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आने से पहले भूकंप कैसे देता है संभलने का मौका, जानने के लिए क्लिक करें...
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 24 Oct 2017 03:17 PM IST
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earthquake
- फोटो : file photo
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भूकंप कब आएगा? कैसे पता चलेगा? सरीखे सवाल दुनिया भर के लोगों को परेशान किए रहते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि भूकंप के संकेत दो-तीन दिन पहले ही जाहिर होने लगते हैं।
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बड़ा भूकंप आने के दो-तीन दिन पहले तीन से चार डिग्री सेल्सियस तक तापमान बढ़ जाता है। इसके अलावा भूकंप अन्य संकेत भी देता है। इन्हें पहचान लिया जाए तो नुकसान से बचा जा सकता है। भुज, नेपाल, मैक्सिको में भूकंप आने के पहले वातावरण और भूगर्भीय स्थिति का अध्ययन करके विज्ञानियों ने यह तथ्य उजागर किया है।
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ढाई सौ किमी लंबी हिमालयी पट्टी के भूकंप के प्रति संवेदनशील होने से पूरे उत्तर भारत को तेज झटके लगने का खतरा है। भुज, नेपाल और मैक्सिको के भूकंप की स्थिति के अध्ययन के आधार पर विज्ञानियों का सुझाव है कि इस पूरे क्षेत्र में चेतावनी तंत्र मजबूत कर दिया जाए।
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एक-दो दिन पहले भूकंप का अंदाजा लगाया जा सकता है
भूकंप
- फोटो : file photo
भूकंप के क्षेत्र में कार्य कर रहे सेंट्रल यूनिवर्सिटी, हैदराबाद, भाभा चेयर प्रोफेसर डॉ. वीपी डिमरी ने यहां वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान में व्याख्यानमाला के दौरान बताया कि भुज और नेपाल में भूकंप आने के चार-पांच दिन पहले तापमान तीन से चार डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया था।
इसके साथ ही भूकंप वाले क्षेत्र में भूगर्भ से हीलियम गैस का रिसाव बढ़ जाता है। इससे एक-दो दिन पहले भूकंप का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसके अलावा अचानक जलस्तर घट या बढ़ जाता है। नालों से पानी अचानक गायब हो जाएगा या फिर बहुत अधिक बढ़ जाएगा।
इसके अलावा प्राइमरी और सेकेंडरी तरंगें निकलती हैं। प्राइमरी तरंगें बहुत तेज जाती हैं। अगर इन्हें पहचान कर अलर्ट हो तो सेकेंडरी तरंगों के आने तक कुछ संभला जा सकता है। सेकेंडरी तरंगें ही तबाही मचाती हैं। इनके बीच 65-67 सेकेंड का गैप होता है। मैक्सिको में इन्हीं संकेतकों के समझ लेने से तबाही कम हुई।
इसके साथ ही भूकंप वाले क्षेत्र में भूगर्भ से हीलियम गैस का रिसाव बढ़ जाता है। इससे एक-दो दिन पहले भूकंप का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसके अलावा अचानक जलस्तर घट या बढ़ जाता है। नालों से पानी अचानक गायब हो जाएगा या फिर बहुत अधिक बढ़ जाएगा।
इसके अलावा प्राइमरी और सेकेंडरी तरंगें निकलती हैं। प्राइमरी तरंगें बहुत तेज जाती हैं। अगर इन्हें पहचान कर अलर्ट हो तो सेकेंडरी तरंगों के आने तक कुछ संभला जा सकता है। सेकेंडरी तरंगें ही तबाही मचाती हैं। इनके बीच 65-67 सेकेंड का गैप होता है। मैक्सिको में इन्हीं संकेतकों के समझ लेने से तबाही कम हुई।
कुछ सालों में आए बड़े भूकंप
Earthquake
- फोटो : file photo
शिलांग (1898 वर्ष), कांगड़ा (वर्ष1904), बिहार-नेपाल (वर्ष1934), असम (वर्ष 1950), भुज (वर्ष 2001) नेपाल (वर्ष 2015)
छोटे भूकंप टलता हादसा
छोटे-छोटे भूकंप से भूगर्भ की ऊर्जा निकलते रहने से बड़े भूकंप का खतरा आगे टलता रहता है। विज्ञानियों का कहना है कि छोटे भूकंप से भूगर्भ का दबाव थोड़ा कम हो जाता है, फिर भी अगर भूगर्भ में ऊर्जा भरी हुई है तो बड़े भूकंप की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
छोटे भूकंप टलता हादसा
छोटे-छोटे भूकंप से भूगर्भ की ऊर्जा निकलते रहने से बड़े भूकंप का खतरा आगे टलता रहता है। विज्ञानियों का कहना है कि छोटे भूकंप से भूगर्भ का दबाव थोड़ा कम हो जाता है, फिर भी अगर भूगर्भ में ऊर्जा भरी हुई है तो बड़े भूकंप की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।