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Dehradun News: छत्तीसगढ़ में जज बने रौशन का दून में स्वागत
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उत्तरांचल विवि के लाॅ कालेज के छात्र रौशन कुमार पाठक छत्तीसगढ़ न्यायिक सेवा परीक्षा में 16वीं रैंक प्राप्त कर न्यायिक सेवा में चयनित हुए हैं। उनकी इस उपलब्धि पर उन्हें सोमवार को विवि में सम्मानित किया गया।
कॉलेज के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में विवि के अध्यक्ष जितेंद्र जोशी ने उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि रौशन की सफलता से न केवल उनके परिवार बल्कि विवि का नाम भी गौरवान्वित हुआ है। उन्होंने विद्यार्थियों से लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर मेहनत करने का आह्वान किया। विवि के उपकुलपति प्रो. राजेश बहुगुणा ने बताया कि लॉ कॉलेज से शिक्षा प्राप्त कर देश के 15 राज्यों में छात्र न्यायिक सेवा में चयनित हो चुके हैं। उत्तराखंड में सर्वाधिक 16 छात्र जज बनने में सफल हुए हैं। उन्होंने कहा कि न्यायिक सेवा में तीन वर्ष की अनिवार्य प्रैक्टिस की शर्त कई अभ्यर्थियों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित होती है। वहीं, रौशन ने अपनी तैयारी की रणनीति साझा करते हुए कहा कि प्रारंभिक परीक्षा के लिए बेयर एक्ट का गहन अध्ययन, मुख्य परीक्षा के लिए मानक पुस्तकों का चयन और साक्षात्कार के लिए विधि के साथ सामान्य ज्ञान की तैयारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नियमित कक्षाओं में उपस्थिति और अनुशासित अध्ययन से सफलता संभव है।
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कॉलेज के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में विवि के अध्यक्ष जितेंद्र जोशी ने उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि रौशन की सफलता से न केवल उनके परिवार बल्कि विवि का नाम भी गौरवान्वित हुआ है। उन्होंने विद्यार्थियों से लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर मेहनत करने का आह्वान किया। विवि के उपकुलपति प्रो. राजेश बहुगुणा ने बताया कि लॉ कॉलेज से शिक्षा प्राप्त कर देश के 15 राज्यों में छात्र न्यायिक सेवा में चयनित हो चुके हैं। उत्तराखंड में सर्वाधिक 16 छात्र जज बनने में सफल हुए हैं। उन्होंने कहा कि न्यायिक सेवा में तीन वर्ष की अनिवार्य प्रैक्टिस की शर्त कई अभ्यर्थियों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित होती है। वहीं, रौशन ने अपनी तैयारी की रणनीति साझा करते हुए कहा कि प्रारंभिक परीक्षा के लिए बेयर एक्ट का गहन अध्ययन, मुख्य परीक्षा के लिए मानक पुस्तकों का चयन और साक्षात्कार के लिए विधि के साथ सामान्य ज्ञान की तैयारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नियमित कक्षाओं में उपस्थिति और अनुशासित अध्ययन से सफलता संभव है।
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