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यहां 'खुदा' के नाम पर होती है भगवान 'शिव' की पूजा, जानिए अनोखी पूजा की कहानी
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 29 Dec 2017 08:51 AM IST
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khuda puja
- फोटो : Dainik jagran
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देवभूमि उत्तराखंड में हिंदू अद्भुत 'खुदा पूजा' करते हैं। यह पूजा 12 साल बाद होती है। आइए जानते हैं इस अनोखी पूजा की कहानी...
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उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की मुनस्यारी तहसील तहसील के दर्जन भर गांवों में एक अद्भुत पूजा की जाती है। इस पूजा का नाम 'खुदा पूजा' है। लेकिन सनातनी हिंदू इस पूजा में भगवान शिव के अलखनाथ रूप की पूजा करते हैं।
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स्थानीय लोगों ने बताया कि यह पूजा विषम वर्षों में होती है, लेकिन कुछ गांवों में बारह साल के बाद यह पूजा होती है। मार्गशीर्ष और पौष माह में शुक्ल पक्ष में होने वाली यह पूजा तीन से लेकर बाइस दिन तक चलती है।
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सदियों से चली आ रही है शिव की पूजा की परंपरा
khuda puja
- फोटो : Dainik jagran
यहां खुदा के नाम पर शिव की पूजा की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि मुगल शासनकाल में जब ग्रामीण भगवान अलखनाथ की पूजा कर रहे थे तो मुगलों ने उन्हें देख लिया।
मुगलों द्वारा पूछने पर ग्रामीणों ने खुदा की पूजा करने की बात कही। खुदा की पूजा का नाम सुनकर मुगलों ने ग्रामीणों को अनुमति दे दी। तब से इसका नाम खुदा पूजा ही रहा। चार सदियों के बाद भी भगवान अलखनाथ की खुदा पूजा के नाम पर पूजा-अर्चना हो रही है।
यह पूजा किसी गांव में तीन दिन तो किसी गांव में सात दिन और कुछ गांवों में लगातार 22 दिनों तक होती है। खुदा पूजा रात के अंधेरे में होती है। जिस मकान में अलखनाथ की पूजा होती है उसकी छत का एक हिस्सा खुला छोड़ा जाता है। मान्यता है कि छत के इसी खुले हिस्से से भगवान अलखनाथ पूजा में आते हैं।
मुगलों द्वारा पूछने पर ग्रामीणों ने खुदा की पूजा करने की बात कही। खुदा की पूजा का नाम सुनकर मुगलों ने ग्रामीणों को अनुमति दे दी। तब से इसका नाम खुदा पूजा ही रहा। चार सदियों के बाद भी भगवान अलखनाथ की खुदा पूजा के नाम पर पूजा-अर्चना हो रही है।
यह पूजा किसी गांव में तीन दिन तो किसी गांव में सात दिन और कुछ गांवों में लगातार 22 दिनों तक होती है। खुदा पूजा रात के अंधेरे में होती है। जिस मकान में अलखनाथ की पूजा होती है उसकी छत का एक हिस्सा खुला छोड़ा जाता है। मान्यता है कि छत के इसी खुले हिस्से से भगवान अलखनाथ पूजा में आते हैं।