{"_id":"59997a774f1c1b151b8b46ea","slug":"rail-accident-report-from-haridwar","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"रेल हादसाः कानों में अब भी गूंज रही खून से लतपथ पड़े लोगों की अवाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रेल हादसाः कानों में अब भी गूंज रही खून से लतपथ पड़े लोगों की अवाज
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Mon, 21 Aug 2017 04:25 PM IST
सार
- यात्रियों के आंखों के सामने से नहीं हट रहा मौत का मंजर नहीं हट
- कोई रफ्तार तो कोई रेलवे अधिकारियों को बता रहा हादसे का जिम्मेदार
- हर चेहरा बया कर रहा हादसे की खौफनाक दास्तान
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर ट्रेन हादसा
- फोटो : file photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हरिद्वार पहुंचे यात्रियों के आंखों के सामने से मौत का मंजर नहीं हट रहा है। घटना को 20 घंटे बीत जाने के बाद भी हादसा यात्रियों को बार बार याद आ रहा है। हादसे में खून से लतपथ पड़े लोगों की अवाजे यात्रियों को अभ भी सुनाई दे रही है। हरिद्वार पहुंचा हर यात्री उस खौफनाक हादसा की दास्ता बया कर रहा है। हर किसी के चहरे में डर बना हुआ है।
खतौली में हुए रेलवे दुर्घटना में घायलों समेत अन्य को हरिद्वार सुरक्षित लाया गया। घायल तो अस्पताल में भर्ती है, लेकिन जो ठीक है। उनको शांतिकुंज और प्रेमनगर आश्रम में पहुंचाया गया है। लगभग सभी लोग हरिद्वार पहुंच चुके है। यात्रियों को हरिद्वार तक ही आना था। अपनी मंजिल में पहुंचने के बाद भी यात्रियों की हालत सामान्य नहीं हो पा रही है। डरे सहमे यात्री अपने साथियों से उस घटना की बातचीत कर रहे है। यात्रियों के गांव से भी उनकी कुशलता पूछने वालों के फोन लगातार आ रहे है।
हर कोई हादसे के बाद से डर गया है। हादसे में घायलों की बात करे तो वो रेलवे के अधिकारियों को इस घटना का दोषी मानकर चल रहे है। उधर कुछ महिलाएं तेज रफ्तार को इस घटना का कारण मान रही है। ग्वालियर के गांव अजीरा मध्यप्रदेश के रहने वाले सतीश बताते है कि वह एस7 कोच में लेटे हुए थे कि अचानक वह नीचे गिर गए और देखते ही देखते उनका कोच एक तरफ से पलट गया। करीब 15 से 20 मिनट बाद होश आने के बाद उनको ट्रेन के ऊपर बने इमरजेंसी दरवाजे से निकाला गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
खतौली में हुए रेलवे दुर्घटना में घायलों समेत अन्य को हरिद्वार सुरक्षित लाया गया। घायल तो अस्पताल में भर्ती है, लेकिन जो ठीक है। उनको शांतिकुंज और प्रेमनगर आश्रम में पहुंचाया गया है। लगभग सभी लोग हरिद्वार पहुंच चुके है। यात्रियों को हरिद्वार तक ही आना था। अपनी मंजिल में पहुंचने के बाद भी यात्रियों की हालत सामान्य नहीं हो पा रही है। डरे सहमे यात्री अपने साथियों से उस घटना की बातचीत कर रहे है। यात्रियों के गांव से भी उनकी कुशलता पूछने वालों के फोन लगातार आ रहे है।
विज्ञापन
हर कोई हादसे के बाद से डर गया है। हादसे में घायलों की बात करे तो वो रेलवे के अधिकारियों को इस घटना का दोषी मानकर चल रहे है। उधर कुछ महिलाएं तेज रफ्तार को इस घटना का कारण मान रही है। ग्वालियर के गांव अजीरा मध्यप्रदेश के रहने वाले सतीश बताते है कि वह एस7 कोच में लेटे हुए थे कि अचानक वह नीचे गिर गए और देखते ही देखते उनका कोच एक तरफ से पलट गया। करीब 15 से 20 मिनट बाद होश आने के बाद उनको ट्रेन के ऊपर बने इमरजेंसी दरवाजे से निकाला गया।
विज्ञापन
स्कूल में जाकर घुस गया कोच
मुजफ्फरनगर रेल हादसा
- फोटो : file photo
अशोक अग्रवाल निवासी मध्यप्रदेश ने बताया कि वह उस कोच में थे। जो कोच सीधा स्कूल में जाकर घुस गया। पूरी कहानी बताते हुए वह कई बार सदमे में जा रहे है। यहां तक उनकी आंखे तक लाल हो जा ोरही है। वह बताते है कि जैसे ही वह खड़े हुए और गाड़ी डगमगाने लग गई। उनके बाद कोच हवा में जाते हुए स्कूल की दीवार पर जा टकराया।
इसके बाद पूरे कोच में शोर शराबा शुरू हो गया। उनके कोच में तीन लोगों ने अपनी जिदंगी खो दी। तो कई लोग गंभीर घायल हो गए। लेकिन उनको ज्यादा कुछ नहीं हुआ। क्योकि वह किसी के बैग के ऊपर गिरे। जिससे उनको चोटे नहीं आई। ग्वालियर निवासी प्रेमा और जानकी अपने आठ साथियों के साथ हरिद्वार गंगा स्नान को आ रहे थे। उनका कहना है कि ट्रेन की रफ्तार काफी तेज लग रही थी।
प्रेमा बताती है कि ट्रेन की रफ्तार देख उनको डर लग रहा था। हादसे से कुछ देर पहले वह शौचालय गई थी। जब उन्होंने देखा कि ट्रेन की रफ्तार काफी अधिक है। उन्होंने जानकी को पहले ही अंदेशा जताया था कि ये ट्रेन वाला इस ट्रेन को पलटा न दे। यह बात उन्होंने रफ्तार को देखने के बाद कही थी। हादसे के बाद सभी यात्री प्रेमवती से इस बारे में चर्चा जरूर कर रहे थे।
इसके बाद पूरे कोच में शोर शराबा शुरू हो गया। उनके कोच में तीन लोगों ने अपनी जिदंगी खो दी। तो कई लोग गंभीर घायल हो गए। लेकिन उनको ज्यादा कुछ नहीं हुआ। क्योकि वह किसी के बैग के ऊपर गिरे। जिससे उनको चोटे नहीं आई। ग्वालियर निवासी प्रेमा और जानकी अपने आठ साथियों के साथ हरिद्वार गंगा स्नान को आ रहे थे। उनका कहना है कि ट्रेन की रफ्तार काफी तेज लग रही थी।
प्रेमा बताती है कि ट्रेन की रफ्तार देख उनको डर लग रहा था। हादसे से कुछ देर पहले वह शौचालय गई थी। जब उन्होंने देखा कि ट्रेन की रफ्तार काफी अधिक है। उन्होंने जानकी को पहले ही अंदेशा जताया था कि ये ट्रेन वाला इस ट्रेन को पलटा न दे। यह बात उन्होंने रफ्तार को देखने के बाद कही थी। हादसे के बाद सभी यात्री प्रेमवती से इस बारे में चर्चा जरूर कर रहे थे।
किसी का बैग छिना तो किसी का ट्रेन में ही छूट गया
रेल पटरी
- फोटो : demo
हादसे में लोगों के साथ छीनाझपटी भी हुई। घायल यात्रियों के सामानों को लोगों ने छीन लिया। तो कई लोग डर के मारे दोबारा अपने सामान को लेने नहीं पहुंचे। कमल किशोर बताते है कि उनको बाहर निकालते समय उनके हाथ से एक टोपी वाला युवक ने बैग लिया ओर वहां से बैग लेकर फरार हो गया।
बुजुर्ग महिला शकुंतला बताती है कि उनको बाहर निकालते समय एक युवक ने बैग के बारे में जानकारी ली और दूसरे गेट से बैग लेकर चला गया। मध्यप्रदेश के रहने वाले अखिलेश और नागेंद्र बताते है कि उनका बैग ट्रेन में ही छूट गया। हादसा के बाद उनको अपना बैग उठाने में भी डर लग रहा था।
बुजुर्ग महिला शकुंतला बताती है कि उनको बाहर निकालते समय एक युवक ने बैग के बारे में जानकारी ली और दूसरे गेट से बैग लेकर चला गया। मध्यप्रदेश के रहने वाले अखिलेश और नागेंद्र बताते है कि उनका बैग ट्रेन में ही छूट गया। हादसा के बाद उनको अपना बैग उठाने में भी डर लग रहा था।