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उत्तराखंडः बोलियों पर शोध के लिए मिलेंगे दो लाख
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 10 Jul 2015 02:07 PM IST
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अब गढ़वाली-कुमाऊंनी बोली पर शोध करने वालों को दो-दो लाख रुपए की स्कॉलरशिप दी जाएगी।
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उत्तराखंड की बोलियों के संवर्द्धन के लिए पहली बार संस्कृति विभाग की ओर से यह पहल की जा रही है। इसके लिए गढ़वाल और कुमाऊं दोनों जगहों के विश्वविद्यालयों के कुलपति के माध्यम से आवेदन करना होगा। आवेदनों में से एक शोध गढ़वाली का और एक कुमाऊंनी बोली का चुना जाएगा।
राज्य की बोलियों के संवर्द्धन के लिए की गई इस पहल के लिए आवेदन पत्र आमंत्रित कर दिए गए हैं। जिसकी अंतिम तिथि 25 अगस्त तय की गई है। विश्वविद्यालयों से गढ़वाली- कुमाऊंनी बोलियों पर शोध कर रहे विद्यार्थियों के ही आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।
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इसके बाद जिलाधिकारी से संस्तुति कराकर संस्कृति विभाग को भेजने होंगे। विभाग की ओर से इसके लिए एक कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी विभाग में पहुंचे सभी शोध पत्रों को एकत्रित कर उनमें से दो बेहतरीन शोध छांटेगी। इसके लिए दोनों मंडल के इन एक-एक विद्यार्थियों में दो-दो लाख रुपये की स्कॉलरशिप दी जाएगी।
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ऐसे करें आवेदन
- स्कॉलरशिप लेने के लिए मूल निवास प्रमाण पत्र होना आवश्यक है। जिसे कुलपति को देना होगा।
- शोध कार्यों से संबंधित विवि के कुलपति की संस्तुति सहित जिलाधिकारी की संस्तुति भी आवश्यक होगी।
- आवेदन को स्वयं शोधकर्ता भी एमडीडीए कॉलोनी डालनवाला स्थित संस्कृति निदेशालय में जमा करा सकता है।
- निर्धारित तिथि (25 अगस्त) के बाद कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ऐसे होगा चयन
- प्राप्त शोधों को चयन समिति के समक्ष रखा जाएगा। समिति का निर्णय ही अंतिम होगा।
- समिति ही दो शोध को स्कॉलरशिप देने के लिए चुनेगी।
राज्य की बोलियों के संवर्द्धन के लिए यह पहल की गई है। हालांकि यह पहली बार हो रहा है, लेकिन संभव है कि इसे आगे भी जारी रखा जाए। कुलपति के माध्यम से आवेदन मंगाए जा रहे हैं। हालांकि छात्र सीधे भी आवेदन कर सकते हैं, लेकिन मान्यता प्राप्त महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों को ही इसमें शामिल किया जाएगा।
- बीना भट्ट, निदेशक, संस्कृति विभाग