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स्कूल ने सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता को नहीं दिया एडमिशन, पूर्व मंत्री ने की मान्यता रद्द करने की मांग

Thu, 18 Oct 2018 01:52 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 18 Oct 2018 01:52 PM IST
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Schools not give admission to Boarding school Sexual assault Victim Girl
rape

बोर्डिंग स्कूल में हैवानियत का शिकार हुई पीड़िता को एडमिशन देने से मना करने वाले नामी स्कूल की मान्यता खतरे में पड़ सकती है। पीड़िता को एडमिशन ने देने से गुस्साए उत्तराखंड के पूर्व शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने स्कूल की मान्यता निरस्त करने की मांग की है।

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बोर्डिंग स्कूल में हैवानियत का शिकार हुई पीड़िता अब स्कूलों की बेरुखी का सामना कर रही है। दून के कई स्कूलों ने उसे प्रवेश देने से इंकार कर दिया। एक बड़े स्कूल ने उस समय हद कर ही कर दी जब उसके माता पिता को यह कहकर लौटा दिया कि दुष्कर्म पीड़िता होने के कारण स्कूल बच्ची को दाखिला नहीं दे सकता।
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इस मामले में पीड़ित पक्ष की अधिवक्ता ने मंगलवार शाम मुख्यमंत्री, शिक्षा विभाग, सीबीएसई और जिला प्रशासन से स्कूल की शिकायत की है। अधिवक्ता ने स्कूल की संबद्धता खत्म करने की मांग की है। 
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बता दें कि बोर्डिंग स्कूल में सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आने के बाद चरणबद्ध तरीके से स्कूल के खिलाफ कार्रवाई हुई। अंत में सीबीएसई ने उसकी मान्यता ही खत्म कर दी। ऐसे में वहां पढ़ने वाले सभी बच्चों के माता पिता उन्हें अन्यत्र शिफ्ट करने का प्रयास करने लगे।

दो टूक कह डाला कि उनकी बेटी दुष्कर्म पीड़िता है

ऐसे में दुष्कर्म पीड़िता के पिता ने भी दून के कई स्कूलों में संपर्क किया और बेटी का दाखिला कराना चाहा। पीड़िता की अधिवक्ता अरुणा नेगी चौहान ने बताया कि दून के कई स्कूलों ने बिना कोई कारण बताए दाखिला देने से इंकार कर दिया।

इसके बाद वे पिछले माह कैंट क्षेत्र के एक बड़े स्कूल में दाखिले की बात करने गए थे। वहां उन्होंने प्रवेश फॉर्म भरा और स्कूल प्रबंधन ने भी अच्छे से बात की। उन्हें लगा कि यह स्कूल बच्ची का प्रवेश ले लेगा, लेकिन कुछ देर बाद ही उनके पैरों तले की जमीन खिसक गई।

प्रबंधन के एक अधिकारी ने उनसे दो टूक कह डाला कि उनकी बेटी दुष्कर्म पीड़िता है, लिहाजा वे इस बच्ची को स्कूल में दाखिला नहीं दे सकते। अधिवक्ता ने बताया कि उस दिन से बच्ची के माता पिता सदमे में हैं।

बच्ची की पहचान न उजागर हो इस डर से पहले वे स्कूल की शिकायत ही नहीं करना चाह रहे थे। हालांकि, बाद में अपने संबंधियों के समझाने के बाद वे स्कूल की शिकायत करने को राजी हुए। 

ये है मामला 

अधिवक्ता अरुणा नेगी चौहान ने बताया कि अभिभावकों के शिकायत के लिए राजी होने पर उन्होंने मुख्यमंत्री, शिक्षा विभाग उत्तराखंड, शिक्षा विभाग दिल्ली, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद(सीबीएसई), जिलाधिकारी व एसएसपी देहरादून को शिकायत की है। उन्होंने स्कूल की मान्यता खत्म करने और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। अधिवक्ता ने यह शिकायत सभी को ई-मेल के जरिए की है। 

बता दें कि गत 16 सितंबर को भाऊवाला स्थित बोर्डिंग स्कूल में गैंगरेप की बात सामने आई थी। पुलिस ने जांच की तो पता चला कि यहां छात्रा से विगत 14 अगस्त को चार छात्रों ने गैंगरेप किया था। यह भी पता चला कि छात्रा ने जब यह बात प्रबंधन को बतानी चाही तो उन्होंने इसे दबाने का प्रयास किया। छात्रा गर्भवती हुई तो उसका जबरन गर्भपात कराया गया।
 

प्राथमिक जांच के आधार पर पुलिस ने निदेशक, प्रिंसिपल, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, उसकी पत्नी व आया को आपराधिक षडयंत्र व अन्य धाराओं में गिरफ्तार किया था। जबकि, तीन नाबालिग छात्रों को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के माध्यम से बाल सुधार गृह भिजवाया और एक बालिग छात्र को गिरफ्तार कर न्यायालय के आदेश पर सुद्धोवाला जेल भेजा। 

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