एक्सक्लूसिव: कब आएगी बाढ़, कहां तक फैलेगा पानी, गोमुख से गंगासागर तक अब हर पल होगी निगरानी
- गोमुख से गंगासागर तक गंगा बेसिन में नदियों में बाढ़ के लिए बनेगा अर्ली वार्निंग सिस्टम
- रुड़की स्थित आईआरआई को मिला राज्य की नदियों में आधुनिक उपकरण लगाने का काम
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गोमुख से गंगासागर तक गंगा बेसिन में बाढ़ के मद्देनजर अर्ली वार्निंग सिस्टम तैयार करने के लिए केंद्र सरकार ने रुड़की स्थित सिंचाई अनुसंधान संस्थान (आईआरआई) को उत्तराखंड की नदियों में आधुनिक उपकरण स्थापित कर मॉनिटरिंग का काम सौंपा है। इन उपकरणों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर केंद्र सरकार के विभाग अर्ली वार्निंग सिस्टम तैयार करेंगे। खास बात यह है कि सभी उपकरण ऑटोमेटिक होंगे और रियल टाइम में नदियों के जलस्तर, बारिश के आंकड़े सेटेलाइट तकनीकी के जरिए रुड़की में बन रहे डाटा सेंटर, जयपुर स्थित अर्थ रिसीविंग स्टेशन और केंद्रीय जल आयोग, दिल्ली को जारी होंगे।
केंद्र सरकार के नेशनल हाइड्रोलॉजी प्रोजेक्ट (एनएचपी) के तहत गंगा बेसिन पर अर्ली वार्निंग सिस्टम तैयार करने के लिए प्रदेशों में नदियों पर आधुनिक उपकरण लगाए जा रहे हैं। उत्तराखंड की नदियों में उपकरण लगाने का काम आईआरआई, रुड़की को सौंपा गया है। ये उपकरण राज्य की मुख्य नदियों से डिस्चार्ज होने वाले पानी की मात्रा, जलस्तर और बारिश के आंकड़ों को रियल टाइम में जारी करेंगे।
संस्थान के एसई एसके साहा ने बताया कि ये उपकरण राज्य की सभी प्रमुख नदियों पर लगाए जाएंगे। इन आंकड़ों पर माडलिंग के जरिए केंद्रीय जल आयोग, नई दिल्ली व अन्य विभागों की ओर से अर्ली वार्निंग सिस्टम तैयार किया जाएगा, जो किसी रियल टाइम में फ्लड फोरकास्टिंग करेगा। साथ ही रियल टाइम डाटा एक्यूजीसन सिस्टम (आरटीडीएएस) हाइड्रो मैट नेटवर्क के जरिए यह भी पता लगाया जा सकेगा कि बाढ़ का पानी कहां तक फैलेगा।
पांच वेदर स्टेशन लगेंगे
प्रोजेक्ट के तहत राज्य की लगभग सभी मुख्य नदियों पर पांच ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन (एडब्लूएस), 59 ऑटोमेटिक वाटर लेवल रिकॉर्डर (एडब्लूएलआर), 44 ऑटोमेटिक रेन गेज (एआरजी), 11 मैनुअल रेन गेज (एमआरजी) और पांच स्नो गेज लगाए जाएंगे। सभी उपकरणों को इंस्टाल कर डाटा जारी करने के काम का लक्ष्य मार्च 2022 तक पूरा किया जाना है।
69 करोड़ की लागत, रुड़की में बन रहा डाटा सेंटर
केंद्र सरकार के इस प्रोजेक्ट के तहत उत्तराखंड की नदियों में उपकरण स्थापित करने और रुड़की में डाटा सेंटर के भवन और अन्य उपकरण आदि के लिए 69 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस सेंटर में रियल टाइम में डाटा रिसीव होगा।