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Dehradun News: अभी तो नापी है दो मुठ्ठी भर जमीन, सारा आसमा बाकी है....
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Iजज्बे और हिम्मत से ओतप्रोत युवा अफसरों ने ली आईएमए आईएमए से विदाई
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Iजिंदगी की असली उड़ान बाकी है, जिंदगी के कई इम्तेहान अभी बाकी हैं। अभी तो नापी है मुठ्ठी भर जमीन हमने, अभी तो सारा आसमान बाकी है। आईएमए से एक साल का कड़ा प्रशिक्षण पाने के बाद जब जैंटलमैन कैडेट्स ने अफसर बन अपना पहला कदम बढ़ाया तो उनके अंदर यही जज्बा था। भारत माता तेरी कसम...तेरे रक्षक बनेंगे हम आईएमए के इस गीत को दहाड़ भरी आवाज में गाया तो पूरा आसमान गूंज उठा। सीना ताने युवा अफसरों की टोली जब कदम ताल कर डि्रल स्क्वायर से गुजरी तो लोगों ने तालियों से उनका स्वागत किया। हिम्मत और हौंसले के साथ आगे बढ़ते कदम और आंखों में उमंग। यूं लग रहा था कि देश की धड़कन अब इन युवाओं की धड़कन बन गई है।
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Iपासिंग आउट परेड के बाद जब इन युवा अफसरों ने तिरंगे सामने देश सेवा की कसम भी खाई। तो मानों वहां मौजूद लोगों को यूं लगा कि देश की सरहदें अब और भी चौकस हो गई हैं। युवा अफसरों के कंधों पर उनके परिजनों ने जब पिप्स (सितारे) सजाए तो उनका उत्साह और खुशी देखते ही बन रही थी। किसी की मां गालों को चूम रही थी तो किसी के पिता ने अपने लाल को कंधे पर बैठा लिया। कोई पीढ़ीयों की परंपरा निभाते हुए भारतीय सेना का हिस्सा बना तो किसी को जीवन के फलसफों से देश सेवा का रास्ता दिखाई दिया।
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Iइनमें कुछ ऐसे युवा अफसर भी थे जिन्होंने अपने बलिदानी पिता की विरासत को आगे बढ़ाया। कोई गुदड़ी का लाल था तो कोई अपने लाखों के पैकेज को छोड़कर देश सेवा के रास्तों पर आगे बढ़ गया। ऐसे युवा अफसर भी आईएमए से पासआउट हुए जिनके पास अपने पिता का व्यापार संभालने का मौका था। लेकिन, जब कुछ ठाना तो वह शनिवार को सेना की वर्दी उनके बदन पर थी। साल भर तक इंस्ट्रक्टरों ने उन्हें हर कसौटी पर परखा। अब जब ये अफसर बने तो उन्होंने भी उन्हें बड़े गर्व के साथ सैल्यूट किया।I
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Iजज्बे और हिम्मत से ओतप्रोत युवा अफसरों ने ली आईएमए आईएमए से विदाई
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Iजिंदगी की असली उड़ान बाकी है, जिंदगी के कई इम्तेहान अभी बाकी हैं। अभी तो नापी है मुठ्ठी भर जमीन हमने, अभी तो सारा आसमान बाकी है। आईएमए से एक साल का कड़ा प्रशिक्षण पाने के बाद जब जैंटलमैन कैडेट्स ने अफसर बन अपना पहला कदम बढ़ाया तो उनके अंदर यही जज्बा था। भारत माता तेरी कसम...तेरे रक्षक बनेंगे हम आईएमए के इस गीत को दहाड़ भरी आवाज में गाया तो पूरा आसमान गूंज उठा। सीना ताने युवा अफसरों की टोली जब कदम ताल कर डि्रल स्क्वायर से गुजरी तो लोगों ने तालियों से उनका स्वागत किया। हिम्मत और हौंसले के साथ आगे बढ़ते कदम और आंखों में उमंग। यूं लग रहा था कि देश की धड़कन अब इन युवाओं की धड़कन बन गई है।
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Iपासिंग आउट परेड के बाद जब इन युवा अफसरों ने तिरंगे सामने देश सेवा की कसम भी खाई। तो मानों वहां मौजूद लोगों को यूं लगा कि देश की सरहदें अब और भी चौकस हो गई हैं। युवा अफसरों के कंधों पर उनके परिजनों ने जब पिप्स (सितारे) सजाए तो उनका उत्साह और खुशी देखते ही बन रही थी। किसी की मां गालों को चूम रही थी तो किसी के पिता ने अपने लाल को कंधे पर बैठा लिया। कोई पीढ़ीयों की परंपरा निभाते हुए भारतीय सेना का हिस्सा बना तो किसी को जीवन के फलसफों से देश सेवा का रास्ता दिखाई दिया।
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Iइनमें कुछ ऐसे युवा अफसर भी थे जिन्होंने अपने बलिदानी पिता की विरासत को आगे बढ़ाया। कोई गुदड़ी का लाल था तो कोई अपने लाखों के पैकेज को छोड़कर देश सेवा के रास्तों पर आगे बढ़ गया। ऐसे युवा अफसर भी आईएमए से पासआउट हुए जिनके पास अपने पिता का व्यापार संभालने का मौका था। लेकिन, जब कुछ ठाना तो वह शनिवार को सेना की वर्दी उनके बदन पर थी। साल भर तक इंस्ट्रक्टरों ने उन्हें हर कसौटी पर परखा। अब जब ये अफसर बने तो उन्होंने भी उन्हें बड़े गर्व के साथ सैल्यूट किया।I
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