पहले हरक को दागदार बताने वाली BJP अब झेलेगी हरक के दाग
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उत्तराखंड में कांग्रेस छोड़कर नये नवेले भाजपाई बने हरक सिंह रावत पर महिला मित्रों से अंतरंग रिश्तों को लेकर लगे दाग अब भाजपा को झेलने होंगे।
हरक पर दुराचार का मुकदमा दर्ज होने से भाजपाई असहज भी नजर आ रहे हैं। हालांकि हरक के बचाव में अब तक भाजपा का कोई बड़ा नेता भी खुलकर सामने आने से बच रहा है। फिर भी जो संकेत मिल रहे हैं उससे यही लग रहा है कि भाजपा इसे सरकार की सियासी चाल बताते हुए हरक को बेदाग साबित करने की कोशिश पर मंथन में जुटी है।
हरक पर दुराचार के मुकदमे से 13 साल पहले प्रदेश की राजनीति में आए भूचाल की अब पार्ट टू जैसी स्थिति बन रही है। पार्ट टू के किरदार भी वही हैं और पटकथा भी लगभग पहले जैसी है। फर्क सिर्फ इतना है कि तब आरोपी हरक सिंह रावत प्रदेश की कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री थे और अब मंत्री और कांग्रेस दोनों छोड़कर भाजपा के खेमे में शामिल हैं।
13 साल बाद फिर बदली राजनीतिक परिस्थितियां
मुकदमा दर्ज करने वाली इसी युवती ने वर्ष 2003 में दून अस्पताल में एक बच्चे को जन्म दिया था। युवती के तत्कालीन राजस्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत को बच्चे का जैविक पिता बताने के दावे से उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल आ गया था। हरक ने आरोपों को झूठा बताते हुए बेदाग साबित होने तक सदन में पैर न रखने की कसम खाई थी।
तब विपक्ष में बैठे भाजपा नेता हमलावर रुख अपनाते हुए हरक सिंह की गिरफ्तारी और मंत्री पद से हटाने पर अड़ गए थे। वहीं, कांग्रेस के कुछ नेता और खुद हरक दोनों इसे विरोधियों की सियासी चाल बताते हुए सड़क पर संघर्ष करते नजर आते थे।
भले ही बाद में सीबीआई जांच और डीएनए टेस्ट में हरक के इस बिनब्याही युवती के बच्चे का पिता होने की बात साबित नहीं हुई थी। 13 साल बाद आज राजनीतिक परिस्थितियां बदली हैं।
कभी हरक का दामन दागदार बताने वाली भाजपा को अब अपने नेता के यही दाग झेलने होंगे। उधर, तब हरक को बेदाग बताने वाली कांग्रेस हरक पर लगे इस दाग को सियासी ढाल बनाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहेगी।