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राजनाथ सिंह की दिलचस्पी से निकला सच

Sun, 08 Jun 2014 09:19 AM IST
राकेश शर्मा/अमर उजाला, देहरादून
राकेश शर्मा/अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 08 Jun 2014 09:19 AM IST
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ranbir singh fake encounter in dehradun

देहरादून के बहुचर्चित रणवीर एनकाउंटर में पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिए जाने के बाद जहां उत्तराखंड पुलिस के दामन पर कभी न धुलने वाले दाग लग गया है, वहीं देश भर की पुलिस के लिए यह फैसला किसी बड़ी नजीर से कम नहीं है।

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अमूमन ऐसे कम ही एनकाउंटर होते है, जिनमें दोषी पुलिसकर्मी अपने अंजाम तक पहुंच पाते हैं। देहरादून के रणवीर प्रकरण में परिवार की दृढता से ऐसा संभव हो पाया है।
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हालांकि पुलिस का पासा पलटने में मीडिया के साथ कई राजनैतिक कारण भी रहे हैं। मृतक के संसदीय क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने गहरी दिलचस्पी ली। भाकियू अध्यक्ष चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत के रणवीर की देहरादून में श्रद्धांजलि सभा में पहुंचने ने निशंक सरकार को बैक फुट पर ला दिया था।

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पहले दिन पुलिस की मिली वाहवाही

ranbir singh fake encounter in dehradun

देहरादून में एमबीए छात्र रणवीर की मुठभेड़ में हुई हत्या को लेकर पांच साल चली लडाई में आखिरकार इंसाफ की जीत हुई है। सीबीआई कोर्ट द्वारा जेल में बंद 18 पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिए जाने के बाद सूबे में पुलिस के अस्तित्व को झकझोर दिया।

इसी के साथ 3 जुलाई 2009 के काले दिन की याद ताजा हो गई है। उस समय रणवीर पर गोलियां बरसाने वालों अपने इस अंजाम का अहसास तक नहीं रहा होगा।

मुठभेड़ को लेकर पहले दिन पुलिस को वाह-वाही भी मिली, लेकिन अगले दिन रणवीर के पिता रविन्द्र पाल सिंह मोर्चरी में ग्रामीणों के साथ मुखर हुए तो पुलिस ने बलपूवर्क विरोध का दबाने का प्रयास किया।

उस समय थी बीजेपी की सरकार

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मुठभेड़ मीडिया की सुर्खियां बनी तो भाजपा अध्यक्ष और गाजियाबाद से सांसद राजनाथ सिंह भी सक्रिय हुए। रणवीर का परिवार उनके संसदीय क्षेत्र में ही रहता था।

उस समय में भाजपा की निशंक सरकार थी। पीएम रिपोर्ट में पुलिस दावों की पोल खुली तो सरकार ने जांच सीबीसीआईडी के सुपुर्द कर दी।

भाकियू अध्यक्ष चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत ने दून आकर पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कांग्रेस के अलावा रालोद प्रमुख चौधरी अजित सिंह भी रणवीर के परिवार के पक्ष में आ गए।

राजनैतिक घेराबंदी हुई तो सरकार ने पांच दिन बाद सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी। सीबीआई ने भी तह तक जाकर पुलिस के खिलाफ काफी साक्ष्य जुटा लिए।

मामला दिल्ली पहुंचा तो पुलिस को लगा करारा झटका

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इसी बीच रणवीर के पिता रविन्द्र पाल ने सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर पूरे मामले की जांच दिल्ली स्थानांतरित कराकर पुलिस को करारा झटका दे दिया।

पहले तो सात आरोपियों को जमानत मिल गई थी, लेकिन कोर्ट ने बाद में उनकी जमानत निरस्त कर दी थी। सीबीआई के चार्जशीट दाखिल करने के बाद से  आरोपी 18 पुलिसकर्मी तिहाड़ जेल में ही बंद हैं। सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद इन पुलिसकर्मियों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा गए हैं।

ये हैं दोषी
डालनवाला कोतवाली के तत्कालीन इंस्पेक्टर एसके जायसवाल, आराघर चौकी इंचार्ज जीडी भट्ट, कांस्टेबल अजित सिंह, एसओजी प्रभारी नितिन चौहान, एसओ राजेश बिष्ट, उप निरीक्षक नीरज यादव, चंद्रमोहन, सौरभ नौटियाल, विकास बलूनी, सतवीर सिंह, चंद्रपाल, सुनील सैनी, नागेंद्र राठी, संजय रावत, इंद्रभान सिंह, मोहन सिंह राणा, जसपाल गुसाईं और मनोज कुमार।

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