{"_id":"9c57814df1b7f5d9eccd03585984d936","slug":"rss-sitaram-kediyal","type":"story","status":"publish","title_hn":"65 की उम्र में पैदल घूमे 573 गांव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
65 की उम्र में पैदल घूमे 573 गांव
अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 04 Apr 2014 09:09 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्व अखिल भारतीय सेवा प्रमुख संत सीताराम केदियाल नौ हजार किमी भारत परिक्रमा पदयात्रा पूरी कर गुरुवार को दून पहुंचे।
विज्ञापन
पढ़ें, पिन के चक्कर में झुग्गी बस्ती के लोगों से पिट गए नेताजी
विज्ञापन
इस मौके पर उन्होंने पत्रकारों को बताया कि वह गांव चलो की अलख जगा रहे हैं। गांवों की आठ संपदा को बचाना है। गांव मजबूत होगा, तभी भारत विश्व गुरु बन पाएगा। शहरीकरण बढ़ रहा है। गांव खाली हो रहे हैं।
विज्ञापन
2012 को कन्याकुमारी से शुरू की पदयात्रा
यह भविष्य के लिए खतरा है। केदियाल ने 9 अगस्त 2012 को कन्याकुमारी से पदयात्रा शुरू की थी। उन्होंने बताया कि यह दिन इसलिए चुना गया था कि लोगों को ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’ और श्रीकृष्ण जयंती की याद दिलाई जाए।
पढ़ें, फौजियों पर कांग्रेस का जोर, भाजपा तलाश रही तोड़
यह ‘भारत जोड़ो’ यात्रा है। लोग जाति, मत, पंथ, दलगत राजनीतिक भाव से ऊपर उठें। लोगों की जीवनशैली, भाषा और वेशभूषा विदेशी हो रही है। बातचीत और रहन-सहन में भारत नजर आना चाहिए।
इस मौके पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रांत कार्यवाह लक्ष्मी प्रसाद जायसवाल, संयुक्त क्षेत्र प्रचार प्रमुख कृपा शंकर, क्षेत्र सेवा प्रमुख गंगाराम, विजय कुमार, भुवन, चंद्रशेखर, अभिषेक शाही, राकेश बौड़ाई आदि रहे।
रोजाना एक गांव में ठहराव
केदियाल ने बताया कि रोजाना वह एक गांव में रुकते हैं। वहां के दुखिया, मुखिया और साधक से मिलते हैं।
पढ़ें, राजनीतिक दलों ने पार की अश्लीलता की हद
उन्होंने बताया कि गांव में आठ संपदा जमीन, जल, वन, जीव, गौ, जन, ग्रामोद्योग, वैद्य संपदा होती है। इसे बचाना है। भारत का जो भाग खो गया है, उसे फिर प्राप्त कर अखंड भारत बनाया जाए।