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...तो अब नई सरकार में ही पूरी होगी सातवें वेतन की मुराद

Tue, 21 Feb 2017 01:08 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 21 Feb 2017 01:08 PM IST
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seventh pay commission wish will complete on uttarakhand new government
Harish Rawat rally - फोटो : file photo

चुनाव में जाने से पहले मुख्यमंत्री हरीश रावत निगम व बोर्ड कर्मियों को नई पगार की जो आस जगा गए थे, प्रबंधन की ढिलाई के चलते वह अभी पूरी नहीं हो पाई है।

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संकल्प यही था कि राजकीय कर्मियों के साथ निगम-बोर्ड व समस्त सार्वजनिक उपक्रमों में तैनात करीब 60 हजार कर्मियों की फरवरी माह में नई पगार मिलेगी। इसके लिए सभी निगमों व बोर्डों के निदेशक मंडलों को प्रस्ताव पास करके सार्वजनिक उद्यम विभाग को भेजने थे, मगर दो महीने बाद एक भी प्रस्ताव शासन को प्राप्त नहीं हुआ।
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प्रबंधन की इस ढिलाई के चलते औद्योगिक विकास विभाग को इस संबंध में आदेश जारी करने पड़े। मगर इन आदेशों का भी कोई असर नजर नहीं आ रहा है। बता दें कि 29 दिसंबर 2016 को सातवें वेतनमान को लेकर जो शासनादेश हुआ था, उसमें वेतन समिति की संस्तुतियों को स्वीकारते हुए सार्वजनिक उपक्रमो, निकायों, प्राधिकरण, जल संस्थान, पंचायत, निगम व बोर्ड के नियमित कर्मियों को नए वेतनमान का लाभ देने का संकल्प लिया गया था।
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इसके मुताबिक, सभी बोर्ड, निगम व सार्वजनिक उपक्रम सातवें वेतन को लेकर प्रस्ताव पारित कर सार्वजनिक उद्यम विभाग को भेजना था। मगर अभी तक एक भी बोर्ड, निगम व सार्वजनिक उपक्रम से प्रस्ताव नहीं भेजा है। जब तक वे प्रस्ताव नहीं भेजेंगे तब तक प्रशासनिक व सार्वजनिक उद्यम विभाग एनओसी जारी नहीं करेगा।

इस संबंध में पिछले हफ्ते अपर सचिव औद्योगिक विकास विभाग डॉ. आर. राजेश कुमार ने सभी विभागों को पत्र लिखकर प्रस्ताव भेजने को कहा था। दो दिन पूर्व जब मुख्यमंत्री सचिवालय आए थे, तो एक बार फिर उनके समक्ष ये मुद्दा उठा था। इस संबंध में उन्होंने वित्त विभाग को दिशा-निर्देश जारी किए थे।

नई सरकार में ही पूरी होगी मुराद
मगर कई बोर्ड, निगम व सार्वजनिक उपक्रमों का निदेशक मंडल अभी पूरे नहीं हैं। कतिपय निदेशक मंडलों के अध्यक्ष दर्जाधारी थे। चूंकि बोर्ड पूरा नहीं है, इसलिए वहां प्रस्ताव पास नहीं हो पाएंगे।

इन इकाइयों के कर्मियों की मुराद अब नई सरकार के गठन के बाद ही पूरी हो सकेगी। अलबत्ता परिवहन निगम की कमान आईएएस अफसर के हाथों में है, इसलिए वहां से प्रस्ताव पास करके सार्वजनिक उद्यम विभाग को भेजा जा सकता है।   

जब मुख्यमंत्री ने स्पष्ट आदेश कर दिए थे, तो निगमों व बोर्डों के निदेशक मंडल ने प्रस्ताव पास करने में क्यों हीलाहवाली की? क्या अपने वाजिब हक को हासिल करने के लिए हर बार आंदोलन का ही सहारा लेना होगा। दो महीने बाद भी निगम व शासन स्तर पर कोई कार्रवाई न होने से कर्मचारियों को भारी नाराजगी है।
- रवि पचौरी, प्रदेश महामंत्री, रोडवेज कर्मचारी संगठन

अभी निगमों व बोर्डों के सातवें वेतनमान को लेकर निदेशक मंडल के प्रस्ताव सार्वजनिक उद्यम विभाग को आने हैं। अभी प्रस्ताव नहीं आए हैं। प्रस्ताव आने पर कार्रवाई की जाएगी।

- अमित सिंह नेगी, सचिव वित्त

औद्योगिक विकास विभाग ने निगम, बोर्डों व सार्वजनिक उपक्रमों को प्रस्ताव भेजने के लिए बहुत देरी से आदेश दिए। ये आदेश बहुत पहले जारी हो जाने चाहिए थे। अब तो कई निगमों में निदेशक मंडल ही नहीं है। ऐसे में प्रस्ताव भेजे जाएंगे।
- बीएस रावत, महासचिव, राज्य निगम अधिकारी-कर्मचारी महासंघ

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