रैगिंग करने वालों को वापस लाने के लिए स्टूडेंट हुए एकजुट
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रैगिंग के आरोप में सस्पेंड हुए दो छात्रों के समर्थन में उनके साथी छात्र खुलकर सामने आ गए। छात्रों ने कॉलेज के प्रशासनिक भवन के समक्ष धरना देने के बाद बदरीनाथ नेशनल हाईवे पर रैली निकाली। चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र इंटरनल प्रेक्टिकल एक्जाम में भी शामिल नहीं हुए।
वहीं, कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सीएम रावत ने धरना-रैली और प्रायोगिक परीक्षाओं के बहिष्कार की जानकारी होने से इनकार किया है। अलबत्ता उन्होंने रैगिंग के संबंध में आदेश जारी किए हैं। इसमें रैगिंग में लिप्त पाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट, एमसीआई और यूजीसी के निर्देशानुसार प्रवेश रद्द व एफआईआर की चेतावनी दी गई है।
श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस प्रथम बैच के एक छात्र ने छात्रावास में रैगिंग लिए जाने की शिकायत एंटी रैगिंग हेल्प लाइन में की थी। हेल्प लाइन के निर्देशों के बाद मंगलवार को एंटी रैगिंग कमेटी ने रैगिंग के दोषी दो छात्रों कुलदीप चंद्रा और चंद्रेश मर्तोलिया (2015 बैच) को एक सेमेस्टर के लिए निलंबन की संस्तुति दी।
छात्र बांह पर काली पट्टी बांध धरने पर बैठे
दोनों छात्रों से निलंबन से नाराज 2015 बैच के छात्र मंगलवार को भी प्रशासनिक भवन के आगे धरने पर बैठे रहे। उनको समझा बुझाकर भेज दिया गया था, लेकिन बुधवार को चतुर्थ सेमेस्टर के छात्रों ने प्रायोगिक परीक्षा का बहिष्कार कर दिया।
देर शाम छात्र बांह पर काली पट्टी बांधकर प्रशासनिक भवन के समक्ष धरने पर बैठ गए। बाद में उन्होंने मेडिकल कॉलेज से पेट्रोल पंप तक रैली निकालते हुए निलंबन वापस लेने की मांग की। उनका कहना था कि निलंबन गलत हुआ है। रैली के बाद मेडिकल कॉलेज में एकत्रित होकर छात्रों ने कैंडल मार्च किया।
दोनों छात्रों का निलंबन आरोप पुष्ट होने के बाद हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने रैगिंग रोकने के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। रैली निकालने का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है।
-प्रो. सीएम रावत, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज श्रीनगर