हरिद्वार के SP सिटी को हटाने पर सियासी भूचाल, गृह मंत्री को करना पड़ा हस्तक्षेप
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हरिद्वार के निर्मल विरक्त कुटिया प्रकरण में बुधवार देर रात एक पक्ष के प्रवीण यादव की गिरफ्तारी के बाद सूबे के पुलिस महकमे और सियासत में भूचाल आ गया। गिरफ्तारी के कुछ ही देर बाद हरिद्वार के एसपी सिटी नवनीत सिंह भुल्लर को हटाकर सशस्त्र प्रशिक्षण केंद्र एटीसी से संबद्ध कर दिया गया।
मामला मुख्यमंत्री और गृह मंत्री तक पहुंचा तो गृह मंत्री प्रीतम सिंह को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने एसपी सिटी का तबादला न करने का आश्वासन दिया है।
निर्मल विरक्त कुटिया का मामला इन दिनों सुर्खियों में है। बुधवार रात पुराने मामले में प्रवीण यादव की गिरफ्तारी होने के कुछ देर बाद ही गिरफ्तारी के ऑपरेशन की अगुवाई करने वाले एसपी सिटी नवनीत सिंह भुल्लर का तबादला आदेश आ गया।
हटाने का आदेश आते ही पुलिस महकमे और सियासत में भूचाल
भुल्लर को सिटी से हटाकर सशस्त्र प्रशिक्षण केंद्र एटीसी से संबद्ध कर दिया गया। वे बुधवार शाम ही कई दिनों की छुट्टी से लौटे थे। आईजी (कार्मिक) जीएस मर्तोलिया का जैसे ही यह आदेश जारी हुआ, सूबे की सियासत गरमा गई।
हरिद्वार के कुछ कांग्रेसियों ने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री कार्यालय से संपर्क साध कर पूरा वाकया बताया। दिनभर चली कवायद के बाद बृहस्पतिवार शाम गृहमंत्री प्रीतम सिंह ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने एसपी सिटी का स्थानांतरण रोकने की बात कही। हालांकि अभी तबादला रोकने का आदेश नहीं आया है, लेकिन गृहमंत्री प्रीतम सिंह ने कहा कि एसपी सिटी को नहीं हटाया जाएगा।
मालूम हो कि निर्मल विरक्त कुटिया की बेशकीमती संपत्ति को कब्जाने का आरोप सत्ता के करीबी रणजीत सिंह रावत और अन्य प्रभावशाली लोगों पर लगाते हुए भाजपा नेता सतपाल महाराज और सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने दिल्ली में पिछले दिनों प्रेसवार्ता की थी। इसके बाद सीएम ने भाजपा पर पलटवार कर उसके शासन में ही संपत्ति कब्जाए जाने की कोशिशों की बात कही थी।
रात को ही हटा ली आवास की पुलिस गारद
एसपी सिटी पद से हटाने के चंद मिनटों बाद ही भुल्लर के सरकारी आवास से पुलिस गारद हटाने के आदेश भी आनन-फानन में जारी कर दिए गए। भुल्लर का देवपुरा चौक के पास सरकारी आवास है, जहां हर समय पुलिस गारद तैनात रहती है। बुधवार रात साढ़े 11 बजे उनके तबादले का फैक्स पहुंचा और आधी रात को ही उनके आवास से पुलिस गारद हटा ली गई।
यह था मामला
वर्ष 2009 में निर्मल विरक्त कुटिया के तत्कालीन प्रबंधक भगवंत सिंह ने पुलिस को तहरीर दी थी कि सुखदेव सिंह नामधारी और प्रवीण यादव समेत कई लोगों ने उनका फर्जी त्यागपत्र तैयार कर एक नई ट्रस्ट बनाकर उसे पंजीकृत करा लिया है। इसके बाद कनखल थाने में मुकदमा दर्ज हुआ। लेकिन भाजपा सरकार में अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष रहे सुखदेव सिंह नामधारी के आरोपी होने के चलते आरोप पत्र रोक दिया गया और बाद में एफआर लगा दी गई।