केंद्रीय मंत्री राधामोहन ने कांग्रेस पर साधा निशाना,बोले सत्तर सालों का 'पाप' ढो रहे हैं किसान
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केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि, देशभर के किसान आज पिछले सत्तर सालों का बोझ ढो रहे हैं। लेकिन अब उनकी स्थिति में सुधार आने लगा है। कृषि विश्वविद्यालय पंतनगर के किसान मेले के समापन समारोह में केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि कृषि क्षेत्र में सुधार हो रहा है लेकिन इसकी गति अभी संतोषजनक नहीं है।
उन्होंने किसानों से कहा कि यह पिछले 70 सालों का पाप है जिसे आप भोग रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय शुरू किये गए कार्य जारी रखे जाते तो आज देश की तस्वीर दूसरी होती। केंद्रीय कृषि मंत्री ने पंतनगर विश्वविद्यालय में कौशल विकास के लिए 25 करोड़ रुपये की तीन साल की परियोजना शुरू करने का ऐलान किया और प्रदेश में किसानों की आय दोगुनी करने वाले दस्तावेज को जारी किया।
पंतनगर विश्वविद्यालय के गांधी सभागार में आयोजित समापन समारोह में राधा मोहन ने कहा कि आजादी के बाद देश आगे बढ़ा लेकिन किसान वहीं का वहीं है। 1950 से लेकर 1964 के बीच कृषि में कोई बड़ा सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया। हरित क्रांति को आगे बढ़ाने के लिए भी देश के कुछ हिस्से ही सामने आ पाए। 1980 से 2000 के बीच भी कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में कृषि सुधार के कई कदम उठाए गए लेकिन 2004 के बाद यह सारे काम रोक दिए गए।
कृषि मंत्री के मुताबिक नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनते ही कृषि क्षेत्र में कई सुधारात्मक कदम उठाए। 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के लिए कृषि में नई तकनीक का उपयोग और समेकित खेती पर खासा जोर दिया गया है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड दस करोड़ किसानों को जारी कर दिए गए हैं। ई बाजार, ग्राम्य हाट, सूक्ष्म सिंचाई, सिंचाई आदि को तवज्जो दी जा रही है।
राधा मोहन ने पंतनगर विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय घोषित किये जाने की मांग को नजरअंदाज किया लेकिन विश्वविद्यालय के लिए सत्र 2018-19 से 25 करोड़ रुपये की कौशल विकास परियोजना का ऐलान किया। इस परियोजना के तहत विश्वविद्यालय के शिक्षक और छात्र विदेश में अध्ययन कर सकेंगे। इससे पहले राधा मोहन ने किसान मेले का भ्रमण किया।
विश्वविद्यालय को सीख
पंतनगर। केंद्रीय कृषि मंत्री ने पंतनगर विश्वविद्यालय को केंद्रीय सहायता देने की मांग नहीं मानी। उन्होंने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय सात हजार एकड़ जमीन का मालिक है। इतनी जमीन के मालिक को किसी बैसाखी की जरूरत नहीं होनी चाहिये। पंतनगर से पूर्व में छह हजार एकड़ औद्योगिक प्रयोजन के लिए ली गई यह गलत हुआ।