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हरीश रावत को नहीं पसंद हैं ये तीन
रतनमणी डोभाल/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Mon, 23 Dec 2013 09:46 AM IST
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नगर निगम हरिद्वार में मनोनीत दस पार्षदों में से तीन नाम केंद्रीय मंत्री हरीश रावत गुट को रास नहीं आए। इस गुट के विरोध के कारण ही अंतिम समय में पूरी सूची पर ब्रेक लगा।
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कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि प्रदीप अग्रवाल, खुशीराम रतूड़ी एवं राजीव पालीवाल वे तीन नाम है, जिन्हें हरीश रावत गुट हजम नहीं कर पा रहा है।
इसलिए है आपत्ति
शनिवार को आर्यनगर क्षेत्र के आयोजित हरीश रावत के कार्यक्रम के दौरान ही यह बात खुलकर सामने आई। इन तीनों नामों को लेकर कुछ अन्य कांग्रेसियों को भी आपत्ति है। इस गुट का कहना है कि इन तीन नामों को उन्होंने कांग्रेस में कभी सुना नहीं।
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प्रदीप अग्रवाल उत्तर प्रदेश के समय युवक कांग्रेस में संजय पालीवाल गुट में सक्रिय हुआ करते थे। लेकिन उत्तराखंड राज्य बनने के बाद वह सरकारी सस्ते गल्ले की विकलांग कोटे से एक दुकान लेकर राजनीति से गायब हो गए थे। अचानक उन्हें पार्षद मनोनीत करना सक्रिय कांग्रेसियों के गले नहीं उतर रहा है।
इसी प्रकार खुशीराम रतूड़ी को भी कांग्रेसी जानते नहीं हैं। यह नाम कहां से सरकार तक पहुंचा, इसकी पड़ताल करने पर पता चला कि वह युवक कांग्रेस के नेता दीपक जखमोला के रिश्तेदार हैं और हरकी पैड़ी के मंदिर में घंटी बजाते हैं।
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राजीव पालीवाल भी कांग्रेस की राजनीति में कभी सक्रिय नहीं रहे हैं। संजय पालीवाल गुट भी इस समय हरीश रावत गुट के साथ नहीं है। वे मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के पीछे ही खड़े दिखाई देते हैं इसलिए राजीव पालीवाल भी रावत गुट को रास नहीं आ रहा है।
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कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि प्रदीप अग्रवाल, खुशीराम रतूड़ी एवं राजीव पालीवाल वे तीन नाम है, जिन्हें हरीश रावत गुट हजम नहीं कर पा रहा है।
इसलिए है आपत्ति
शनिवार को आर्यनगर क्षेत्र के आयोजित हरीश रावत के कार्यक्रम के दौरान ही यह बात खुलकर सामने आई। इन तीनों नामों को लेकर कुछ अन्य कांग्रेसियों को भी आपत्ति है। इस गुट का कहना है कि इन तीन नामों को उन्होंने कांग्रेस में कभी सुना नहीं।
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प्रदीप अग्रवाल उत्तर प्रदेश के समय युवक कांग्रेस में संजय पालीवाल गुट में सक्रिय हुआ करते थे। लेकिन उत्तराखंड राज्य बनने के बाद वह सरकारी सस्ते गल्ले की विकलांग कोटे से एक दुकान लेकर राजनीति से गायब हो गए थे। अचानक उन्हें पार्षद मनोनीत करना सक्रिय कांग्रेसियों के गले नहीं उतर रहा है।
इसी प्रकार खुशीराम रतूड़ी को भी कांग्रेसी जानते नहीं हैं। यह नाम कहां से सरकार तक पहुंचा, इसकी पड़ताल करने पर पता चला कि वह युवक कांग्रेस के नेता दीपक जखमोला के रिश्तेदार हैं और हरकी पैड़ी के मंदिर में घंटी बजाते हैं।
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राजीव पालीवाल भी कांग्रेस की राजनीति में कभी सक्रिय नहीं रहे हैं। संजय पालीवाल गुट भी इस समय हरीश रावत गुट के साथ नहीं है। वे मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के पीछे ही खड़े दिखाई देते हैं इसलिए राजीव पालीवाल भी रावत गुट को रास नहीं आ रहा है।