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उद्यमिता में बदल रहा है विज्ञान- लिली वर्मा
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द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, बायोटेक कंसोर्टियम इंडिया, उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद और उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद के तत्वावधान में हुई विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित विकास पर दो दिवसीय कार्यशाला में विज्ञान को उद्यमिता से कैसे जोड़ा जाए, इस पर चर्चा की गई। कहा कि विज्ञान उद्यमिता में बदल रहा है।
सुभाष रोड स्थित होटल में हुई कार्यशाला के समापन के प्रथम सत्र में लाइफ केयर गुरुग्राम के डॉ. लिली वर्मा ने समाज तक पहुंचने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के लिए एक मार्ग विषय पर कहा कि आज विज्ञान उद्यमिता में बदल रहा है, जो छात्रों को नौकरी तलाशने वाले के बजाए नौकरी प्रदाता बनने को प्रोत्साहित करता है। आईटीआईटी रुड़की के प्रबंधन अध्ययन विभाग के प्रोफेसर रजत अग्रवाल ने बौद्धिक संपदा अधिकारों पर भारतीय स्थिति के बारे में चर्चा की। उन्होंने भारतीय सक्रिय पेटेंट के आंकड़ों के बारे में भी बताते हुए व्यवसाय आधारित आदर्श उद्यमी विकसित करने पर जोर दिया।
दूसरे सत्र में दिल्ली विवि के आणविक जीव विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. परमजीत खुराना ने प्लांट जीनोमिक्स फॉर क्लाइमेट रेजिलिएंट क्रॉप्स विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि वर्ष 2022 सतत विकास के लिए बुनियादी विज्ञान का वर्ष था। उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग के बारे में चिंता भी दिखाई और पिछले कुछ दशकों में जलवायु और वनस्पतियों के स्थानांतरण के बीच संबंधों को बताया। समापन सत्र में यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल ने भारत में उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यशाला में यूकॉस्ट व यूसीबी के वैज्ञानिक और अधिकारी, नासी के सदस्य और कई कॉलेजों के छात्र व शिक्षक मौजूद थे।
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सुभाष रोड स्थित होटल में हुई कार्यशाला के समापन के प्रथम सत्र में लाइफ केयर गुरुग्राम के डॉ. लिली वर्मा ने समाज तक पहुंचने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के लिए एक मार्ग विषय पर कहा कि आज विज्ञान उद्यमिता में बदल रहा है, जो छात्रों को नौकरी तलाशने वाले के बजाए नौकरी प्रदाता बनने को प्रोत्साहित करता है। आईटीआईटी रुड़की के प्रबंधन अध्ययन विभाग के प्रोफेसर रजत अग्रवाल ने बौद्धिक संपदा अधिकारों पर भारतीय स्थिति के बारे में चर्चा की। उन्होंने भारतीय सक्रिय पेटेंट के आंकड़ों के बारे में भी बताते हुए व्यवसाय आधारित आदर्श उद्यमी विकसित करने पर जोर दिया।
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दूसरे सत्र में दिल्ली विवि के आणविक जीव विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. परमजीत खुराना ने प्लांट जीनोमिक्स फॉर क्लाइमेट रेजिलिएंट क्रॉप्स विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि वर्ष 2022 सतत विकास के लिए बुनियादी विज्ञान का वर्ष था। उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग के बारे में चिंता भी दिखाई और पिछले कुछ दशकों में जलवायु और वनस्पतियों के स्थानांतरण के बीच संबंधों को बताया। समापन सत्र में यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल ने भारत में उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यशाला में यूकॉस्ट व यूसीबी के वैज्ञानिक और अधिकारी, नासी के सदस्य और कई कॉलेजों के छात्र व शिक्षक मौजूद थे।
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