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Dehradun News: रेडियो कॉलर बताएगा राजाजी में कहां से आया सफेद गिद्ध, कुनबे का भी लगेगा पता
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Iउत्तराखंड वन विभाग और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम ने राजाजी नेशनल पार्क में इजिप्शियन गिद्ध को पकड़ने के बाद सेटेलाइट टैग लगाकर छोड़ा I
Iगिद्धों की लुप्त प्रजाति ‘इजिप्शियन वल्चर’ ने राजाजी नेशनल पार्क को अपनी नई पसंद बनाया है। इजिप्शियन वल्चर प्रजाति के गिद्धों के संरक्षण और संवर्धन के लिहाज से इसे अच्छा संकेत माना जा रहा है। उत्तराखंड वन विभाग और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम ने राजाजी नेशनल पार्क में विलुप्त होने के करीब पहुंच चुके इस गिद्ध को पकड़ने के बाद उसे सेटेलाइट टैग कर चीला रेंज में छोड़ दिया। गिद्ध को रेडियो कॉलर लगाया गया है, जो सोलर पैनल के माध्यम से चलेगा। अब सेटेलाइट टैग के जरिये यह पता लगेगा कि गिद्ध राजाजी नेशनल पार्क में कहां से आया, उसके कुनबे में कितने अन्य सदस्य हैं। राजाजी के अलावा उसका प्रवास किन अन्य क्षेत्रों में है। संरक्षण और निगरानी से संबंधित पूरी जानकारी भी जुटाई जा सकेगी। इससे पूर्व एक रेड हेडेड गिद्ध को भी रेडियो कॉलर लगाकर छोड़ा गया था।I
Iराजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक कोको रोज के नेतृत्व में उत्तराखंड वन विभाग के वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश नौटियाल व डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के विशेषज्ञों ने बृहस्पतिवार को चीला रेंज में इजिप्शियन वल्चर को पकड़ने के बाद उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया। शुक्रवार को गिद्ध को रेडियो कालर लगाने के बाद आकाश में छोड़ दिया गया। इससे पूर्व पहली बार दुर्लभ प्रजाति के रेड हेडेड वल्चर (लाल सिर वाला गिद्ध) देखा गया था। उसे भी सेटेलाइट टैग लगाकर चीला रेंज में छोड़ा गया था। विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुके गिद्धों की प्रजातियां देखे जाने से वन विभाग और पक्षी प्रेमियों में उत्साह है। गिद्ध को छोड़े जाने के दौरान राजाजी टाइगर रिजर्व से वार्डन चित्रांजली नेगी, वन क्षेत्राधिकारी बीडी तिवारी, मेघपाल सिंह सहित अन्य स्टाफ के लोग मौजूद रहे।
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Iबृहस्पतिवार को राजाजी नेशनल पार्क के चीला रेंज में इजिप्शियन वल्चर को अनुमति लेने के बाद पकड़ा गया। उसका स्वास्थ्य परीक्षण कर सेटेलाइट टैग करने के बाद छोड़ दिया गया है। रेडियो कॉलर में एक सोलर चिप लगी हुई है, जिसके माध्यम से यह संचालित होगा और गिद्ध की पल-पल की जानकारी प्राप्त की जा सकेगी। -डॉ. राकेश नौटियाल, वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी, राजाजी नेशनल पार्कI
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Iयह हैं भारतीय गिद्धI
Iलाल सिर वाले गिद्ध को भारतीय काला गिद्ध या राजा गिद्ध कहते हैं। लंबी चोंच और सफेद पीठ वाला गिद्ध भी भारतीय गिद्ध की प्रजाति है, जो विलुप्तप्राय प्रजातियों में शामिल हैं। यह मध्य और पश्चिमी से लेकर दक्षिणी भारत तक पाई जाती है और खड़ी चट्टानों में अपना घोंसला बनाती है। इस प्रजाति के गिद्ध अपमार्जक या मुर्दाखोर होते हैं और ऊंची उड़ान भरकर इंसानी आबादी के नजदीक अथवा जंगलों में मृत पशु को ढूंढ लेते हैं। यह प्राय: समूह में रहते हैं।I
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Iगिद्धों की लुप्त प्रजाति ‘इजिप्शियन वल्चर’ ने राजाजी नेशनल पार्क को अपनी नई पसंद बनाया है। इजिप्शियन वल्चर प्रजाति के गिद्धों के संरक्षण और संवर्धन के लिहाज से इसे अच्छा संकेत माना जा रहा है। उत्तराखंड वन विभाग और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम ने राजाजी नेशनल पार्क में विलुप्त होने के करीब पहुंच चुके इस गिद्ध को पकड़ने के बाद उसे सेटेलाइट टैग कर चीला रेंज में छोड़ दिया। गिद्ध को रेडियो कॉलर लगाया गया है, जो सोलर पैनल के माध्यम से चलेगा। अब सेटेलाइट टैग के जरिये यह पता लगेगा कि गिद्ध राजाजी नेशनल पार्क में कहां से आया, उसके कुनबे में कितने अन्य सदस्य हैं। राजाजी के अलावा उसका प्रवास किन अन्य क्षेत्रों में है। संरक्षण और निगरानी से संबंधित पूरी जानकारी भी जुटाई जा सकेगी। इससे पूर्व एक रेड हेडेड गिद्ध को भी रेडियो कॉलर लगाकर छोड़ा गया था।I
Iराजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक कोको रोज के नेतृत्व में उत्तराखंड वन विभाग के वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश नौटियाल व डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के विशेषज्ञों ने बृहस्पतिवार को चीला रेंज में इजिप्शियन वल्चर को पकड़ने के बाद उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया। शुक्रवार को गिद्ध को रेडियो कालर लगाने के बाद आकाश में छोड़ दिया गया। इससे पूर्व पहली बार दुर्लभ प्रजाति के रेड हेडेड वल्चर (लाल सिर वाला गिद्ध) देखा गया था। उसे भी सेटेलाइट टैग लगाकर चीला रेंज में छोड़ा गया था। विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुके गिद्धों की प्रजातियां देखे जाने से वन विभाग और पक्षी प्रेमियों में उत्साह है। गिद्ध को छोड़े जाने के दौरान राजाजी टाइगर रिजर्व से वार्डन चित्रांजली नेगी, वन क्षेत्राधिकारी बीडी तिवारी, मेघपाल सिंह सहित अन्य स्टाफ के लोग मौजूद रहे।
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Iबृहस्पतिवार को राजाजी नेशनल पार्क के चीला रेंज में इजिप्शियन वल्चर को अनुमति लेने के बाद पकड़ा गया। उसका स्वास्थ्य परीक्षण कर सेटेलाइट टैग करने के बाद छोड़ दिया गया है। रेडियो कॉलर में एक सोलर चिप लगी हुई है, जिसके माध्यम से यह संचालित होगा और गिद्ध की पल-पल की जानकारी प्राप्त की जा सकेगी। -डॉ. राकेश नौटियाल, वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी, राजाजी नेशनल पार्कI
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Iयह हैं भारतीय गिद्धI
Iलाल सिर वाले गिद्ध को भारतीय काला गिद्ध या राजा गिद्ध कहते हैं। लंबी चोंच और सफेद पीठ वाला गिद्ध भी भारतीय गिद्ध की प्रजाति है, जो विलुप्तप्राय प्रजातियों में शामिल हैं। यह मध्य और पश्चिमी से लेकर दक्षिणी भारत तक पाई जाती है और खड़ी चट्टानों में अपना घोंसला बनाती है। इस प्रजाति के गिद्ध अपमार्जक या मुर्दाखोर होते हैं और ऊंची उड़ान भरकर इंसानी आबादी के नजदीक अथवा जंगलों में मृत पशु को ढूंढ लेते हैं। यह प्राय: समूह में रहते हैं।I