वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाली सरस्वती के 'गायब' होने की वजह
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हिमालय से निकलने वाली पौराणिक नदी सरस्वती के विलुत्त होने की वजह का पता लगा लिया गया है।
हिमालयी क्षेत्र ने सबसे अधिक आपदाएं ‘कोल्ड इंटरवल’ में झेली हैं। लगभग तीन हजार साल लगातार यहां आपदाओं का दौर बना रहा है। इसी दौरान हिमालय से निकलने वाली पौराणिक नदी सरस्वती विलुप्त हुई।
सरस्वती के अलावा भी चार हजार साल की बारिश में पैदा हुईं, कई नदियां सूख गईं। मोहन जोदड़ो, सिंधु घाटी की सभ्यता समेत नदियों के किनारे पनप रहीं कई और छोटी सभ्यताएं भी विलुप्त हो गईं। समर (गर्मी) मानसून की कमजोरी इन आपदाओं की वजह बनी।
हिमालयी क्षेत्र में मानसून की परतें खोलने वाले गुफाओं के लाइम स्टोन के अध्ययन के आखिरी चरण ने भारतीय और अमेरिकी विज्ञानियों की टीम को चौंका दिया। मजबूत समर मानसून ने हिमालयी क्षेत्र को पूरे चार हजार साल तर-ब-तर रखा था, लेकिन उसके बाद स्थिति उलट हो गई।
अचानक समर मानसून कमजोर पड़ने लगा और विंटर मानसून मजबूत होता चला गया। हिमालय और उत्तरी गोलार्ध के तापमान का सामंजस्य बिगड़ा तो हिमालय में ताबड़तोड़ आपदाएं शुरू हुईं। ग्लेशियर पिघले, भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गईं। नदियों को पोषित करने वाले जलस्रोत बंद हो गए।
पानी न होने से विलुप्त हो गई कई सभ्यता
वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. एके गुप्ता की अगुवाई में ब्राउन यूनिवर्सिटी अमेरिका के विज्ञानियों की संयुक्त टीम ने लाइम स्टोन की परतों के अध्ययन में पाया कि हिमालयी क्षेत्र में आपदाओं की सबसे विकट स्थिति 2200 ईसा पूर्व से 500 ईसवी के बीच रही थी।
ग्लेशियर पिघले तो पहले नदियां यकायक लबालब हुईं, फिर सूखती चली गईं। चार हजार साल की बारिश के बाद लाखों की संख्या में बने ग्लेशियर पिघले तो भूस्खलन शुरू हो गया।
विज्ञानियों की टीम का मानना है कि अन्य नदियों के साथ सरस्वती नदी भी इस दौर की भेंट चढ़ गई। इस दौरान वनस्पतियां भी प्रभावित हुईं क्योंकि विंटर मानसून वातावरण को उतनी नमी नहीं दे पाया था।
हिमालय में कोल्ड इंटरवल आपदाओं का दौर रहा था। गर्मी और जाड़े में आने वाले मानसून के सामंजस्य बिगड़ने से यह स्थिति हुई। सरस्वती समेत कई नदियां विलुप्त हुईं। नदियों में पानी न होने से सिंधु समेत अन्य सभ्यताएं विलुप्त हो गईं। विंटर मानसून उतनी नमी भी नहीं दे पाया। इस दौरान हिमालय, उत्तरी गोलार्ध के तापमान का सामंजस्य बिगड़ गया था।
- डॉ. एके गुप्ता, निदेशक वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान
ऐसे निकाला लाइम स्टोन की परतों से राज
लाइम स्टोन की परत को गर्म करके कार्बन डाई आक्साइड निकाली। उसमें आक्सीजन आइसोटोप्स की माप की। उसके बाद आक्सीजन के तत्व ‘ओ 18’ और ‘ओ 16’ के बीच का अनुपात निकाला। ‘ओ 18’ ज्यादा तो वर्षा कम और ‘ओ 16’ ज्यादा तो वर्षा अधिक। इसके साथ ही नमी ने इको सिस्टम में उथल-पुथल के संकेत दिए।