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उत्तराखंड में भर्ती घोटाला: आहत राज्य आंदोलनकारी बोले-इसलिए नहीं किया था उत्तराखंड के लिए संघर्ष

Mon, 05 Sep 2022 03:37 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Mon, 05 Sep 2022 03:37 PM IST
सार

राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ आंदोलनकारी सुशीला बलूनी के मुताबिक राज्य मिलेगा तो पहाड़ के युवाओं को रोजगार मिलेगा इसी सोच के साथ आंदोलन किया। मैं 18 दिन भूख हड़ताल पर रही। कई आंदोलनकारियों ने अपनी शहादत दी, लेकिन युवाओं को रोजगार और विकास का सपना राज्य गठन के वर्षों बाद भी सपना बनकर रह गया है।

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Recruitment scam in Uttarakhand Hurt state agitators got emotional
भर्तियों में घोटालों के विरोध में युवाओं का सड़कों पर प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरकारी नौकरियों की भर्ती में घपलों से राज्य आंदोलनकारी आहत हैं। उनका कहना है कि घोटालों के लिए उन्होंने उत्तराखंड के लिए संघर्ष नहीं किया। उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड अलग होगा तो पहाड़ी राज्य का विकास होगा। यहां के युवाओं को रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। उन्हें राज्य में रोजगार मिलेगा। जिससे पलायन रुकेगा। इसी सोच के साथ राज्य की लड़ाई लड़ी। जिसमें राज्य के 42 से अधिक लोगों ने अपनी शहादत दी।

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मसूरी, खटीमा, मुजफ्फरनगर आदि विभिन्न गोलीकांड में 60 से अधिक लोग घायल हुए। विधानसभा में हुई भर्ती व अन्य भर्तियों में गड़बड़ी से न सिर्फ युवा बल्कि राज्य आंदोलनकारी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। राज्य आंदोलनकारियों का कहना है कि युवाओं और महिलाओं को भर्तियों में हुए इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आगे आना चाहिए।   
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दुख होता है, क्या सोचा था और क्या हो रहा है : बलूनी  
राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ आंदोलनकारी सुशीला बलूनी के मुताबिक राज्य मिलेगा तो पहाड़ के युवाओं को रोजगार मिलेगा इसी सोच के साथ आंदोलन किया। मैं 18 दिन भूख हड़ताल पर रही। कई आंदोलनकारियों ने अपनी शहादत दी, लेकिन युवाओं को रोजगार और विकास का सपना राज्य गठन के वर्षों बाद भी सपना बनकर रह गया है। यह सोचकर दुख होता है कि हमने क्या सोचकर आंदोलन किया और राज्य मिलने के बाद रोजगार के नाम पर क्या हो रहा है। 

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युवाओं के हितों पर डाला गया डाका : जुगरान  
राज्य आंदोलनकारी रविंद्र जुगरान के मुताबिक संविधान के अनुच्छेद 14 व 16 में स्पष्ट है कि सरकारी, अर्द्धसरकारी या अन्य कोई ऐसी नौकरी जिसमें सरकारी खजाने से वेतन मिलता है। उसके लिए नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया अपनाया जाना जरूरी है, लेकिन पता चला है कि विधानसभा में हुई भर्तियों में यह प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। जो राज्य के युवाओं के हितों पर डाका है। 

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भ्रष्टाचार से राज्य को बचाने के लिए लड़ाई की जरूरत : कुकरेती  

राज्य आंदोलनकारी प्रदीप कुकरेती के मुताबिक भर्तियों में भाई, भतीजावाद कर जनता का मखौल उड़ाया जा रहा है। हालत यह है कि भ्रष्टाचार के मामले में राज्य बिहार से भी आगे निकल गया है। राज्य को इस भ्रष्टाचार से बचाने के लिए छात्र, युवाओं, पूर्व सैनिकों, अधिवक्ताओं, महिलाओं और सभी आंदोलनकारी संगठनों को सड़कों पर उतरना होगा। राज्य बचाने के लिए एक और लड़ाई लड़नी होगी।

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