फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   sachin tendulkar friend sanjay narang house encroachment will break

हाईकोर्ट की सख्ती पर अब मसूरी में टूटेगा ‘सचिन का आशियाना’, जानिए क्या है पूरा मामला

Wed, 06 Sep 2017 06:36 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नैनीताल 
ब्यूरो/अमर उजाला, नैनीताल  Updated Wed, 06 Sep 2017 06:36 PM IST
विज्ञापन
sachin tendulkar friend sanjay narang house encroachment will break

नैनीताल हाईकोर्ट ने पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के नजदीकी मित्र एवं बिजनेस पार्टनर संजय नारंग के मसूरी स्थित ‘सचिन के आशियाने’ के नाम से मशहूर ढहलिया बैंक हाउस की इमारत के अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के आदेश दिए हैं।

विज्ञापन


संजय नारंग की ओर से की गई विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कैंट बोर्ड मसूरी को ढहलिया बैंक के पूल और तालाब के मामले में दोबारा सुनवाई करने के आदेश भी दिए। ढहलिया बैंक हाउस संजय नारंग का है। सचिन जब भी मसूरी में छुट्टियां मनाने आते हैं तो इसी हाउस में ठहरते हैं। इस वजह से इसे सचिन का आशियाना के नाम से भी जाना जाने लगा है।
विज्ञापन


मंगलवार को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। संजय नारंग ने याचिका दायर कर छह नवंबर 2014 के कैंट बोर्ड के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें याचिकाकर्ता की ओर से किए गए लगभग 28 हजार स्क्वायर फीट निर्माण को ध्वस्त करने के आदेश दिए गए थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

जुलाई 2016 में विवादों में आए थे सचिन

sachin tendulkar friend sanjay narang house encroachment will break

याची का यह भी कहना था की ध्वस्तीकरण के आदेश के पहले याची को कोई नोटिस नहीं दिया गया। एकल पीठ ने याचिका को खारिज कर दिया था। उक्त आदेश के विरुद्ध याची ने विशेष अपील दायर की।

मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ और न्यायाधीश वीके बिष्ट की खंडपीठ ने पूल व तालाब को छोड़कर अन्य निर्माण के संबंध में दिए गए ध्वस्तीकरण के आदेश को सही मानते हुए विशेष अपील खारिज कर दी। केवल पूल एवं तालाब के संबंध में फिर से सुनवाई करने के आदेश कैंट बोर्ड को दिए। 

ढहलिया बैंक हाउस को तोड़ने के कैंट बोर्ड के आदेशों के चलते जुलाई 2016 में सचिन तेंदुलकर उस वक्त विवादों में फंस गए थे, जब उन पर मामले में कैंट बोर्ड से राहत को तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर परिकर से सिफारिश लगाने का आरोप लगा था। हालांकि बाद में सचिन ने इस पर सफाई दी थी। उन्होंने कहा था कि इस प्रॉपर्टी से उनका कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने केवल एक बैठक में इस विवाद को देखते हुए रक्षा मंत्री से हल निकालने की गुजारिश की थी।

क्या हैं आपत्तियां

sachin tendulkar friend sanjay narang house encroachment will break

- संजय नारंग ने ढहलिया बैंक को आरएल दुग्गल से खरीदा था। संजय ने इसमें निर्माण के लिए अनापत्ति मांगी, लेकिन नहीं मिली। बाद में मरम्मत के नाम पर इस बंगले में भव्य निर्माण हुआ है।

- बंगले के पास महत्वपूर्ण रक्षा संस्थान आईटीएम (प्रौद्योगिकी प्रबंध संस्थान) है। छावनी और रक्षा संपदा के नियमों के मुताबिक इसके 50 मीटर तक कोई निर्माण नहीं किया जा सकता। मरम्मत के लिए भी रक्षा संस्थान से अनापत्ति लेना अनिवार्य है।

- इसके अलावा रक्षा संपदा विभाग संपत्ति के म्यूटेशन (संपत्ति के मालिकाना हक) की अस्पष्ट स्थिति और भवन मानचित्र में नियमों का अनुपालन नहीं है।

विवादित बंगले में तमाम सुविधाएं

sachin tendulkar friend sanjay narang house encroachment will break

ढहलिया बैंक और विवाद साथ-साथ चलते रहे हैं। लंढौर कैंट बोर्ड ने भी ढहलिया बैंक के लिए कई बार चालान किया है। विवादित बंगले में तमाम सुविधाएं हैं, जिनके निर्माण के लिए नियमों को ताक पर रखा गया। भवन निर्माण मानचित्र पर अनुमति देने के लिए सेना और रक्षा संपदा विभाग में लंबे समय तक ठनी रही।

मानचित्र पास होने के बाद भी टेनिस कोर्ट आदि के निर्माण को छावनी बोर्ड ने नियमों का उल्लंघन माना है। मामले के हाईप्रोफाइल होने के कारण सेना और रक्षा संपदा के मध्य कमान मुख्यालयों से कई स्तर पर जांच हुई। जांच के बाद अवैध निर्माण गिराने की कार्रवाई छावनी परिषद ने शुरू कर दी थी लेकिन संजय नारंग ने हाईकोर्ट में कैंट बोर्ड के आदेश को चुनौती दे दी थी। 

बोर्ड अध्यक्ष ने किया था पास, सीईओ ने जताई थी आपत्ति

sachin tendulkar friend sanjay narang house encroachment will break

बंगले के एक हिस्से की जर्जर हालत दिखाकर मरम्मत के लिए वर्ष 2012 में लंढौर छावनी परिषद के पास मानचित्र भेजा गया। इस पर तत्कालीन बोर्ड अध्यक्ष मेजर जनरल रणवीर यादव और मुख्य अधिशासी अधिकारी (सीईओ) अशोक चौधरी के अलग-अलग मत थे।

जनरल यादव ने बोर्ड में बहुमत होने पर मानचित्र पास कर दिया, जबकि सीईओ ने इस पर कड़ी आपत्ति जताकर नियमों का उल्लंघन बताते हुए रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed