोई नुमाइंदा आश्रम में झांकने तक नहीं गया।

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