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चीनी सीमा पर छात्रावास खोल रहा RSS, आखिर क्यों?

Fri, 17 Apr 2015 04:13 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 17 Apr 2015 04:13 PM IST
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rss will open hostel in uttarakhand china border.

देश की सीमाओं की सुरक्षा के संबंध में सरकारों को बराबर सचेत करने के साथ ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने अपने स्तर से भी प्रयास शुरू कर दिए हैं। चीन की सरहद से लगे उत्तराखंड के सीमांत जिलों में संघ छात्रावास खोल रहा है। इनमें रहने वाले राष्ट्रभक्त छात्र सीमा के सजग प्रहरी के रूप में रहेंगे।

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संघ ने छात्रावास स्थापना की शुरूआत केदारधाम से कर दी है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़, चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग आदि जिले चीन की सीमा के नजदीक हैं। चीनियों के आए दिन यहां घुसपैठ की शिकायतें आती रहती हैं। ताजा हालात के मद्देनजर संघ ने सीमा सुरक्षा के प्रति नजरिया बदला है।
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इन छात्रावासों में रहने वाले छात्रों को सीमा सुरक्षा के प्रति सजग रहने, गांवों के उत्थान में सहयोग और लोगों में पलायन की प्रवृत्ति दूर करने के लिए काम करने को प्रेरित किया जाएगा। सीमांत जिलों में छात्रावासों की श्रंखला का शुभारंभ केदारधाम से हुआ है।
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9 अप्रैल को यहां छात्रावास का भूमि पूजन हुआ है। इस दौरान संघ के क्षेत्र प्रचारक (पश्चिम) आलोक, उत्तरांचल दैवी आपदा पीड़ित सहायता समिति के अध्यक्ष दिनेश गुप्ता और दूसरे पदाधिकारी मौजूद थे।

9 अप्रैल को केदारधाम में भूमि पूजन से शुरूआत

rss will open hostel in uttarakhand china border.

छात्रावासों के निर्माण की योजना संघ दैवी आपदा पीड़ित सहायता समिति के बैनर तले चला रहा है। संघ के छात्रावासों की योजना नैटवाड़ बेल्ट, पुरोला, धारचूला, टांस घाटी में शुरू हो गई है।

कुछ सीमांत क्षेत्रों में छात्रावास निर्माण के लिए संघ भूमि तलाश रहा है। छात्रावासों के साथ ही यहां स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना, क्षेत्रीय विकास कार्य और समाज सुधार की योजनाओं की शुरुआत भी संघ करेगा।

छात्रावासों में रहकर पा सकेंगे शिक्षा
उत्तराखंड के सीमांत जिलों के छात्रावासों में रहने वाले छात्रों को व्यावसायिक शिक्षा भी दी जाएगी। इससे छात्र स्वरोजगार शुरू कर सकेंगे। छात्रावासों में गरीब और सामान्य परिवारों के बच्चे रहेंगे। उन्हें सुसंस्कारित बनाने और व्यक्तित्व विकास के लिए समय-समय पर कार्यक्रम होंगे। आपदा पीड़ित और अनाथ बच्चों को भी छात्रावासों में रखकर शिक्षा-दीक्षा दी जाएगी।

छात्रावासों में रहने वाले छात्र सीमांत जिलों में राष्ट्र के सजग प्रहरी के रूप में रहेंगे। सीमावर्ती गांवों में सुविधाओं का अभाव होने से गांव खाली हो रहे हैं। इस चिंता को देखते हुए राष्ट्रीय स्वयं संघ प्रेरित उत्तरांचल दैवी आपदा पीड़ित सहायता समिति छात्रावासों का निर्माण करा रही है।
- डॉ. हरीश रौतेला, प्रांत प्रचारक, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ

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