घर जाने की जिद पर अड़ी संवासिनियों ने उठाया ऐसा कदम, पुलिस के हाथ-पैर फूले
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घर जाने की जिद पर अड़ी संवासिनियों ने नारी निकेतन खूब हंगामा किया। इस दौरान संवासिनियों ने पथराव कर नारी निकेतन की खिड़की, दरवाजों के शीशे सहित फर्नीचर भी तोड़ डाला।
देहरादून स्थित नारी निकेतन में गुरुवार देर रात संवासिनियों ने जमकर बवाल किया। घर जाने की मांग को लेकर संवासिनी गुस्से में आ गईं। हालात बिगड़ने पर निकेतन में पीएसी बुलानी पड़ी। इसके बाद ही हालातों पर काबू पाया जा सका।
खबर ने मुताबिक गुरुवार की देर शाम कुछ संवासिनियों ने निकेतन की अधीक्षिका कंचन आर्य से घर जाने देने की जिद की, लेकिन उन्हें धमकाकर भगा दिया गया। आरोप है कि कंचन आर्य ने उन्हें बंद करने की चेतावनी दी।
संवासिनियों ने नारेबाजी करते हुए किया पथराव
इस पर संवासिनियां गुस्से में आ गईं और रात करीब नौ बजे संवासिनियों ने नारेबाजी शुरू कर दी। देर रात करीब 11 बजे मामला फिर बिगड़ गया और संवासिनियों ने नारेबाजी करते हुए पथराव कर दिया। कर्मियों ने स्थितियों पर काबू पाने की कोशिश तो जमकर हाथापाई हुई।
हालात बिगड़ने पर नेहरू कॉलोनी पुलिस को सूचना दी गई। एक कंपनी महिला पीएसी मौके पर भेजी गई। सिटी मजिस्ट्रेट जीएस मर्तोलिया व जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट भी मौके पर पहुंचे और किसी तरह हालात को संभाला।
एडीजी राम सिंह मीणा के मुताबिक हालात काबू में हैं। कुछ संवासिनियों ने घर जाने की जिद को लेकर हंगामा किया है। फिलहाल पुलिस बल मौके पर तैनात रहेगा।
इस मामले में अमर उजाला ने राज्य मंत्री महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास रेखा आर्य से बात की तो उन्होंने कहा कि मुझे सुबह अख़बारों के माध्यम से नारी निकेतन में हुए बवाल की जानकारी मिली। मैं नारी निकेतन जा रही हूं। खबर मिली हैं कि कुछ संवासिनियों ने घर जाने की जिद को लेकर हंगामा किया। फिलहाल वहां सब कुछ सामान्य है।
नारी निकेतन में रेप और गर्भपात का मामला
साल 2015 में भी नारी निकेतन में रेप और गर्भपात का मामला सामने आया था। जिसमें कई अधिकारी नप गए थे। अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। मामले के अनुसार 27 नवंबर 2015 को देहरादून एसआई कृष्ण जयारा ने पुलिस स्टेशन नेहरू कालोनी में एफआईआर दर्ज की थी। नारी निकेतन देहरादून में रह रही बहरी और गूंगी युवती के साथ दुष्कर्म का मामला सुर्खियों में छाने के बाद इस मामले में एक स्पेशल कमेटी गठित की गई थी। इस कमेटी ने जांच में पाया था कि वह युवती 2010 से नारी निकेतन में रह रही थी।
यह दुष्कर्म की घटना नारी निकेतन में ही की गई थी। भ्रूण का डीएनए परीक्षण कराया गया जो पॉजिटिव निकला। सरकार की ओर से कहा गया था कि याचिकाकर्ता नारी निकेतन में ही कार्यरत था और उसी ने वहां पर रह रही पीड़िता के साथ दुष्कर्म को अंजाम दिया है।
सरकार की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता ने बहुत की घिनौना कार्य किया है, इसलिए उसे जमानत पर रिहा नहीं किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की एकलपीठ ने पक्षों की सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।