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इलाज को मोहताज हैं बुजुर्ग फौजी, सेना की योजना हुई ठप

Sat, 03 Oct 2015 12:22 PM IST
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, देहरादून
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 03 Oct 2015 12:22 PM IST
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scheme for ex army man stop due to defense account.

सेना की पूर्व सैनिकों के लिए ताउम्र निशुल्क इलाज देने की एक्स सर्विसमेन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ईसीएचएस) ठप हो गई है। खर्चों पर नियंत्रण के लिए रक्षा मंत्रालय द्वारा लागू डीएफपीएस 2015 (डिफेंस फंड व्यय) बुजुर्ग फौजियों की सेहत बिगाड़ रही है। प्री आडिट के नए फार्मूले से सेना असहाय हो गई है।

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रक्षा लेखा से 'भिड़ेगी' सेना
सैनिकों के रिटायर होने पर उनके खाते से हजारों रुपये तो काट लिए गए, लेकिन अब न तो पॉलीक्लीनिकों में किसी तरह की जांच हो रही है न ही दवा मिल रही है। उत्तराखंड सब एरिया मुख्यालय ने मामले में हस्तक्षेप कर उत्तर भारत एरिया मुख्यालय को विस्तृत रिपोर्ट भेजी है। मामले में सेना अब डिफेंस अकाउंट से भिड़ने के मूड में है।
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गढ़वाल मंडल में सात पॉलीक्लीनिक हैं जो लगभग एक लाख पूर्व सैनिकों को स्वास्थ्य सुविधाएं दे रहा है। लगभग सात करोड़ का बजट इस वित्तीय वर्ष में स्वीकृत है। लेकिन डिफेंस आडिट के नए पेच से दवा खरीद नहीं हो रही है।

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उत्तराखंड में एक लाख सैनिक हो रहे प्रभावित

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उत्तराखंड में राज्य सैनिक कल्याण परिषद के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल गंभीर सिंह नेगी (रि.) ने बताया कि प्री आडिट के नए प्रावधान से पालीक्लीनिकों में दवा सप्लाई ठप है।

नई खरीद नहीं हो पाने से पूर्वसैनिकों को न तो दवा मिल रही है न ही किसी तरह की लैब जांच हो पा रही है। उत्तराखंड एक्ससर्विसेज लीग के अध्यक्ष चेयरमैन ब्रिगेडियर आरएस रावत (रि) ने कहा कि यह गंभीर मामला है।

जब पूर्व सैनिकों ने ईसीएचएस में पैसा जमा किया है तो उनकी अनदेखी क्यों की जा रही है? मामले में उच्च सैन्य अधिकारियों से वार्ता चल रही है। परेशान पूर्व सैनिक स्कीम का हिस्सा होकर भी बाहर से दवा खरीदने को मजबूर हैं। इससे लगभग एक लाख पूर्व सैनिक इलाज के लिए मोहताज हो गए हैं।

सेना हुई असहाय, आईएफए का अडंगा

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डीएफपीएस 2015 लागू होने से सेना असहाय है। मेडिकल कोर इन पॉलीक्लीनिकों को संचालित कर रही है, लेकिन दवा और जांच उपकरण के लिए खरीद के लिए आईएफए (इंटग्रेडेट फाइनेंशियल एडवाइज) का अड़ंगा भारी पड़ रहा है। हर खरीद के लिए आईएफए से स्वीकृत लेने में लंबा समय लग रहा है, जिससे आवश्यक दवाएं तक नहीं खरीदी जा रहीं।

लोकल पर्चेज पर शिकंजा
नई नियमावली के तहत आईएफए के साथ लोकल पर्चेज पर मंत्रालय ने शिकंजा कसा है, जिससे सर्वाधिक दिक्कत आ रही है। कमांडेंट मिलिट्री अस्पताल को एक लाख रुपये का लोकल पर्चेज का अधिकार है। इससे अधिक खरीद प्री आडिट के बाद हो सकती है।

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