जानिए, रामदेव ने क्यों किया पद्म विभूषण लेने से इनकार?
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बाबा रामदेव ने भारत सरकार का सम्मान पद्म विभूषण लेने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा है कि एक संन्यासी को अपने संन्यास धर्म के साथ-साथ राष्ट्र धर्म और सेवा धर्म को निभाना चाहिए। संन्यासी के लिए तिरस्कार एवं सत्कार दोनों से ही दूर रहना बेहतर है।
बाबा रामदेव ने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को लिखे पत्र में कहा है कि उन्हें पद्म विभूषण मिलने की जानकारी टीवी चैनलों और समाचार पत्रों से हुई है। केंद्र की सद्भावना के प्रति वे कृतज्ञ हैं।
गीता ‘समत्वं योग उच्चयते’ मंत्र का हवाला देते हुए बाबा ने लिखा है कि संन्यासी को सत्कार और तिरस्कार दोनों ही अवस्थाओं में सामान्य रहना चाहिए। बाबा ने यह सम्मान उन्हें न देने का निवेदन केंद्र सरकार से किया है। बाबा के इस निर्णय पर सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
बाबा के निर्णय के साथ पतंजलि योगपीठ
यह निर्णय बाबा रामदेव का है। हम विश्व को रोगमुक्त बनाने में लगे हुए हैं। मान-सम्मान, अपमान से संत हमेशा परे होता है। इस संबंध में बाबा रामदेव जो भी निर्णय लेंगे पतंजलि योगपीठ उसका स्वागत करेगी। बाबा रामदेव इस समय महाराष्ट्र में हैं और मीडिया से कोई बात नहीं करना चाहते।
-आचार्य बालकृष्ण, महामंत्री पतंजलि योगपीठ
...तो पद्मश्री की चाहत
पतंजलि सूत्रों के अनुसार बाबा को यह सम्मान न मिले इसके पीछे भाजपा की एक लॉबी काम कर रही थी। यह लॉबी चाहती थी कि पद्म विभूषण के बजाय बाबा को पद्मश्री दिया जाए। सूत्रों के मुताबिक जैसे ही इसकी भनक बाबा को लगी उन्होंने गृह मंत्रालय को पत्र भेज दिया।