रेल बजटः उत्तराखंड इस बार भी रहा खाली हाथ
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2014-15 के रेल बजट में भी उत्तराखंड को कोई नई ट्रेन नहीं मिली है। हालांकि टेंपल सर्किट में हरिद्वार को शामिल किया गया है।
रेल बजट में सदानंद गौड़ा ने चारधाम से जोड़ने की योजना की भी घोषणा की है। इस तरह उत्तराखंड के खाते में एक उपलब्धि मानी जा सकती है। हालांकि यह अभी प्रस्तावित योजना है। इसको मूर्त रूप मिलने में सालों लग सकते हैं।
उत्तराखंड राज्य गठन के बाद से रेल के पहिये थम से गए हैं। इस बार भी वही कहानी दोहराई गई है। उत्तराखंड में रेल योजनाएं जस की तस चेन पुलिंग पर रुकी हुई है।
विस्तृत पढ़ें, मोदी सरकार का पहला रेल बजट
हर बार राज्य सरकार की ओर हर बार लंबा-चौड़ा मांग पत्र रेल मंत्रालय को भेजा जाता है। रेल चलवाने के लिए उत्तराखंड से लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन होते रहे हैं।
काफी शोर-शराबे के बाद रेल बजट में कुछ नई रेलगाड़ियां चलाने या फिर उनके फेरे बढ़ाने की घोषणा होती रही है। इस बार भी मुख्यमंत्री हरीश रावत ने नई-पुरानी मांगों की एक लंबी सूची रेल मंत्री को भेजी थी।
उत्तराखंड में रेल यातायात बढ़ाने की आवश्यकता
सालों से आस लगाए बैठे उत्तराखंड के लोगों को इंतजार है कि अंग्रेजों के जमाने में बिछाए गए ट्रैक कुछ आगे बढ़े। उत्तराखंड अन्तरराष्ट्रीय पर्यटन के साथ बड़े तीर्थ स्थलों को समेटे है।
हर साल लाखों पर्यटक यहां भ्रमण करते हैं ऐसे में रेल मार्ग का विकल्प उनकी राह आसान बनाएगा। सामरिक दृष्टि से भी उत्तराखंड में रेल यातायात बढ़ाने की आवश्यकता है।
पड़ोसी देश चीन ने सीमाओं तक रेल नेटवर्क बढ़ाने की दिशा में काफी काम किया है। गैरसैण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में विकसित किया जा रहा है।
ऐसे में रेल रामनगर-चौखुटिया रेल मार्ग को अगर स्वीकृति मिलती है तो चौखुटिया से गैरसैण तक की दूरी आसानी से पूरी हो जाएगी।
रोड शो भी हो चुका है
सहारनपुर-देहरादून नए रेल मार्ग के निर्माण भी अतिआवश्यक है। फिलहाल देहरादून जाने वाली सभी गाड़ियों को सहारनपुर होते हुए गोलाकार घूमकर रुड़की-लक्सर हरिद्वार होते हुए जाना पड़ता है।
सहारनपुर देहरादून मार्ग का सर्वेक्षण कार्य पूर्ण भी हो चुका है। इस नए मार्ग का निर्माण हरबर्टपुर (विकासनगर) होते हुए देहरादून करने से यमुना घाटी एवं चकराता-त्यूनी के जनजातीय निवासियों के साथ ही पर्यटकों को भी अत्यन्त सुविधा होगी। साथ ही हरिद्वार मार्ग में भीड़ को नियंत्रित होगी।
दो साल पहले उत्तराखंड पर्यटन विभाग और पर्यटन मंत्रालय एवं रेल मंत्रालय ने संयुक्त रूप से दिल्ली में एक रोड शो आयोजित किया था।
उसमें भी सुझाव आया था कि देहरादून एवं काठगोदाम/रामनगर से मुंबई के लिए एक-एक नई सीधी रेलगाड़ियों को चलाया जाना इस क्षेत्र के पर्यटकों एवं यात्रियों की सुविधा हेतु अत्यन्त आवश्यक है।
इसी प्रकार हिमाचल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, देहरादून, रामनगर, काठगोदाम, टनकपुर रेल मार्गो में एक पर्यटक सर्किट के प्रस्ताव पर भी विचार किया जाना आवश्यक है।
महत्वपूर्ण परियोजनाओं का हाल
रामनगर-चैखुटिया-पिछले रेल बजट की घोषणा
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग-भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही जारी, राष्ट्रीय परियोजना
टनकपुर-बागेश्वर-राष्ट्रीय परियोजना, सर्वे जारी
किच्छा-खटीमा- के लिए राज्य ने शेयर दिया। केंद्रीय मंत्रालय के स्तर पर लंबित, 57.7 किलोमीटर भूमि अधिग्रहण भी हुई
सहारनपुर-देहरादून-सर्वे कार्य पूरा
ऋषिकेश-देहरादून-पिछले बजट की घोषणा, सर्वे पूरा
हरिद्वार-कोटद्वार-रामनगर डाईरेक्ट लिंक -सर्वे जारी
लक्सर-रूड़की-हरिद्वार-देहरादून रेल लाइन का दोहरीकरण-लंबित
काशीपुर- नजीबाबाद-धामपुर-सर्वे पूरा
हल्द्वानी-चोरगलिया-नई रेल लाइन का सर्वे
हल्द्वानी-रीठा साहेब-नई रेल लाइन का सर्वे
पीरान कलियर- रुड़की-हरिद्वार-नई रेल लाइन का सर्वे
देहरादून-पुरोला-नई रेल लाइन का सर्वे
देहरादून-कालसी-नई रेल लाइन का सर्वे
टनकपुर-जौलजीवी-नई रेल लाइन का सर्वे
सालों से अटकी योजनाएं
काठगोदाम-टनकपुर तथा रामनगर से कोटद्वार-देहरादून
लालकुआं-मेलानी-टनकपुर-पीलीभीत-भोजीपुरा-बरेली -ब्राड गेज-स्वीकृत, बजट की कमी
टनकपुर,पूर्णागिरी -नई रेल लाइन
देहरादून एवं काठगोदाम -नई दिल्ली -नॉन स्टाप ट्रेन
दिल्ली- हरिद्वार-ऋषीकेश के लिए एलीवेटेड रेल लाइन