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1947 में भारत में ट्रेनों की रफ्तार जो थी, आज भी वही

Fri, 12 May 2017 10:45 AM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 12 May 2017 10:45 AM IST
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railway upgradation is very slow
train

देश एक ओर हाई स्पीड ट्रेन चलाने की कवायद में जुटा है तो दूसरी ओर रेलवे के अपग्रेडेशन की योजनाएं बेहद सुस्त चाल से चल रही हैं। हमें भारतीय रेलवे में बहुत बदलाव करने की जरूरत है। बृहस्पतिवार को देहरादून पहुंचे भारतीय रेलवे की संस्था टेक्नोलॉजी मिशन फॉर इंडियन रेलवे (टीएमआईआर) के चेयरमैन प्रो. एनएस व्यास ने रेलवे के भविष्य पर चर्चा की।

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प्रो. एनएस व्यास ने कहा कि भारत में ट्रेनों की रफ्तार 1947 में जो थी, आज भी वही है। हमारी मालगाड़ियां आज भी औसतन 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हैं। हमारी पटरियां कमजोर हैं। सिग्नल सिस्टम भी दुरुस्त नहीं है। हमें नई तकनीक के माध्यम से रेलवे को मजबूत बनाना है।
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उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस रफ्तार से रेलवे को अपग्रेड करना चाहते हैं, उस हिसाब से ब्यूरोक्रेसी की चाल बेहद सुस्त है। रेलवे को काम करने वाले लोगों की दरकार है। हमें अभी हाई स्पीड ट्रेन की दिशा में खुद को आगे बढ़ाना है।
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रेल की पटरियां मजबूत बनानी हैं। कुछ अपनी तकनीक विकसित करनी होगी और कुछ दूसरे देशों की तकनीकी का सहारा लेना होगा। उन्होंने यह भी बताया कि रेलवे को तकनीकी तौर पर मजबूत बनाने के लिए काबिल युवाओं को साथ जोड़ने का काम तेजी से चल रहा है। आने वाले समय में निश्चित तौर पर परिणाम बेहतर होंगे। प्रो. व्यास देहरादून में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में आयोजित टेक्नोलॉजी डे के कार्यक्रम में पहुंचे थे।

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