चीन-नेपाल सीमा सटे से उन इलाकों में फौजियों के बूटों की ताल गूंजेगी जहां सड़क न होने की वजह से सेना के जवानों को गश्त करने में दिक्कत आती थी। सरहद के नजदीकी इन इलाकों में नजर रखना मुश्किल हो रहा था। यहां का सड़क संबंधी प्रस्ताव केंद्र सरकार ने रोक दिया था, लेकिन जब सीमा सुरक्षा की निगहबानी की बात आई तो केंद्र सरकार ने प्रदेश शासन का यह प्रस्ताव पास कर दिया है।
अब सीमा पर चीन अपने नापाक इरादों में नहीं हो पाएगा कामयाब
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केंद्र सरकार ने दी हरी झंडी
पंचेश्वर बांध की वजह से केंद्र सरकार ने जौलजीवी तक 135 किमी सड़क बनाए जाने संबंधी प्रदेश शासन का प्रस्ताव रोक दिया था। यह कहा गया था कि बांध की सतह का मामला जब तक तय नहीं होता प्रस्ताव पर गौर नहीं होगा।
बांध कब तक बन पाएगा? यह मामला तय नहीं है। सरहद किनारे बसे गांवों में सीमा सुरक्षा बल और दूसरे सैन्य बलों को अंदर तक छानबीन में मुश्किल खड़ी होती थी। इस संबंध में जल संसाधन मंत्रालय से भी बात की गई।
सीमा सुरक्षा के लिए प्रस्ताव को जरूरी बताए जाने के बाद केंद्र सरकार ने इसे हरी झंडी दे दी है। प्रदेश शासन से कहा गया है कि प्रस्ताव की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) दो हिस्सों में तैयार करे।
डीपीआर का पहला हिस्सा केंद्र को भेजा जा चुका है, उस पर ढाई सौ करोड़ की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है। अब डीपीआर का दूसरा मुख्य हिस्सा तैयार करने में शासन जुटा है। इसके पहुंचने के बाद केंद्र सरकार बजट तय करके जारी करेगी।