अब बगावत करने वालों के सहारे कांग्रेस की नैया
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‘कांग्रेस में सब चलता है साहब। राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर अपनी ही सरकार को घेरना हो या फिर टिकट न मिलने पर पार्टी से बगावत करनी हो, यहां सब जायज है। पार्टी से पूर्व में बगावत करने वाले कुछ दावेदार आज कई अहम पदों पर हैं। चुनाव से पहले एक बार फिर कई दावेदार टिकट न मिलने पर पार्टी से बगावत कर चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में हैं।’
टिकट के दावेदारों का कहना है कि पार्टी में निर्दलीय चुनाव मैदान में कूदकर खुद को साबित करना पड़ता है। जबकि दबी जुबान कुछ का कहना है कि टिकट मिले न मिले उनका चुनाव लड़ता तय है। इससे 2017 के विधान सभा चुनाव में इस बार भी पार्टी को खासी फजीहत उठानी पड़ सकती है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय का कहना है कि पार्टी में बगावत को कम किया जा सके, इसके लिए हमने अभी से दावेदारों से आवेदन मांगने शुरू कर दिए हैं, कौन कहां से टिकट मांग रहा है, इसे देखा जा रहा है। इसके बाद ही कोई रणनीति बनाई जाएगी।
राज्य ईको टूरिज्म सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष एसपी सिंह वर्ष 2012 में डोईवाला विस क्षेत्र से पार्टी से टिकट न मिलने पर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे। इससे कांग्रेस प्रत्याशी को खासा नुकसान हुआ। इसके बाद एसपी सिंह को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया, लेकिन मुख्यमंत्री हरीश रावत से नजदीकी के चलते पार्टी में उनके लिए फिर से दरवाजे खोल दिए गए। एसपी सिंह बताते हैं कि उस समय हालात ही इसी तरह के थे। स्थानीय लोग चाहते थे कि स्थानीय व्यक्ति चुनाव लड़े। फिर उन्हें खुद को भी साबित करना था, उन्हें 7500 मत मिले। इस बार टिकट न मिलने पर बगावत किए जाने के बारे में पूछे जाने पर वे बताते हैं कि पार्टी उन्हें जो निर्देश देगी वे उस पर अमल करेंगे। पार्टी से बगावत कर चुनाव नहीं लड़ेंगे, 2014 में वे चुनाव मैदान में नहीं उतरे। सिस्टम में रहना जरूरी है।
27 साल से भाजपा के कब्जे में है कैंट
कांग्रेस के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना वर्ष 2002 में राजपुर और इसके बाद लैंसडौन से कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे। धस्माना का कहना है कि इस दौरान वे एनसीपी के टिकट से चुनाव में उतरे। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के नजदीकी माने जाने वाले धस्माना इस बार टिकट के सवाल पर बताते हैं कि उनकी कैंट विधान सभा क्षेत्र से टिकट की दावेदारी है। यदि किसी कारण टिकट न मिला तो पार्टी से बगावत कर चुनाव मैदान में उतरने का सवाल ही नहीं है। उन्होंने कहा कि मेयर के चुनाव में कैंट विस क्षेत्र से उन्हें भाजपा प्रत्याशी के बराबर मत मिले। पिछले 27 साल से यह सीट भाजपा के कब्जे में हैं।
मसूरी से मिला है टिकट का आश्वासन
मसूरी विधान सभा क्षेत्र से टिकट के लिए दावेदारी कर रही कांग्रेस प्रदेश महासचिव गोदावरी थापली वर्ष 2012 में पार्टी से टिकट न मिलने पर बगावत कर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरीं। गोदावरी ने कहा कि उन्हें आश्वासन दिया गया था कि उन्हें टिकट मिलेगा, लेकिन अंतिम समय पर उनका टिकट काट दिया गया, यही वजह रही कि वे निर्दलीय चुनाव लड़ीं। वे बताती हैं कि उन्होंने उस दौरान निर्दलीय चुनाव लड़कर 10 हजार वोट हासिल किए। चुनाव लड़ने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य ने उन्हें सम्मान के साथ पार्टी में फिर से शामिल कराया।
धनोल्टी से है जोत सिंह की दावेदारी
कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट वर्ष 2012 में धनोल्टी से टिकट न मिलने पर पार्टी से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़े। बिष्ट इस बार भी इस सीट से टिकट के दावेदार हैं।
चुनाव में पैराशूट प्रत्याशी मैदान में उतारने के बजाय स्थानीय दावेदारों को टिकट मिले तो बगावत को काफी हद तक कम किया जा सकता है, पार्टी के खिलाफ बगावत करने वालों के खिलाफ ठोस अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।
- नवीन जोशी, प्रदेश महासचिव कांग्रेस