जब 'शक्तिमान' ने बिगाड़ दी सूबे की सियासी चाल
- - टांग टूटने से सरकार पर संकट आने तक भाजपा रही बैकफुट पर
- - कांग्रेस ने बड़ी चतुराई से मामले को बना दिया अंतरराष्ट्रीय मुद्दा
- - 18 मार्च को कांग्रेस के दोफाड़ होने से पर्दे के पीछे चला गया शक्तिमान
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शक्तिमान की टांग टूटने पर छिड़ी सियासत को कांग्रेस बड़ी चालाकी से अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने में कामयाब रही। शक्तिमान की टांग तोड़ने के आरोपी भाजपा विधायक गणेश जोशी को सलाखों के पीछे भेजने की सियासत में कांग्रेसी दिग्गज यह नहीं समझ पाए कि उनकी सरकार खुद ही लंगड़ी होने वाली है। पांच दिन फ्रंटफुट पर रही कांग्रेस के 18 मार्च को दो फाड़ होते ही शक्तिमान का प्रकरण सियासी मंच के पर्दे के पीछे चला गया।
14 मार्च को शक्तिमान के घायल होने से 18 मार्च तक सरकार के अल्पमत में आने के बीच का दौर में भाजपा बैकफुट पर रही। भाजपा की रैली में उमड़ी भीड़ की सूचना से कांग्रेसियों के माथे पर सुबह छाई चिंता की लकीरें शक्तिमान के सामने भाजपा विधायक गणेश जोशी के डंडा फटकारने के वीडियो से फुर हो गई।
विधायक के वीडियो ने भाजपा को ला दिया बैकफुट पर
विधायक का वीडियो वायरल होते ही सदन का माहौल बदल गया। जो भाजपा सदन में सत्ता पक्ष को हर मुददे पर घेर रही थी वह खुद घिरी दिखी। सोशल मीडिया के मामले को तूल देते ही जब रैली की सफलता की जगह अगले दिन सुर्खियों में विधायक के डंडा फटकारते तस्वीरों ने पासा पलट दिया।
अब सदन में भाजपा के सदस्यों के हर तीर का जवाब ट्रेजरी बैंच से शक्तिमान पर जाकर खत्म होता रहा। कांग्रेस ने पहले इसे राष्ट्रीय फिर अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बना दिया।
भाजपा की केंद्रीय लीडरशिप को गिरती साख को बचाने के लिए कूदना पड़ा बावजूद इसके इस प्रकरण में पार्टी सियासी आपदा प्रबंधन में नाकाम रही।
शक्तिमान के पीछे चले खेल ने कांग्रेस की जमीन ही हिला दी
17 मार्च को हल्द्वानी से प्रमोद बोरा और 18 मार्च की सुबह भाजपा विधायक गणेश जोशी को दून के एक होटल से गिरफ्तार करने के बाद कांग्रेस अपनी जीत का दम भरती दिखी।
हालांकि यह सियासी जीत का अहसास चंद घंटे बाद कांग्रेस के लिए गम में तब्दील हो गया, जब कांग्रेस के नौ विधायकों ने मनी बिल पर मतदान की मांग उठा भाजपा को समर्थन दिया। इस सियासी घटनाक्रम के बाद शक्तिमान की सियासत पर्दे के पीछे चली गई।
अब भाजपा कांग्रेस इस मुद्दे को गौण कर सियासी संकट की गुनाभाग में जुट गए। शक्तिमान तभी याद आया जब उसकी नकली टांग आई या फिर अमेरिका की टीम इलाज के लिए पहुंची। घोड़े का हाल लेने तो दूर उसके इलाज तक के लिए समय से पैसे जारी नहीं हुए।