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जिंदगी की शाम में बेटी ने रंग भरा
अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 03 Jan 2014 12:56 PM IST
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बेटियां बेटों की तरह ही सहारा बन सकती हैं, यह साबित किया देहरादूर की डॉ. पुनीत सैनी ने।
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जब उन्होंने अपने माता-पिता को अपने साथ रखने की इच्छा जताई तो पिता ओम कुमार सैनी, जो ओएनजीसी से सीनियर डिप्टी डायरेक्टर पद से रिटायर थे, इसके लिए तैयार नहीं हुए। बेटी के घर में रहने के नाम से उनके मन में हिचक थी।
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एसजीआरआर पब्लिक सहस्त्रधारा रोड से प्रधानाचार्या के पद से सेवानिवृत्त मां सरोज भी नहीं चाहती थीं कि वह बेटी के घर रहें, लेकिन एमकेपी पीजी कॉलेज में इंगलिश की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पुनीत ने जोर डाला।
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लिहाजा, आज अपने माता-पिता के साथ ससुराल में रह रही हैं। माता-पिता भी इस बात से बेहद खुश हैं कि उनका फैसला सही था। उधर, पुनीत साफ कहती हैं कि मां-बाप उनके लिए सब कुछ हैं।
बेटे भी नाना-नानी के साथ खुश
दून में प्रीतम रोड पर रह रहीं डॉ. पुनीत सैनी के दो बेटे हैं। एक आठ साल का, जबकि एक चार साल का। दोनों ही 1930 में जन्में अपने तकरीबन 85 वर्षीय नाना-नानी के साथ बेहद खुश हैं।
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बकौल डॉ. पुनीत बुजुर्गों के संग, साथ के संस्कार बच्चों को घर से ही मिलते हैं, जो उन्होंने पाए हैं। पुनीत के पति संजय मदान राजकीय डिग्री कॉलेज, लैंसडाउन में कार्यरत हैं।