उत्तराखंड: ऊफान पर आए गधेरे में छात्र समेत दो बहे, कई सड़कें बंद, पांच जिलों में स्कूल रहेंगे बंद
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पहाड़ों से लेकर मैदानों तक लगातार हो रही बारिश मुसीबत का सबब बन गई है। शुक्रवार को बागेश्वर जिले में एक छात्र समेत दो लोग गधेरों में बह गए तो मलबा आने से पिथौरागढ़-तवाघाट एनएच समेत कई सड़कें बंद हो गईं। नदियों के उफान पर आने से शक्तिफार्म इलाके में बाढ़ जैसे हालात हो गए।
उधर कोसी का पानी ढेला नदी में छोड़े जाने से काशीपुर में नदी तट पर रह रहे लोगों को रात छतों पर गुजारनी पड़ी। इधर नंधौर वैली में नंधौर और कैलाश नदी के बीच टापू में बृहस्पतिवार से फंसे 20 लोग शुक्रवार सुबह नदी का जलस्तर कम होने पर सकुशल निकाल लिए गए हैं।
वहीं मौसम विभाग की अगले 72 घंटों में पिथौरागढ़ समेत कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए नैनीताल, पिथौरागढ़, चंपावत, अल्मोड़ा और बागेश्वर जिलों में पांच अगस्त को कक्षा एक से 12 तक के सरकारी, गैर सरकारी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद रहेंगे। जिला अधिकारियों ने इस आशय के आदेश जारी किए हैं।
मलबा गिरने से कई रास्तें बंद
भारी बारिश के चलते बागेश्वर जिले में तीन मकान ध्वस्त हो गए, जबकि भारी मात्रा में मलबा आने और चट्टानें खिसकने से 10 मोटर मार्ग बंद हो गए हैं। कांडा में स्कूल से लौट रहा 11 वर्षीय छात्र मनीश ढोला गधेरे में बह गया। शाम करीब पांच बजे भद्रकाली से लगे बनेगांव में नायल निवासी श्याम सिंह (40) भी गधेरे में बह गए।
पिथौरागढ़ जिले में डीडीहाट-आदिचौरा, डीडीहाट-दूनाकोट मार्ग और पिथौरागढ़-तवाघाट हाइवे पर कई स्थानों पर मलबा गिरने से बंद हो गए हैं। महाकाली नदी खतरे के निशान 889 मीटर के करीब पहुंच गई है। दूसरी नदियां भी पूरे उफान पर हैं। लोगों से नदियों के किनारे जाने में सतर्कता बरतने को कहा गया है।
ऊधमसिंह नगर के शक्तिफार्म क्षेत्र में बैगुल और कैलाश नदी के उफनाने से आधा दर्जन गांवों में पानी घुस गया। सैकड़ों एकड़ धान की फसल भी जलमग्न हो गई। काशीपुर की ढेला नदी में बृहस्पतिवार की रात सिंचाई विभाग ने कोसी नदी से पानी छोड़ा तो बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई।
नदी किनारे की बस्तियों में अफरातफरी मच गई। लोग रात भर सामान सहित छतों पर रहे। सिंचाई विभाग के ईई विजेंद्र कुमार ने बताया कि कोसी से 18 हजार क्यूसेक पानी ढेला नदी में छोड़ा गया था। नदी के किनारे के गांव और बस्ती वालों को इसकी पहले ही सूचना दे दी गई।