सातवां वेतन आयोगः तो नए साल में घर आएगी 'लक्ष्मी'
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नए साल में सरकारी कर्मचारियों के घर लक्ष्मी आएगी। संभावना है कि जनवरी 2016 में सातवें वेतन आयोग की सिफारिश लागू कर दी जांए।
सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट से जुड़ी खबरों पर यकीन करें तो सरकारी कर्मचारियों के वेतन में 15 प्रतिशत बढ़ोत्तरी होना लाजिमी है।
उत्तराखंड में कर्मियों को आयोग की सिफारिश का लाभ देने के लिए करीब ढाई हजार करोड़ रुपए का बंदोबस्त करना होगा। संभावना है कि आयोग इसी महीने अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप देगा।
माना जा रहा है कि जनवरी 2016 में सातवें वेतन आयोग की सिफारिश लागू कर दी जाएगी। फरवरी 2014 में गठित जस्टिस एके माथुर की अध्यक्षता वाले इस आयोग ने 900 पन्नों की रिपोर्ट तैयारी की है। केंद्र ने विगत अगस्त में आयोग का कार्यकाल चार माह बढ़ाने के बावजूद दिसंबर 2015 से पहले रिपोर्ट देने को कहा था।
अभी तक भारतीय प्रशानिक सेवा को सर्वोच्च सेवा मानते हुए अलग रखा जाता है, लेकिन आयोग ने सभी अखिल भारतीय सेवाओं को समान रूप से रखने का सुझाव दिया है। हालांकि इस पर अभी विवाद की स्थिति है।
रिटायरमेंट के लिए 33 वर्ष का कार्यकाल
उधर, रिटायरमेंट के लिए 33 वर्ष का कार्यकाल और 60 वर्ष की उम्र का कॉलम भी आयोग की रिपोर्ट का हिस्सा है। यह क्लोज लागू हुआ तो अखिल भारतीय सेवाओं से लेकर प्रांतीय सेवाओं और अन्य कर्मचारियों केरिटायर होने की संख्या प्रदेश में ही सैकड़ों में होगी।
उत्तराखंड को करना होगा वित्तीय प्रबंधन
राज्य में दो लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारी हैं और एक लाख के आस पास पेंशनधारी हैं। कर्मचारियों के वेतन पर राज्य में सालाना 9148 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। जबकि पेंशन देने के लिए करीब 2623 करोड़ खर्च होता है। ये दोनों ही आंकड़े चालू वर्ष के हैं।
इसके अलावा ब्याज की धनराशि अलग है। सभी मिलाकर राज्य में वेतन और पेंशन पर 15152 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। यदि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होती है तो करीब ढाई हजार करोड़ का बंदोबस्त अतिरिक्त तौर पर करना पड़ेगा।